सोने के मेडल से शर्मिंदगी!

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Image caption गोल्ड मेडल की चमक खो गई है और अब वो लोहा लगता है

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में रहने वाली 28 वर्षीय अंकिता कुमारी को अपनी आँखों पर भरोसा नहीं हो पा रहा है, उन्हें लगता है कि उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया है.

अंकिता के लिए ये और भी दिल कचोटने वाली बात ये है कि पूरे प्रकरण में उनके पिता भी शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं.

बात ही कुछ ऐसी है. अंकिता ने पटना यूनिवर्सिटी से वनस्पति विज्ञान में एमएससी किया था और शीर्ष स्थान हासिल किया था.

दिसंबर 2005 में हुए दीक्षांत समारोह में उन्हें पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों गोल्ड मेडल मिला था, जिसने अंकिता और उनके परिजनों की आँखों में चमक ला दी थी.

बीबीसी से बातचीत में अंकिता ने कहा, "वो मेरे जीवन का सबसे यादगार लम्हा था. मैं अपने को सबसे ऊपर समझ रही थी."

लेकिन दो साल पहले जब उन्होंने अपने गोल्ड मेडल को देखा तो उनकी आँखें खुली रह गईं.

न उस मेडल में चमक रही और न उनकी आँखों में ही. अंकिता इस बात से हताश, परेशान और निराश हैं कि उनका गोल्ड मेडल न सिर्फ़ रंगहीन और फीका पड़ गया है बल्कि लोहे जैसा दिखता है.

शर्मिंदगी

अंकिता के पिता रामजी प्रसाद गुप्ता कहते हैं, "जब हम किसी को ये कहकर मेडल दिखाते थे कि अंकिता गोल्ड मेडलिस्ट है, तो हमें बहुत शर्म आती थी."

अंकिता को भी अपना मेडल दिखाने में शर्म महसूस होती है.

अब तो स्वर्णकार ने भी इसकी पुष्टि कर दी है कि उनका मेडल सोने का था ही नहीं. अंकिता को पहले तो भरोसा नहीं हुआ, लेकिन जब सच सामने आया तो उन्होंने लड़ने की ठानी.

लेकिन इतनी आसानी से न कुछ होता है और न कुछ हुआ. अंकिता ने पहले को विश्वविद्यालय के कई प्रोफ़ेसरों से संपर्क किया, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ.

आख़िरकार अंकिता ने सेवा यात्रा पर निकले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक अपनी बात पहुँचाने की ठानी. नीतीश कुमार ने सरकारी अधिकारियों को मामले की जाँच के आदेश दिए हैं.

जाँच

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Image caption अंकिता को वर्ष 2005 में ये गोल्ड मेडल मिला था

नीतीश कुमार का भी ये कहना है कि यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को छात्रों की भावनाओं से नहीं खेलना चाहिए.

पटना यूनिवर्सिटी के कुलपति शंभूनाथ सिंह ने मामले की जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है, तो एक महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी.

बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "हमने इस मुद्दे को काफ़ी गंभीरता से लिया है. आख़िरकार ये मामला संस्था की प्रतिष्ठा और मर्यादा से जुड़ा हुआ है. ये कैसे हुआ, ये सामने आना चाहिए. ताकि भविष्य में ऐसा न हो."

उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 से 2010 तक दिए गए सभी गोल्ड मेडल्स की जाँच होगी. शंभूनाथ सिंह ने कहा कि इस दौरान 58 अन्य छात्रों को गोल्ड मेडल दिया गया था, लेकिन अंकिता के अलावा किसी ने शिकायत नहीं की है.

दूसरी ओर अंकिता का कहना है कि अगर उनको मिला मेडल गोल्ड मेडल है तो उसे गोल्ड ही रहना चाहिए.

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