2जी: सीबीआई के छापे, महाजन के कार्यकाल पर एफ़आईआर दर्ज

  • 19 नवंबर 2011
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Image caption प्रमोद महाजन 2001-2003 में दूरसंचार मंत्री थे. मई 2006 में उनकी उनके भाई ने हत्या कर दी थी

भारत के केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने दूरसंचार क्षेत्र में वर्ष 2001 से 2003 के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक सरकार के कार्यकाल के दौरान 2जी स्पैक्ट्रम के आवंटन के सिलसिले में टेलिकॉम कंपनियों और पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के दफ़्तरों में छापे मारे हैं और नया एफ़आईआर दायर किया है.

इन वर्षों में एनडीए सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रमोद महाजन दूरसंचार मंत्री थे.

सीबीआई ने शनिवार को प्रमोद महाजन के कार्यकाल पर एक प्राथमिक जाँच शुरु की थी जिसका मुख्य मक़सद ये सुनिश्चित करना था कि क्या कुछ कंपनियों को निर्धारित सीमा से अधिक स्पैक्ट्रम का आवंटन किया गया.

इस सिलसिले में वोडाफ़ोन, एयरटेल और पूर्व दूरसंचार सचिव श्यामल घोश के ख़िलाफ़ आवंटन वितरण संबंधित कथित अनियमित्ताओं का आरोप लगाते एफ़आईआर दर्ज किया.

सीबीआई ने ताज़ा एफ़आईआर में आरोप लगाया है कि कुछ टेलिकॉम कंपनियों के बेस स्पैक्ट्रम को 4.4 मैगाहर्ट्ज़ से बढ़ाकर 6.2 मैगाहर्ट्ज़ कर दिया गया और प्रमोद महाजन के कार्यकाल के दौरान उपभोक्ताओं के आधार पर अतिरिक्त स्पैक्ट्रम आवंटित किया गया.

'चिदंबरम को बचाने की कोशिश'

उधर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा, "राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के समय जो फ़ैसले हुए वो मंत्रिमंडल के निर्णय थे, पारदर्शी तरीके से हुए. हमने वर्ष 2001 स्पैक्ट्रम के रेट पर वर्ष 2008 में आवंटन नहीं किया."

उनका कहना था, "ये जाँच को भटकाने की कोशिश है और गृह मंत्री पी चिदंबरम को बचाने की कोशिश है. ये स्पष्ट तौर पर कांग्रेस की ओर से केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के दुरुपयोग का प्रमाण है."

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि उसने निवेदन किया है सीबीआई की भूमिका पर स्थिति स्पष्ट की जाए लेकिन उसे इसका कोई जवाब नहीं मिला है.

प्रकाश जावडेकर का कहना था, "प्रधानमत्री ने माना कि चिदंबरम के सहमत होने के बाद ही स्पैक्ट्रम आवंटन हुआ था. इसलिए यह लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है. इसलिए हम चाहते हैं सीबीआई पूरी तरह से स्वतंत्र हो. कांग्रेस जो भी करे चिदंबरम को बचा नहीं सकती है."

मारन, राजा के ख़िलाफ़ आरोप

इससे पहले सीबीआई संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के पहले कार्यकाल में दयानिधि मारन के मंत्री रहते हुए एयरसेल-मेक्सिस समझौते में कथित साज़िश के बारे में एफ़आईआर दायर कर चुकी है.

ये मामला भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक यानी कैग की रिपोर्ट से शुरु हुआ थे जिसमें आरोप लगाया गया था कि सरकार ख़ज़ाने को ए राजा के कार्यकाल के दौरान स्पैक्ट्रम आवंटन से 1.76 लाख करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ.

इसके बाद इस साल दो फ़रवरी को पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा को गिरफ़्तार कर लिया है.

'स्पैक्ट्रम आवंटन सरकारी नीति के तहत'

शनिवार को ताज़ा एफ़आईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई ने टेलिकॉम कंपनी वोडाफ़ोन के मुंबई स्थित दफ़्तर और एयरटेल के गुड़गांव स्थित दफ़्तर पर छापे मारे.

इस पर भारती एयरटेल ने कहा कि उसने सदा ही कॉर्पोरेट कामकाज और नियामक के नियमों का पालन करने में आदर्श प्रस्तुत किया है.

भारती एयरटेल के प्रवक्ता ने कहा, "हम स्पष्ट तौर पर कहना चाहते हैं हमें समय-समय पर जो भी स्पैक्ट्रम आवंटित हुआ वह शुद्ध तौर पर सरकारी की नीति के तहत हुआ. हम सभी विस्तृत जानकारी, दस्तावेज़ और संवाद जाँचकर्ताओं को उपलब्ध करा रहे हैं और इस मामले में पूरा सहयोग देंगे."

वोडाफ़ोन का कहना था कि वह इस मामले पर बाद में टिप्पणी करेगा.

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