किशनजी की मौत फ़र्ज़ी मुठभेड़ में: माओवादी

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Image caption किशनजी की मौत से माओवादियों को बड़ा झटका लगा है.

पश्चिम बंगाल में माओवादियों के प्रमुख आकाश और मारे गए वरिष्ठ माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ़ किशनजी के कुछ परिजनों ने आरोप लगाया है कि किशनजी को फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारा गया.

हैदराबाद से बीबीसी संवाददाता उमर फ़ारूक़ के अनुसार अब किशनजी के शव को लेने के लिए उनके परिवार से संबंधित लोगों का एक दल हैदराबाद से कोलकाता के लिए रवाना हो चुका है.

गुरुवार को केंद्र सरकार ने कहा था कि कोटेश्वर राव पश्चिम बंगाल में बॉरीशाल के जंगल में एक पुलिस मुठभेड़ में मारे गए.

कोलकाता से बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टासाली के अनुसार पुलिस सूत्रों ने बताया है कि कोटेश्वर राव की शिनाख़्त उनसे मिल चुके कुछ पत्रकारों ने कर दी है और अब राव के परिजनों भी उनकी शिनाख्त कर देंगे.

अमिताभ भट्टासाली से बातचीत के दौरान एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ''कोटेश्वर राव की शिनाख्त की जा चुकी है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.''

फ़र्ज़ी मुठभेड़ का आरोप

पश्चिम बंगाल में माओवादियों ने किशनजी के मारे जाने की घटना को फ़र्ज़ी मुठभेड़ बताया है और इसके विरोध में माओवादियों ने 26 और 27 नवंबर को पश्चिम बंगाल में बंद बुलाया है.

माओवादियों की तरफ़ से जवाबी कार्रवाई के ख़तरे को देखते हुए राज्य भर में रेड अलर्ट की घोषणा कर दी गई है.

कई मानवाधिकार संगठनों ने भी इस मुठभेड़ के मामले में जांच किए जाने की मांग की है.

वरिष्ठ माओवादी नेता कोटेश्वर राव के शव को कोलकाता लेने गए चार लोगों के दल का नेतृत्व कर रहे क्रांतिकारी कवि वारा वारा राव ने बीबीसी संवाददाता उमर फ़ारूख को बताया कि वो पश्चिम बंगाल सरकार से अनुरोध करेंगे कि शव को इस दल में शामिल किशन जी की भांजी दीपा को सौंप दिया जाए.

परिजन चाहते है कि किशनजी का अंतिम संस्कार उनके गृहनगर आंध्र प्रदेश के करीमनगर में ही किया जाए.

वारा वारा राव ने कहा कि ज़रूरत पड़ने पर वो अदालत का भी दरवाज़ा खटखटाएंगे.

फ़िलहाल किशनजी के शव को मिदनापुर के एक अस्पताल में रखा गया है.

गुरुवार को किशनजी की मौत की ख़बर आने के बाद उनका परिवार शोक में डूब गया.

मधुराम्मा के तीन पुत्रों में से दो कोटेश्वर राव और वेणुगोपाल राव सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति के सदस्य और पार्टी के बड़े नेताओं में से थे. जबकि एक अन्य पुत्र अन्जनायालू राव पेद्दापल्ली एक सहकारी बैंक में काम करते हैं.

वारा वारा राव ने आरोप लगाया कि किशनजी को एक दिन पहले ही पकड़ लिया गया था लेकिन यह भ्रम फ़ैलाया गया कि वह पुलिस से बच कर भाग गए हैं.

राव के अनुसार किशनजी का स्वास्थ अच्छा नही था और वो ठीक से सुन भी नही पाते थे.

वारा वारा राव ने इस घटना के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ज़िम्मेदार ठहराया.

कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी

साल 1975 में इमरजेंसी के दौरान कोटेश्वर राव कानून की शिक्षा अधूरी छोड़कर रैडिकल स्टुडेंट्स यूनियन में शामिल हुए थे.

बाद में उन्होंने उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में पिपल्स वार ग्रुप का नेतृत्व किया और उसके तीसरे सबसे बड़े नेता बन गए.

कोटेश्वर राव पोलित ब्यूरो के सदस्य थे और महासचिव गणपति और एन केशव राव के बाद तीसरे सबसे अहम व्यक्ति थे.

उनकी मौत को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

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