आसियान के साथ मार्च तक संधि पर ज़ोर

आसियान सम्मेलन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption मनमोहन सिंह ने आसियान देशों के साथ संपर्क बढ़ाने पर ज़ोर दिया है

वैश्विक आर्थिक मंदी को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत और आसियान देशों के बीच बेहतर व्यापारिक रिश्ते की ज़रुरत पर ज़ोर देते हुए कहा है कि मार्च, 2012 तक व्यवसायिक तौर पर अर्थपूर्ण सेवाओं और पूंजीनिवेश संधि पर भी हस्ताक्षर करना चाहिए.

बाली में नौंवे इंडो-आसियान देशों के सम्मेलन में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने सुरक्षा मुद्दों पर ज़्यादा संयोजन की ज़रूरत पर बल दिया.

इसमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवादी विरोधी कार्रवाई, प्रशिक्षण अभ्यास और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग शामिल है.

प्रधानमंत्री ने आसियान देशों के साथ भारत की साझीदारी को भारत की विदेश नीति का अहम हिस्सा बताते हुए कहा, "आसियान देशों के साथ हमारा रिश्ता हमारी पूर्वोन्मुख नीति का मूल है."

'सही रास्ते पर'

आपसी संबंधों की व्यापकता पर प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारा आपसी सहयोग सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और मौजूदा वैश्विक आर्थिक मंदी को देखते हुए ये ज़रूरी है कि हम अपनी कोशिशों में और तेज़ी लाएं."

भारत और आसियान देशों के बीच वर्ष 2010-11 में व्यापार 30 प्रतिशत बढ़ा है और अब ये 50 अरब डॉलर तक जा पहुँचा है.

मनमोहन सिंह ने कहा, "व्यापार में बढ़ोत्तरी के इस दर को देखते हुए हमें वर्ष 2012 तक 70 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य हासिल कर लेना चाहिए."

उन्होंने भारत और आसियान देशों के बीच संपर्क बढ़ाने पर ज़ोर दिया और यहा कि यह भारत का रणनीतिक लक्ष्य है.

इस समय सड़क और समुद्र के रास्ते से संपर्क मार्गों के कई प्रस्ताव लंबित हैं, इनमें भारत-बर्मा-थाईलैंड के बीच सड़क का निर्माण और फिर इसका लाओस और कंबोडिया तक विस्तार और वियतनाम को जोड़ने के लिए एक नए मार्ग का विकास शामिल है.

इसके अलावा भारत के उत्तरपूर्वी राज्यों को पूर्वी एशियाई देशों से जोड़ने की एक परियोजना पर भी अध्ययन हुआ है.

प्रधानमंत्री का कहना था कि इन परियोजनाओं का एक साथ अध्ययन किया जाना चाहिए जिससे कि संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सके.

मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत के अंतरिक्ष विभाग ने एक पंचवर्षीय प्रस्ताव को दोबारा हरी झंडी दी है.

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Image caption भारत आसियान के साथ ज़मीनी रिश्ते बढ़ाने पर ज़ोर दे रहा है

इस परियोजना के ज़रिये आसियान देशों और उनके सदस्यों को प्रशिक्षण देने के मक़सद से एक 'ट्रैकिंग एंड रिसेप्शन स्टेशन' और 'डाटा प्रोसेस' करने की सुविधा शुरु की जाएगी.

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि भारत ने पहले ही आसियान देशों के बीच प्रस्तावित आईसीटी कनेक्टिवीटी मास्टर प्लान में सहयोग की इच्छा जताई है.

इसके ज़रिये कंबोडिया, लाओस, बर्मा और वियतनाम जैसे देशों में टेली-मेडिसिन और टेली-एजुकेशन की सुविधा शुरु हो पाएगी.

मिकॉन्ग-भारत के बीच एक आर्थिक गलियारे के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श जारी है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को पूर्वी ऐशियाई देशों के साथ जोड़ेगा.

मनमोहन सिंह ने बताया कि छै आसियान देशों लाओस, कंबोडिया, वियतनाम, सिंगापुर, इंडोनेशिया और फिलीपिंस पहुंचने पर वीज़ा की सुविधा भी शुरु हो चुकी है.

भारत में सम्मेलन

छात्रों और मीडिया के बीच विचारों का आदान-प्रदान भी इस प्रक्रिया की एक अहम कड़ी है.

भारत वर्ष 2002 से आसियान देशों के साथ सम्मलेनों का आयोजन कर रहा है.

वर्ष 2012 दिसंबर में भारत आसियान देशों के साथ अपने संबंधों के सम्मान में एक विशेष सम्मेलन का आयोजन करने जा रहा है, जो भारत के लिए एक ऐतिहासिक मौक़ा होगा.

20-21 दिसंबर को होने वाले इस सम्मेलन से पहले फ़रवरी 2012 में भारत और आसियान देशों के बीच मंत्रिमंडल स्तर की बैठक होगी जिसमें ऊर्जा, कृषि और व्यापार संबंधित चर्चा होगी.

भारत-आसियान देशों के बीच एक कार रैली और नौका अभियान भी इस पहल का हिस्सा है जिसे सुदर्शिनी नाम की नौकायान के ज़रिये पूरा किया जाएगा.

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