दोषी पाए गए पूर्व मंत्री सुखराम को आज सुनाई जा सकती है सज़ा

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Image caption पूर्व दूरसंचार मंत्री सुखराम को इससे पहले भी भ्रष्टाचार और आय से आधिक संपत्ति अर्जित करने के मामलों में दोषी पाया गया

पूर्व दूरसंचार मंत्री सुखराम को दिल्ली की एक अदालत ने पद के दुरुपयोग से जुड़े 15 साल पुराने एक मामले में दोषी पाया है. उन्हें शनिवार को सज़ा सुनाई जा सकती है.

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने पाया है कि सुख राम ने दूरसंचार राज्य मंत्री के पद पर रहते हुए एक कंपनी को ग़लत तरीके से फ़ायदा पहुचाने के उद्देश्य से दूरसंचार विभाग के लिए ऊंचे दाम पर तार ख़रीदे.

इस मामले में नवंबर 1996 में प्राथमिक रिपोर्ट दायर की गई थी.

साल 1998 में सीबीआई की तरफ़ से दायर की गई चार्जशीट में सुखराम और उनके एक सहयोगी पर तीन लाख रुपए की रिश्वत लेने और तार ख़रीदने में धांधली करने का आरोप लगाए गए थे.

विशेष सीबीआई जज आरपी पांडे ने पूर्व मंत्री सुख राम को भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम और आपराधिक षड़यंत्र करने का दोषी पाया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार विशेष सीबीआई जज ने कहा, ''अभियुक्त सुखराम को भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया गया है.''

तीसरा मामला, अधिकतम सात साल तक सज़ा

यह सुखराम के खिलाफ़ पहला मामला नही है. इससे पहले भी उन्हें दो अन्य मामलों में दोषी पाया गया था.

ज़मानत पर रिहा हुए सुखराम को इस मामले में अधिकतम सात साल की सज़ा हो सकती है.

साल 2009 फ़रवरी में उन्हें आय से अधिक चार करोड़ 25 लाख रुपए की संपत्ति होने का दोषी पाया गया था.

वही साल 2002 में दूरसंचार विभाग के लिए यंत्रो की खरीददारी में सरकार को एक करोड़ 66 लाख का नुकसान कराने के लिए उन्हें भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के तहत दोषी पाया गया था.

इस मामले में सुखराम को तीन साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी.

हिमाचल प्रदेश के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने वाले 82 वर्षीय सुखराम वर्ष 1991 से लेकर 1996 तक केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रहे थे.

उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार संबंधी कई आरोप लगे लेकिन हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र में उन्हें संचार क्रांति के जनक के तौर पर जाना जाता है.

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