घूसखोरी: सुखराम को पाँच साल की सज़ा

  • 19 नवंबर 2011
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Image caption सुखराम को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है

पूर्व संचार मंत्री सुखराम को वर्ष 1996 में एक कंपनी को ठेका देने के बदले तीन लाख रूपए की घूस लने के आरोप में पाँच साल जेल की सज़ा सुनाई गई है.

दिल्ली की एक अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा है कि उन्हें सज़ा के साथ चार लाख रुपए का जुर्माना भी देना होगा.

इससे पहले शुक्रवार को अदालत ने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराया था.

इसके बाद 86 वर्षीय सुखराम ने अपनी उम्र का हवाला देते हुए अदालत से अपील की थी कि सज़ा सुनाते हुए रियायत बरती जाए.

लेकिन जाँच एजेंसी सीबीआई ने उन्हें आदतन अपराधी क़रार देते हुए उन्हें सख़्त से सख़्त सज़ा देने की अपील की थी.

चूंकि तीन साल से अधिक की सज़ा होने पर तत्काल ज़मानत नहीं मिल सकती इसलिए उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया है.

मामला

अदालत ने सुखराम को पद के दुरुपयोग से जुड़े 15 साल पुराने एक मामले में शुक्रवार को दोषी ठहराया था.

अदालत ने पाया है कि सुखराम ने संचार राज्य मंत्री के पद पर रहते हुए एक कंपनी को ग़लत तरीके से फ़ायदा पहुचाने के उद्देश्य से दूरसंचार विभाग के लिए ऊंचे दाम पर तार ख़रीदे.

इस मामले में नवंबर 1996 में प्राथमिकी दायर की गई थी.

वर्ष 1998 में सीबीआई की तरफ़ से दायर किए गए आरोप पत्र में सुखराम और उनके एक सहयोगी पर तीन लाख रुपए की रिश्वत लेने और तार ख़रीदने में धांधली करने का आरोप लगाए गए थे.

विशेष सीबीआई जज आरपी पांडे ने पूर्व मंत्री सुख राम को भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम और आपराधिक षड़यंत्र करने का दोषी पाया था.

और भी हैं मामले

यह सुखराम के खिलाफ़ पहला मामला नही है. इससे पहले भी उन्हें दो अन्य मामलों में दोषी पाया गया था.

वर्ष 2009 फ़रवरी में उन्हें आय से अधिक चार करोड़ 25 लाख रुपए की संपत्ति होने का दोषी पाया गया था.

वही साल 2002 में दूरसंचार विभाग के लिए यंत्रों की खरीददारी में सरकार को एक करोड़ 66 लाख का नुक़सान पहुँचाने के लिए उन्हें भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के तहत दोषी पाया गया था.

इस मामले में सुखराम को तीन साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी.

हिमाचल प्रदेश के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने वाले 86 वर्षीय सुखराम वर्ष 1991 से लेकर 1996 तक पीवी नरसिंह राव सरकार में केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रहे थे.

उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार संबंधी कई आरोप लगे लेकिन हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र में उन्हें संचार क्रांति के जनक के तौर पर जाना जाता है.

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