ममता के ख़िलाफ़ विरोध के स्वर तेज़ हुए

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Image caption ममता बनर्जी के कुछ समर्थक उनका विरोध करने लगे हैं

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके साथ के कई क़रीबी बुद्धिजीवियों और संस्थानों के बीच परस्पर विरोध खुल कर सामने गए हैं.

ये ऐसे लोग हैं, जिन्होंने सिंगूर और नंदीग्राम के आंदोलनों में तृणमूल का साथ दिया और चुनावी प्रचारों में भी ममता बनर्जी के लिए प्रचार किया.

लेकिन पिछले कुछ महीनों से दोनों के बीच विरोध के हालात पैदा हो रहे थे, जो अब खुलकर सामने आ गए हैं.

नहीं मिली अनुमति

कई मानवाधिकार संगठनों ने ऑपरेशन ग्रीन हंट के ख़िलाफ़ भूख हड़ताल का ऐलान किया था, लेकिन पुलिस ने इसकी अनुमति रद्द कर दी.

मानवाधिकार संधठन एपीडीआर का कहना है कि कोलकाता के धर्मतल्ला में भूख हड़ताल के लिए उन्हें पुलिस से अनुमति मिल गई थी, लेकिन इसे बाद में रद्द कर दिया गया.

इस संगठन की नेता रंगटा मुंशी ने कहा, "हमारे पास पुलिस का वो खत है, जिसमें उन्होंने धर्मतल्ला में कार्यक्रम करने की अनुमति रद्द कर दी है. लेकिन उन्होंने बिना अनुमति के अपना कार्यक्रम शुरू कर दिया है."

भूख हड़ताल पर बैठे एक और मानवाधिकार कार्यकर्ता दिलीप चक्रवर्ती का आरोप है कि ममता बनर्जी अपने चुनावी वादों से हट रही हैं.

उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार में कहा था कि राजनैतिक क़ैदियों को छोड़ दिया जाएगा और ऑपरेशन ग्रीन हंट बंद कर दिया जाएगा. उन्होंने एक भी वादा पूरा नहीं किया बल्कि सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री की बात पलट गई."

बुद्धिजीवी नाराज़

भूख हड़ताल की अनुमति रद्द करने का मामला और भी पेचीदा हो गया, जब मैगसेसे पुरस्कार विजेता साहित्यकार महाश्वेता देवी ने सरकार को 'फासीवादी' क़रार दिया.

महाश्वेता देवी, संख्या घोष और अपर्णा सेन जैसे जाने-माने बुद्धिजीवियों का आरोप है कि सरकार प्रतिवादियों का गला घोटना चाहती है.

ग़ौरतलब है कि इन संघटनो को अपना कार्यक्रम करने की अनुमति तो नहीं मिली, लेकिन इसी जगह पर तृणमूल कांग्रेस ट्रेड यूनियन की रैली आयोजित हुई.

पुलिस का कहना है कि उन्होंने पहले आवेदन दिया था, इसलिए तृणमूल के कार्यक्रम को इजाज़त दी गई.

उधर ममता बनर्जी के क़रीबी माने जाने वाले सुनंदो सान्याल ने शिक्षा में सुधार के लए बनाई गई सरकारी समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

सान्याल सरकार के कामकाज के तरीक़ों से खुश नहीं थे. ख़ासकर जिस तरह शिक्षा क्षेत्रों में सरकार अपने लोगों को ला रही थी, उस पर सान्याल ख़फ़ा थे.

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