एयरलाइनों की समस्याएँ सुनी मनमोहन ने

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Image caption किंगफ़िशर एयरलाइन के वित्तीय घाटे के बाद से विमान कंपनियों के संकट पर खुली चर्चा शुरु हुई

भारत की विमान कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की है.

आर्थिक संकट का सामना कर रहीं ये विमान कंपनियाँ वैमानिक ईंधन (एटीएफ़)पर छूट के अलावा सरकार से मदद चाहती हैं.

एक घंटे चली इस बैठक में शामिल होने वाले लोगों में जेट एयरवेज़ के चेयरमैन नरेश गोयल, इंडिगो के संचालक राहुल भाटिया, स्पाइस जेट के सीईओ नील मिल और गो एयर के जेह वाडिया शामिल हैं.

ये बैठक ऐसे समय में हुई है जब विमानन कंपनियाँ नीति में परिवर्तन करके इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देने की मांग कर रही हैं.

समस्याएँ

भारत की प्रमुख विमानन कंपनियों में से एक किंगफ़िशर एयरलाइन के आर्थिक संकट में फँसने से उसकी उड़ानों पर असर पड़ने के बाद सरकार से मदद की गुहार शुरु हुई थी.

इस बैठक से पहले केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री वायलार रवि ने इस बैठक के बारे में पत्रकारों को बताया था कि एयरलाइन प्रमुखों ने प्रधानमंत्री से मुलाक़ात का समय मांगा था जिसपर उन्होंने रज़ामंदी दे दी थी.

उन्होंने कहा, ''देश की विमान कंपनियाँ संकंट में हैं और सरकार से उम्मीद लगाए हुए हैं और क्योंकि विमान परिवहन का प्रमुख साधनों में से है और देश के विकास में इनकी बड़ी भूमिका है. प्रधानमंत्री भी इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं इसलिए उन्होंने तुरंत मिलने का समय भी दे दिया.''

जबकि पिछले दिनों कर्ज़ संकंट का सामना कर रहे किंगफ़िशर एयरलाइन के मदद की गुहार की ख़बरों के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि 'एयरलाइंस को कुशलतापूर्वक प्रबंधन करना चाहिए. लेकिन अगर निजी कंपनियाँ संकट में हों, तो हमें उनकी मदद करने के तरीक़े ढूँढने होंगे'.

विमानन कंपनियों का कहना है कि रुपए के अवमूल्यन, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत बढ़ने और राज्यों सरकारों की ओर से अधिक कर लगाने से वैमानिक ईधन (एटीएफ) का मूल्य भी बढ़ गया है.

सरकारी क्षेत्र की तेल कंपनियाँ अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी हैं कि वे स्वंय संकंट से जूझ रही है और वे अब उधार पर एटीएफ देने की स्थिति में नहीं हैं.

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