आख़िर पकड़ा गया 'आदमखोर' तेंदुआ

Image caption पकड़े गए तेंदुए को कानपुर चिडियाघर भेजा जाएगा

उत्तर प्रदेश में नेपाल की सीमा से लगे इलाक़े में एक ख़तरनाक तेंदुआ को पकड़ने में कामयाबी मिली है. सितंबर से अब तक इस तेंदुए ने दो बच्चो को मार डाला था और कई लोगों पर प्राणघातक हमले किए थे.

उत्तर प्रदेश में भारत-नेपाल सीमावर्ती ज़िले बहराइच में स्थित कतर्नियाघाट अभ्यारण्य बाघों और तेंदुओं की अच्छी संख्या के लिए विख्यात है.

इस इलाक़े में इस साल आठ लोग को बाघों और तेंदुओं ने मार डाला है जबकि 27 लोग घायल हुए हैं.

इसी अभ्यारण्य के आस-पास बसे गांवों में पिछले कुछ महीनों से एक तेंदुए के नरभक्षी होने की आशंका ने दहशत का माहौल पैदा कर रखा था.

इस तेंदुए को वन विभाग ने एक स्थानीय व्यक्ति की सहायता से पकड़ने में सफलता प्राप्त की है.

17 नवंबर को रात भर चले अभियान में इस तेंदुए को पकड़ा गया. वन विभाग इस तेंदुए को पिछले 21 सितंबर से पकड़ने के लिए लगातार जाल बिछा रहा था. लेकिन यह तेंदुआ वन विभाग की ओर से लगाए गए क़रीब छह पिंजड़ों से लगातार बचता रहा था.

दहशत

इस तेंदुए ने 21 सितंबर 2011 को कतर्नियाघाट अभ्यारण्य के नारायण पुर टांडा गाँव के करण सिंह की 10 वर्षीय पुत्री अर्चना पर सबसे पहला हमला किया था, लेकिन अर्चना बच गई थी.

इसके बाद इस तेंदुए ने 26 सितंबर को चार वर्षीय रिद्धिमा और 24 अक्तूबर को सात वर्षीय कविता को मार डाला था. साथ ही इस तेंदुए ने कई कम उम्र के बच्चो पर हमला किया था.

पकड़े जाने के पूर्व इस तेंदुए ने अपने आख़िरी हमले में 15 वर्षीय सुनैयना को घायल कर दिया था. इसी हमले के बाद यह तेंदुआ पिंजड़े में फंसकर पकड़ में आ गया.

मनुष्यों पर हमला करने के आदी हो चुके इस तेंदुए को पकड़ने में सक्रिय सहयोगी रहे भूपेंद्र सिंह राणा इसके पकड़े जाने के बारे में विस्तार से बताते हैं.

उन्होंने बताया, "किसी भी शिकारी बाघ प्रजाति के जीव को पकड़ने के लिए सबसे जरूरी होता है उसके आने-जाने के मार्ग का निर्धारण करना, अगर यह मार्ग एक बार निर्धारित हो गया तो फिर उसी मार्ग पर पिंजड़ा लगाकर उसको पकड़ा जा सकता है."

राणा बताते हैं कि इस तेंदुए को पकड़ने के लिए जाल कई दिनों से बिछाया गया था.

वह कहते हैं, "इस तेंदुए को पकड़ने के लिए क़रीब 15 दिन से इसका अध्ययन किया जा रहा था जिससे इसके मार्ग का निर्धारण हो गया. रात में एक बालिका पर हमला करने के बाद यह उसी रास्ते से लौटा और जंगली पेडों से ढँके पिंजड़े में बंधी बकरी को खाने के लालच में आ गया और हमारे जाल में फंस गया."

चिड़ियाघर

दुधवा बाघ अनुकूलन संरक्षित वन के उप निदेशक और कतर्नियाघाट वन जीव प्रभाग के प्रभारी वनाधिकारी गणेश भट्ट ने बताया, "इस पकड़े गए तेंदुए को अब कानपुर चिड़ियाघर भेजा जाएगा जहाँ डाक्टर इसकी जांच करके यह पता लगाएंगे कि यह तेंदुआ वाकई आदमखोर हो चुका है. साथ ही पद चिन्हों के आधार पर यह भी पक्का किया जाएगा कि यह तेंदुआ वही है जिसके आदमखोर होने की बात कही जा रही थी."

इसी तेंदुए के हमले में घायल 10 वर्षीय लक्ष्मी के पिता जयप्रकाश कहते हैं, "साहब इसके पकडे जाने से हम लोगो में जान आ गई है वरना बच्चो को लेकर हम लोगो बहुत दहशत में जी रहे थे."

इस तेंदुए के पकडे जाने से हर तरफ काफ़ी उल्लास का माहौल है और लोगों में काफ़ी ख़ुशी भी व्याप्त है.

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