किशनजी की मौत के विरोध में भारत बंद

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Image caption माओवादियों के विरोध सप्ताह और बंद को लेकर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है

अपने शीर्ष नेता कोटेश्वर राव यानी किशनजी की मौत के विरोध में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने दिसंबर चार और पाँच को भारत बंद का आह्वान किया है.

इसके अलावा संगठन नें 29 नवंबर से पाँच दिसंबर तक विरोध सप्ताह मनाने का फ़ैसला लिया है.

माओवादी नेता अभय का बयान

संगठन की केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने बीबीसी को पहले से रिकार्ड किये गए एक बयान में आह्वान किया है कि बंद के दौरान रेल और सड़क के अलावा शैक्षणिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद रखा जाए.

संगठन ने अपील जारी करते हुए कहा, "समूचे देशवासियों से हमारी अपील है कि कोटेश्वर राव की "हत्या" के विरोध में 29 नवम्बर से पाँच दिसंबर तक विरोध सप्ताह और भारत बंद को सफल बनाए. विरोध सप्ताह के दौरान सभा, जुलूस, धरना, काली पट्टी लगाना और चक्का जाम करने जैसे कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे."

आरोप

माओवादियों का आरोप है कि किशनजी को पश्चिम बंगाल पुलिस और केंद्रीय गुप्तचर एजेंसियों नें जिंदा पकड़ कर उनकी हत्या कर दी.

माओवादियों की केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय नें कहा,"कामरेड आज़ाद की हत्या पर घड़ियाली आंसू बहाने वाली ममता बनर्जी ने सत्ता में आने के बाद एक तरफ माओवादियों के साथ वार्ता का ढोंग रचाया और दूसरी तरफ एक अग्रणी नेता कोटेश्वर राव उर्फ़ किशनजी की हत्या कर अपने जनविरोधी व फासीवादी चेहरे पर से नकाब उठा दिया."

अभय के अनुसार सुरक्षा बलों और गुप्तचर एजेंसियों ने किशनजी का पीछा कर उन्हें पकड़ लिया और बाद में उन्हें पूर्व-नियोजित ढंग से मार दिया.

अपने बयान में अभय ने कहा, "लुटेरे शासकवर्ग के लोग और उनका मार्गदर्शन करने वाले साम्राज्यवादी जो यह सपना देख रहे हैं कि वह क्रांतिकारी आंदोलन के उच्च नेतृत्व की हत्या कर माओवादी पार्टी का जड़ से सफाया कर देंगे उन्हें शोषित जनता जन युद्ध के ज़रिए ज़रूर दफ़ना देगी."

विरोध सप्ताह

किशनजी की मौत के बाद यह पहली बार है जब संगठन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है.

अभय, जिनका असली नाम मुल्लाजोला वेणुगोपाल है, किशनजी के भाई हैं और नक्सली नेता आज़ाद की हत्या के बाद से ही संगठन के प्रवक्ता है.

माओवादियों के विरोध सप्ताह और बंद को लेकर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है.

हालाँकि विरोध सप्ताह 29 नवंबर से शुरू होगा मगर माओवादी छापामार दस्तों नें अपने स्तर पर अभी से विरोध करना शुरू कर दिया गया है.

छत्तीसगढ़ और झारखण्ड में कई स्थानों पर माओवादियों नें सड़क और रेल मार्ग को अवरोधित करने की कोशिश की है.

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