प्रधानमंत्री करेंगे एयरलाइन्स प्रमुखों से मुलाक़ात

  • 26 नवंबर 2011
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Image caption किंगफ़िशर एयरलाइन के वित्तीय घाटे के बाद से विमान कंपनियों के संकट पर खुली चर्चा शुरु हो गई है

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शनिवार को विमान कंपनियों की बढ़ती लागत और घटते मुनाफ़े के मुद्दे पर एयरलाइन्स प्रमुखों से मुलाक़ात करेंगे.

ये माना जा रहा है कि इस बैठक में घरेलू निजी विमान कंपनियाँ एयरइंडिया की 'लागत से कम दाम' की रणनीति पर भी चर्चा करेंगे.

नागरिक विमानन मंत्री वायलार रवि ने इस बैठक के बारे में पत्रकारों को बताया कि एयरलाइन प्रमुखों ने प्रधानमंत्री से मुलाक़ात का समय मांगा था जिसपर उन्होंने रज़ामंदी दे दी है.

ये भी उम्मीद जताई जा रही है कि ये कंपनियाँ उड्डयन क्षेत्र में विदेश प्रत्यक्ष निवेश को लाने पर भी बातचीत करेंगी.

पिछले दिनों कर्ज़ संकंट का सामना कर रहे किंगफ़िशर एयरलाइन के मदद की गुहार की ख़बरों के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि 'एयरलाइंस को कुशलतापूर्वक प्रबंधन करना चाहिए. लेकिन अगर निजी कंपनियाँ संकट में हों, तो हमें उनकी मदद करने के तरीक़े ढूँढने होंगे'.

हालांकि किंगफ़िशर एयरलाइन के चैयरमैन विजय मालया ने बाद में ये स्पष्ट भी किया था कि उन्होंने सरकार से कोई सहायता नहीं माँगी थी.

नुक़सान की वजहें

वायलार रवि ने पत्रकारों से कहा, ''देश की विमान कंपनियाँ संकंट में हैं और सरकार से उम्मीद लगाए हुए हैं और क्योंकि विमान परिवहन का प्रमुख साधनों में से है और देश के विकास में इनकी बड़ी भूमिका है. प्रधानमंत्री भी इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं इसलिए उन्होंने तुरंत मिलने का समय भी दे दिया.''

विमान कंपनियों का कहना है कि रुपए के अवमूल्यन, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत बढ़ने और राज्यों सरकारों की ओर से अधिक कर लगाने से विमान ईधन (एटीएफ) का मूल्य भी बढ़ गया है.

सरकारी क्षेत्र की तेल कंपनियाँ अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी हैं कि वे स्वंय संकंट से जूझ रही है और वे अब उधार पर एटीएफ देने की स्थिति में नहीं हैं.

सरकारी क्षेत्र की एयर इंडिया का कहना है कि वे मंहगे विमानों, अनावश्यक ख़र्चों, पर्याप्त यात्री न मिलने, कर्मचारियों और पायलटों के वेतन-भत्तों से जुड़ी समस्याओं से जूझ रही हैं.

विमान कंपनियाँ एटीएफ की क़ीमतें घटाने और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दिए जाने की माँग कर रही हैं.

एटीएफ की क़ीमतों पर सरकार तो चुप है लेकिन माना जा रहा है कि पिछले दिनों उद्योग मंत्रालय ने एयरलाइनों में 26 फीसदी प्रत्यक्ष विदेश निवेश की अनुमति देने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष रखने की तैयारी कर ली है.

एयरलाइन में प्रत्यक्ष विदेश निवेश दिए जाने की संभावना पर सवाल किए जाने पर विमानन मंत्री का जवाब था कि फिलहाल संसद सत्र चल रहा है इसलिए इस बारे में वे संसद से बाहर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे.

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