प्रेमजी और अन्ना एफपी सूची में

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Image caption प्रेमजी ने कुछ दिनों पहले सरकार के कामकाज की भी आलोचना की थी.

अमरीका की जानी मानी पत्रिका फॉरेन पॉलिसी ने दुनिया के शीर्ष 100 चिंतकों में भारत के अजीम प्रेमजी और अन्ना हज़ारे समेत पांच लोगों के नाम शामिल किए हैं.

प्रेमजी और अन्ना हज़ारे के अलावा फॉरेन पॉलिसी की इस सूची में भारत से लेखिका अरुंधति रॉय, अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी, शोधकर्ता दीपा नारायण और अरविंद सुब्रहमण्यम के नाम शामिल हैं.

फॉरेन पॉलिसी पत्रिका अपने विश्लेषण और विदेश नीति के मामलों में लेखों के लिए चर्चित रही है. पत्रिका हर वर्ष दुनिया के 100 शीर्ष चिंतकों की सूची जारी करती है.

पत्रिका के 2010 की सूची में नौ भारतीय थे.

इस वर्ष यानी 2011 की सूची में शामिल अजीम प्रेमजी को पत्रिका ने भारत का बिल गेट्स करार दिया है और प्रेमजी इस सूची में 14वें नंबर पर हैं.

Image caption अन्ना के अनशन से सरकार की नींद उड़ गई थी

सूचना प्रौद्योगिकी फर्म विप्रो के चेयरमैन प्रेमजी भारत के तीसरे सबसे धनी व्यक्ति हैं और फोर्ब्स के अनुसार उनकी मिल्कियत क़रीब 13 अरब डॉलर की है.

कुछ ही समय पहले प्रेमजी ने एक ग्रामीण शिक्षा परियोजना को दो अरब डॉलर की सहायता उपलब्ध कराई थी.

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन चलाने वाले अन्ना हज़ारे के बारे में पत्रिका का कहना है कि यह व्यक्ति दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र से ज़िम्मेदारी तय करने वाले सवाल पूछ रहा है.

हज़ारे इस सूची में 37वें नंबर पर हैं. कुछ ही समय पहले अन्ना ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उपवास कर के भारत सरकार की नींद हराम कर दी थी.

पत्रिका लिखता है, ‘‘ हज़ारे के अभियान की सादगी और एकनिष्ठता के कारण लाखों की संख्या में लोग भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर थे.’’

अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में पढ़ाते हैं और वो इस सूची में 60वें नंबर पर हैं. उन्होंने एस्थर डेलो के साथ मिलकर दुनिया के गरीबों पर एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है- poor economics.

गरीबी के विषय पर शोध कर रही दीपा नारायण को 79वां स्थान दिया गया है और दीपा के बारे में कहा गया है वो ‘गरीबों को प्रभावितों के अलावा कुछ और’ के तौर पर देख पाती हैं.

अरुंधति रॉय को देश के बेआवाज़ लोगों की आवाज़ बनने के कारण सूची में शामिल किया गया है जबकि वाशिंगटन के पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनोमिक्स में कार्यरत अरविंद सुब्रहमण्यम को अपने लेखों द्वारा चीन की आर्थिक प्रगति के बारे में पहले ही सूचित करने के कारण इस सूची में शामिल किया गया है.

सुब्रहमण्यम ने अपनी नई पुस्तक में चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव की जानकारी दी है जिसका नाम है- Eclipse- living in the shadow of china’s economic dominance

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