मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की लंदन ओलंपिक के बाहिष्कार की मांग

Image caption शिवराजसिंह चौहान ने भारत सरकार से लंदन ओलंपिक 2012 बहिष्कार करने का अपील की है

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने लंदन ओलंपिक 2012 में डाओ कैमिकल कंपनी को प्रायोजक बनाए जाने का कड़ा विरोध किया है.

चौहान ने भारत सरकार से अपील की है कि कंपनी द्वारा प्रायोजक के रूप में भागीदारी जारी रखने की दशा में भारत लंदन ओलंपिक खेलों का बहिष्कार करे.

केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अजय माकन को लिखे एक पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि डाओ कैमिकल कंपनी की एक इकाई यूनीयन कार्बाईड 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के लिए ज़िम्मेदार थी.

चौहान के अनुसार अभी तक डाओ की देनदारियाँ खत्म नहीं हुई है और इसके खिलाफ़ का़नूनी कार्रवाई चल रही है जिसमें भारत सरकार भी शामिल है.

'चौहान पहले नहीं'

चौहान इस तरह की मांग करने वाले पहले आदमी नहीं हैं लेकिन वो शासन में ज़िम्मेदार पद पर बैठे ऐसे पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने इस तरह की मांग की है.

इसके पहले ब्रितानी लेबर पार्टी की टेसा जोवेल जो शैडो ओलंपिक मंत्री हैं, उन्होंने साथी सांसदों के साथ डाओ कैमीकल को प्रायोजक बनाए जाने का विरोध किया था.

इसके अलावा पूर्व भारतीय ओलंपिक खिलाड़ी असलम शेर ख़ान जैसे कई और लोग भी भारत से इस तरह की मांग कर चुके हैं.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस ख़त में और फिर बीबीसी से बातचीत में कहा, "जो धन ओलंपिक के आयोजन को प्रायोजित करने में खर्च होगा उसका उपयोग भोपाल के गैस त्रासदी पीड़ितों पर खर्च करना ज़्यादा उपयोगी होगा."

उन्होंने कहा, "भोपाल में आज भी भोपाल गैस त्रासदी के दूसरी पीढ़ी के अनेक पीड़ित हैं, विधवाएँ और बच्चे हैं और ऐसे में भारतवासी जाकर ओलंपिक में भाग लें ये मन गवारा नहीं करता."

'महज़ अवसरवाद'

भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के अब्दुल जब्बार कहते हैं," तीन दिसंबर को भोपाल गैस कांड की बरसी के पहले लिखा गया यह ख़त महज़ प्रचार पाने का हथकंडा है. हालांकि हम ख़ुद भी यह मांग करते हैं कि भारत सरकार ओलंपिक खेलों का बहिष्कार करे लेकिन चौहान को ख़त लिखने से पहले भोपाल गैस पीड़ितों की मदद के लिए कदम उठाने चाहिए. लेकिन वो जो क़दम उठा सकते हैं, वो भी नहीं उठा रहे हैं."

Image caption सरकारी आंकड़ों के अनुसार भोपाल गैस कांड में मरने वालों की संख्या तीन से चार हज़ार तक थी लकिन गै़र सरकारी आंकड़े कहीं ज़्यादा हैं

जब्बार सालों से गैस पीड़ितों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं और ख़ुद भी भीषण रूप से कार्बाईड हादसे के पीड़ित हैं. वो कहते हैं कि बेहतर होता कि चौहान गैस कांड के मुकदमों का समाधान करने के लिए उस विशेष अदालत का गठन करते जिसका वादा उन्होंने एक साल पहले किया था.

डाओ का ज़िम्मेदारी से इनकार

इस पूरे आंदोलन पर डाओ लगातार कहता आया है कि भोपाल के यूनियन कार्बाईड कारखाने को डाओ कोमिक्लस ने कभी नहीं चलाया लेकिन इस हादसे से बहुत कुछ सीखा है और रसायन उद्योग को सुरक्षित बनाने के लिए काम किया है.

लंदन 2012 आयोजन समिति के अध्यक्ष लॉर्ड को डाओ का बचाव करते हैं. उन्होंने कहा कि भोपाल गैस कांड के दौरान डाओ कैमिकल का यूनियन कार्बाईड से कोई लेना देना नहीं था. लॉर्ड को के अनुसार डाओ कैमिकल उस समय भी यूनीयन कार्बाईड के संपर्क में नहीं थी जब इस हादसे का "अंतिम और सही" निपटारा हुआ था.

डाओ कैमिकल दुनिया की रसायन के क्षेत्र में काम करने वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है. प्रायोजक के तौर 70 लाख पाउंड देने के बदले में इसे ओलंपिक स्टेडियम में 336 से अधिक पैनलों पर अपना विज्ञापन लगाने की अनुमति होगी.

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