कैसे पारित होंगे 31 विधेयक?

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Image caption संसद के पिछले कुछ सत्रों में विपक्ष के विरोध की वजह से बहुत कम काम ही हो सका था

संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हंगामे के साथ हुई. दोनों ही सदनों में प्रश्न काल में कोई कामकाज नहीं हो सका.

राज्य सभा में दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के बाद ही विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन को बुधवार तक स्थगित कर दिया गया.

लोकसभा में वामदलों ने महंगाई के मुद्दे पर और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने काले धन के मामले में स्थगन प्रस्ताव दिया था लेकिन अध्यक्ष मीरा कुमार ने प्रश्न काल से ही दिन की कार्रवाई शुरू की.

प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा किया जिसके बाद लोकसभा को पहले 12 बजे और फिर बुधवार तक स्थगित कर दिया गया.

दरअसल मंगलवार के दिन प्रश्नकाल में गृह मंत्री से सवाल किए जाने थे लेकिन एनडीए ने शीतकालीन सत्र में गृह मंत्री पी चिदंबरम का बहिष्कार करने का ऐलान किया था. एनडीए का कहना है कि 2-जी घोटाले में चिदंबरम की भूमिका की वजह से वो उनका इस्तीफ़ा चाहते हैं.

लेकिन कांग्रेस ने इस मांग को बेबुनियाद क़रार दिया. कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा, "भारतीय जनता पार्टी जो कर रही है वो सिर्फ राजनीतिक अवसरवाद है, वो जनता को गुमराह करना चाहती है, पर उसे ध्यान रखना चाहिए कि इस सत्र में 31 विधेयकों पर चर्चा होनी है और उन्हें पारित किया जाना है".

अहम विधेयक

संसद का शीतकालीन सत्र काफ़ी अहम माना जा रहा है. सरकार की ओर से दी गई जानकारियों के अनुसार शीतकालीन सत्र में 31 विधेयक संसद के समक्ष पेश किए जाने हैं जिसमें लोकपाल विधेयक भी शामिल है.

संसद की स्थाई समिति लोकपाल विधेयक पर अपनी रिपोर्ट दिसंबर तक पेश करेगी.

इसके अलावा न्यायपालिका जवाबदेही विधेयक भी पारित किया जाना है. भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए ये विधेयक बेहद अहम माना जा रहा है.

इस विधेयक में न्यायाधीशों के व्यवहार का स्तर तय किए जाने, उनकी आय की जानकारी सार्वजनिक किए जाने और उनके ग़लत बर्ताव के ख़िलाफ शिकायत करने के प्रावधान मौजूद हैं.

साथ ही व्हिसलब्लोअर (किसी मामले का पर्दाफ़ाश करने वाले को संरक्षण देने वाला) विधेयक भी पारित किए जाने के लिए अंकित किया गया है.

इस विधेयक में किसी सरकारी मुलाज़िम के अपने अधिकारों का ग़लत इस्तेमाल करने या भ्रष्टाचार में लिप्त होने पर इसके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज़ कराने की व्यवस्था बनाने और ऐसी शिकायत करनेवाले को सुरक्षा देने के प्रावधान हैं.

सरकार इस सत्र में 23 नए विधेयक भी पेश करना चाहती है.

इनमें यूपीए सरकार का बहुचर्चित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक भी शामिल है. सरकार का दावा है कि इस विधेयक की मदद से वो देश की अधिकतम जनता को न्यूनतम मूल्य पर भोजन मुहैया करवाएगी. हालांकि इस विधेयक के मौजूदा मसौदे पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कई आपत्तियां जताई हैं.

इस साल मॉनसून सत्र में भी संसद में ज़्यादा कामकाज नहीं हो पाया था और ज़्यादातर समय विभिन्न मुद्दों को लेकर हंगामा ही होता रहा था.

पिछले साल तो पूरे शीतकालीन सत्र में कुछ घंटे ही कामकाज हो पाया था क्योंकि 2 जी मामले पर विपक्ष जेपीसी की माँग करता रहा था.

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