'सभी को मिले सस्ता अनाज'

रोजी-रोटी अधिकार अभियान
Image caption रोजी-रोटी अधिकार अभियान ने सभी को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा बिल के दायरे में लाने की मांग की है.

देश के विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि जन वितरण प्रणाली के ज़रिए बाँटे जाने वाले अनाज पर सभी का अधिकार होना चाहिए.

दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा विधेयक के मसौदे में खाद्य सुरक्षा को जन वितरण प्रणाली के ज़रिए केवल अनाज बांटने तक ही सीमित रखना एक संकीर्ण सोच है.

इस जनमंच में सबसे अधिक आपत्ति इस विधेयक के सिर्फ़ ‘ग़रीबी रेखा से नीचे’ के लोगों को लक्ष्य बनाने पर व्यक्त की गई.

राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा विधेयक के मसौदा पर चर्चा करने के लिए यह कार्यक्रम 'रोज़ी-रोटी अधिकार अभियान'की ओर से आयोजित किया गया था.

इस कार्यक्रम में बिनायक सेन, अरुणा रॉय और ज्यां द्रेज़ जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने हिस्सा लिया.

भाजपा के प्रकाश जावेड़कर से लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा और कांग्रेस सांसद केशव राव तक ने दिल्ली के जंतर मंतर में इकट्ठे लोगों को संबोधित किया.

सबको मिले सस्ता अनाज

बिनायक सेन ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा कि जब देश की आधी आबादी में अकाल जैसे हालात हों तो ये चुनना कि कौन अधिक ग़रीब है और कौन कम, सही नहीं होगा.

उन्होंने कहा, “अकाल जैसे हालात में ये सही नहीं है कि विश्व बैंक के इशारे पर केंद्र सरकार कहे कि हम इतने ही लोगों को हम ग़रीब मानेंगे. हमारा कहना है कि सारे लोगों को सस्ता अनाज मिलना उनका हक़ है.”

बिनायक सेन ने कहा कि अगर अमीर लोगों को अलग रखने का तरीका बन सके तो ठीक है लेकिन बाक़ी सभी को सस्ता अनाज मिलना चाहिए.

कांग्रेस ने सांसद केशव राव ने कहा कि अगर किसी को लग रहा है कि कुछ ग़रीब लोग इस बिल के मसौदा में छूट गए हैं तो उन्हें भी सरकार शामिल करने के लिए तैयार है.

सभी को जन वितरण प्रणाली में लाने के सिंद्धात पर आपत्ति जताते हुए केशव राव ने कहा, “हमने कहा है कि जो ग़रीबी रेखा से नीचे है उसे सस्ता अनाज मिलेगा. अगर आप चाहते हैं कि कुछ और लोग ग़रीब हैं तो हम उन्हें भी शामिल करेंगे. लेकिन आप क्या चाहते हैं कि रिलांयस को भी दे दें, टाटा को भी दे दें? पहले ग़रीबों को दीजिए, बाद में आगे सोचेंगे.”

‘तमिलनाडु-छत्तीसगढ़ जैसी हो व्यवस्था’

अरुणा रॉय ने बीबीसी को बताया कि इस देश ग़रीबों चिन्हित करने के मापदंडों में हमेशा से ही ख़ामी रही है.

Image caption अकाल जैसे हालात में कम ग़रीब और अधिक ग़रीब का चयन नहीं किया जा सकता

सभी को खाद्य सुरक्षा बिल के दायरे में रखने की पुरज़ोर सिफ़ारिश करते हुए उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं सभी को इस बिल के दायरे में रखा जाए. इस देश कभी भी ग़रीबों को सही ढंग से चिन्हित नहीं किया गया है इसलिए वंचित लोग हमेशा वंचित ही रहे हैं. ये हमारी बुनियादी मांग है. ”

उन्होंने कहा कि सस्ता अनाज लेने वही जाएंगे जिन्हें वाक़ई इसकी ज़रुरत है क्योंकि जिनके पास पैसा है वो वैसा अनाज नहीं खाते हैं, जैसा राशन की दुकानों पर मिलने वाला है.

अरुणा रॉय ने कहा कि तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ में कोई भी व्यक्ति सरकार से सस्ता अनाज ले सकता है और ऐसी ही व्यवस्था सारे देश में होनी चाहिए.

'कौन है ग़रीब?'

Image caption कांग्रेस सांसद केशव राव ने सवाल उठाया कि जो सक्षम लोग हैं उन्हें अनाज नहीं दिया जा सकता

भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावेड़कर भी 'रोज़ी-रोटी अधिकार अभियान' के इस कार्यक्रम आए.

उन्होंने बीबीसी से कहा कि सभी ग़रीबों को इस बिल दायरे में लाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बिल संसद में पेश होने के बाद स्थाई समिति के पास जाएगा तब उनकी पार्टी विस्तार से उसपर अपना मत रखेगी.

भाजपा प्रवक्ता ने योजना आयोग द्वारा तय किया गया ग़रीबी का मापदंड ग़रीबों का अपमान है. उन्होंने ग़रीबी का मानक क्या हो इसपर तो अधिक नहीं कहा लेकिन ये ज़रुर की सभी ग़रीबों को खाद्य सुरक्षा बिल के दायरे में लाया जाना चाहिए.

उधर सीपीएम सांसद और पोलितब्यूरो सदस्य बृंदा कारत ने कहा कि वर्तमान स्वरूप में खाद्य सुरक्षा बिल को खाद्य असुरक्षा बिल कहना चाहिए. उन्होंने दुख जताया कि ग़रीबों को सरकारी योजनाओं में उनका हिस्सा नहीं मिल पा रहा है.

संबंधित समाचार