उस्ताद सुल्तान खान नहीं रहे

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Image caption सारंगी वादन की परंपरा को जीवित बचाएं रखने में उस्ताद सुल्तान खान का अहम योगदान है.

प्रख्यात सारंगी वादक और जाने माने शास्त्रीय गायक उस्ताद सुल्तान खान का लंबी बिमारी के बाद रविवार को दिल्ली में निधन हो गया.

उस्ताद सुल्तान खान ने ‘पिया बसंती रे’ और ‘अलबेला साजन आयो रे’ जैसे लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज़ दी थी.

पद्म भूषण सम्मानित 71 वर्षीय उस्ताद खान का जन्म जोधपुर में संगीत से जुड़े एक परिवार में हुआ था.

सारंगी वादन की परंपरा को जीवित बचाएं रखने में उस्ताद सुल्तान खान का अहम योगदान है.

संगीत से लगाव

उस्ताद सुल्तान खान ने 11 साल की उम्र से ही मंच पर गाना और सारंगी वादन शुरू कर दिया था. बाद में वो सितार सम्राट पंडित रवि शंकर को साथ जुड़े और विदेशों में कार्यक्रम किए.

सारंगी वादकों के परिवार में जन्में उस्ताद खान को शुरूआती दिनों में इंदौर घराने के शास्त्रीय गायक उस्ताद गुलाब खान ने प्रशिक्षण दिया था.

अपने आप को एक बेहतरीन सारंगी वादक साबित करने के साथ ही उस्ताद खान ने हिन्दी फ़िल्म जगत के जाने-माने संगीतकारों लता मंगेशकर, खय्याम के साथ काम किया.

इसके अलावा उस्ताद सुल्तान खान ने पश्चिमी देशों के भी कई संगीतकारों के साथ जुगलबंदी की.

पद्म भूषण के अलावा उस्ताद सुल्तान खान ने कई अन्य पुरस्कार भी जीते.

इसमें दो संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार और कई विदेशी पुरस्कार भी शामिल है.

ज़ाकिर हुसैन और अमरीकी संगीतकार बिल लास्वेल के साथ उस्ताद सुल्तान खान भारतीय फ़्युज़न संगीत दल ‘तबला बीट साइंस’ में भी शामिल हुए.

उस्ताद खान के बेटे साबिर खान भी जाने-माने सारंगी वादक है.