प्रधानमंत्री ने एफ़डीआई का फिर बचाव किया

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Image caption प्रधानमंत्री ने दावा किया कि इससे आधुनिक प्रौद्योगिकी भारत में आएगी

प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने खुदरा बाज़ार में विदेशी निवेश की इजाज़त देने के फ़ैसले का बचाव करते हुए दोहराया है कि इससे एक ओर जहाँ आम आदमी को कम दाम पर चीज़ें मुहैया होंगी तो वहीं रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भ्रष्टाचार को फिर सामाजिक महामारी बताते हुए कहा है कि सरकार अब लोकपाल सहित कई विधेयकों पर काम कर रही है जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक कारगर हथियार होगा.

दोनों नेता युवा कांग्रेस के सदस्यों को नई दिल्ली में संबोधित कर रहे थे. विपक्ष ने खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश की इजाज़त देने के फ़ैसले का विरोध करते हुए पिछले कई दिनों से संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी है.

इस मुद्दे पर केंद्र सरकार न सिर्फ़ विपक्षी दलों की ओर से बल्कि अपने ही सहयोगी दलों के विरोध का भी सामना कर रही है.

ऐसे में प्रधानमंत्री डॉक्टर सिंह ने विश्वास दिलाया कि ये जल्दबाज़ी में किया गया फ़ैसला नहीं है.

उन्होंने कहा, "हमने ये फ़ैसला किसी जल्दबाज़ी में नहीं बल्कि बहुत सोच-विचारकर लिया है. हमारा मानना है कि रीटेल के क्षेत्र में एफ़डीआई बढ़ने से आधुनिक प्रौद्योगिकी भारत में आएगी."

'बेहतर दाम'

प्रधानमंत्री का कहना था, "कृषि उत्पादों की बर्बादी कम होगी और हमारे किसान भाई-बहनों को उनके फ़सल के बेहतर दाम मिलेंगे."

डॉक्टर सिंह ने इस मौक़े पर आम आदमी के फ़ायदे का ज़िक्र करते हुए कहा, "थोक भाव और खुदरा मूल्य में जो अंतर होता है वो इस तरह से कम होगा और आम आदमी को कम दामों पर रोज़मर्रा की चीज़ें मिलेंगी."

इस फ़ैसले का विरोध करने वालों का कहना है कि इससे देश के छोटे व्यापारियों को नुक़सान हो सकता है.

मगर इस आशंका को ख़ारिज करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "जहाँ तक छोटे व्यापारियों का सवाल है कई दूसरे देशों का अनुभव ये रहा है कि छोटे और बड़े व्यापारी दोनों साथ-साथ हमारे जैसे बड़े देश में काम कर सकते हैं."

उन्होंने भरोसा दिलाने की कोशिश की कि सरकार ने छोटे व्यापारियों का भी ध्यान रखा है. डॉक्टर सिंह का कहना था, "हमने अपने फ़ैसले में कुछ शर्तें भी डाली हैं जिससे रीटेल के क्षेत्र में विदेशी निवेश के आने से छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिल पाए."

'रोकने के उपाय'

उनका कहना था कि इस बारे में किसी के साथ ज़बरदस्ती नहीं की जा रही है क्योंकि जिन राज्य सरकारों को इसमें फ़ायदा नहीं लगता उनके पास रीटेल में एफ़डीआई रोकने के उपाय हैं.

प्रधानमंत्री ने रोज़गार के संभावित अवसरों को भी रेखांकित किया और कहा, "हमारा मानना है कि इस फ़ैसले से फ़ूड प्रोसेसिंग, ट्रांसपोर्टेशन और स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे."

प्रधानमंत्री ने युवा कांग्रेस के सदस्यों से अपील की कि वे सरकार का ये नज़रिया आम लोगों तक पहुँचाने में मदद करें.

उन्होंने महँगाई की भी चर्चा की और कहा कि भारत सरकार इस समस्या से निबटने के लिए प्रतिबद्ध है. मगर प्रधानमंत्री ने साथ ही कहा कि भारत जिस तेज़ी से विकास कर रहा है उसकी वजह से माँग और आपूर्ति में अंतर पैदा हो रहा है.

डॉक्टर सिंह का कहना था कि जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में आवश्यक चीज़ों की क़ीमतें बढ़ती हैं वैसे-वैसे किसानों को दिए जाने वाले ख़रीद और समर्थन मूल्यों में बढ़ोत्तरी करनी पड़ती है जिससे वे कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हों और उससे महँगाई की संभावना भी बढ़ जाती है.

भ्रष्टाचार

उनके बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने सरकार की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए भ्रष्टाचार से निबटने की सरकारी कोशिशों का भी ज़िक्र किया.

सोनिया गाँधी का कहना था, "भ्रष्टाचार बड़ी सामाजिक समस्या है जो हर स्तर पर मौजूद है और हम उसे उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हमारे कामों ने ये दिखाया भी है."

उनके अनुसार, "सूचना के अधिकार के ज़रिए लोगों को भ्रष्टाचार का सामना करने के लिए एक प्रभावी हथियार दिया गया है और लोकपाल विधेयक के अलावा सरकार कई विधेयकों पर काम कर ही है जिससे भ्रष्टाचार का सामना किया जा सकेगा."

उन्होंने प्रशासनिक, न्यायिक और चुनावी सुधारों की भी ज़रूरत पर बल दिया.

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