'एनडीए सांसद कालाधन ना होने की घोषणा करेंगे'

  • 20 नवंबर 2011
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Image caption आडवाणी ने कहा कि उनकी जनचेतना रैली को सबसे ज़्यादा समर्थन तमिलनाडु में मिला

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अपनी जनचेतना यात्रा की समाप्ति पर कहा कि संसद में एनडीए सांसद ये घोषणा करेंगे कि भारत के बाहर उनका कोई अवैध खाता नहीं है.

आडवाणी ने अपनी 38 दिन की जनचेतना यात्रा का समापन रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में किया.

उनका कहना था, '' राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के नेताओं ने ये सहमति दी है कि वे मंगलवार से शुरु होने वाले संसद के सत्र के पहले सप्ताह में लोकसभा के अध्यक्ष और राज्य सभा के सभापति को ये लिखकर देंगे कि भारत के बाहर किसी भी बैंक में उनका परोक्ष या प्रत्यक्ष रुप से कोई अवैध खाता नहीं है और विदेश में कोई अवैध संपति भी नहीं है.''

रामलीला मैदान में हुई इस रैली में आडवाणी के साथ मंच पर लोकसभा में विपक्ष की नेता सुष्मा स्वराज,पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी और नोट के बदले वोट मामले में अभियुक्त सुधींद्र कुलकर्णी और भाजपा के पूर्व सांसद महावीर भगोरा और फ़ग्गन सिंह कुलस्ते भी मौजूद थे.

'लड़ाई जारी रहेगी'

लालकृष्ण आडवाणी का कहना था कि उनकी यात्रा तो समाप्त हो गई है लेकिन भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ उनकी जंग पूरी नहीं हुई है.

उनका कहना था कि ये जंग तब तक पूरी नहीं होगी जब तक देश को भरोसा नहीं हो जाता कि भ्रष्टाचार पर भारत ने विजय प्राप्त कर ली है.

आडवाणी के अनुसार उनकी यात्रा को सबसे ज़्यादा सफलता तमिलनाडु में मिली जहाँ लोगों ने भारी संख्या में उनका समर्थन किया.

उनका कहना था कि लोगों को देखकर लगा कि उनमें सरकार के ख़िलाफ़ गुस्सा था और ये गुस्सा सरकार के आचरण से है.

आडवाणी का कहना था, ''मनमोहन सिंह की सरकार में एक के बाद एक मंत्री भ्रष्टाचार के मामलों में जेल जा रहे हैं और पिछले दो साल से विपक्षी दल सरकार को कठघरे में खड़ा कर ये पूछ रहें है कि इस शासन के दौरान इतने घोटले क्यों हो रहे हैं, मंहगाई क्यों बढ़ रही है.प्रधानमंत्री स्वंय एक अर्थशास्त्री है और मंहगाई पर नियंत्रण की घोषणा के बावजूद मंहगाई बढ़ रही है.''

उनके अनुसार सरकार मंहगाई पर नियंत्रण कर सकती है लेकिन इसके लिए एक प्रभावी लोकपाल होना चाहिए.

आडवाणी ने कहा कि भ्रष्टाचार पर क़ाबू पाने के लिए सरकार में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है.

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुष्मा स्वराज ने कहा कि वो एक महिला हैं और वो उनकी समस्या समझ सकती हैं कि वे मंहगाई की मार कैसे झेल रहीं है.

उनका कहना था कि मनमोहन सिंह को सिर्फ़ आर्थिक विकासदर दिखाई देती है लेकिन मंहगाई ग़लत नीतियों और सरकार के भ्रष्टाचार के कारण बढ़ी है.

सुष्मा स्वाराज ने कहा,'' इस सरकार के कार्यकाल में 2-जी स्पेक्ट्रम,राष्ट्रमंडल खेल, केजी बेसिन, आदर्श सोसाइटी, एयर इंडिया और खाद्य सब्सिडि घोटाले हुए हैं लेकिन प्रधानमंत्री इन घोटालों का अपने सहयोगियों पर ठिकरा फ़ोड कर अपनी ज़िम्मेदारियों से बरी हो जाते हैं.''

प्रधानमंत्री पद की उम्मीद्वारी

जनतादल (यू )के नेता शरद यादव ने चेताया कि भ्रष्टाचार के किसी भी मामले को दबने नहीं दिया जाएगा और आर-पार की लड़ाई लड़ने का एलान किया.

आडवाणी अपनी इस यात्रा को अपनी पूर्व में की गई छह यात्राओं में से सबसे सफल बता रहे है और कह रहें है कि उन्हें जनता का भरपूर सहयोग मिला है.

वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी का कहना है, ''भाजपा और आरएसएस के नेताओं ने ना चाहते हुए भी आडवाणी को समर्थन दिया और लोगो का समर्थन जुटाया क्योंकि मुद्दा मंहगाई और भ्रष्टाचार पर केंद्रीत था.पार्टी का मक़सद ये भी दिखाना था कि पार्टी में कोई मतभेद नहीं है.आडवाणी ने ये भी साबित कर दिया है कि वे प्रधानमंत्री पद के बेहतर दावेदार है लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में इसका फ़ायदा कम होता दिखता है.''

जानकारों का मानना है कि भाजपा को लग रहा है कि अगर मध्यावधि चुनाव हो जाते है और ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है कि भाजपा नेतृत्व करने का मौक़ा मिलता है तो आडवाणी के नाम पर प्रधानमंत्री की दावेदारी को लेकर सहमति बन जाए लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो आडवाणी की दावेदारी घटती जाएगी.

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