लड़कियों की सुरक्षा या मॉरल पुलिसिंग ?

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Image caption ज़माना बदल रहा है और नई पीढ़ी की अपनी जीवन शैली है

राजधानी दिल्ली से सटे गाज़ियाबाद के पार्कों और मॉल में खुलेआम प्यार का इज़हार करने वाले प्रेमी जोड़ों पर तब आफ़त आ गई जब उत्तर प्रदेश पुलिस की एक महिला थानाध्यक्ष ने पार्कों में छापा मारकर प्रेमियों को झाड़ियों के पीछे से पकड़ा और टीवी कैमरों के सामने उठक-बैठक करवाया.

कैमरों में रिकार्ड की गई तस्वीरों को मंगलवार को टीवी चैनलों पर दिखाया गया.

पकड़े गए प्रेमियों में से कुछ मुंह छिपा रहे थे तो कोई महिला दरोगा से मिन्नतें कर रहा था कि उन्हे जाने दिया जाए.

लेकिन महिला थानाध्यक्ष अलका पांडे प्रेमी जोड़ों के खिलाफ़ अपने ही तरीके से कार्रवाई करती रही.

'सबक'

महिला थानाध्यक्ष की कहना था कि वह ऐसा कर रही है ताकि लड़कियों के साथ छेड़खानी की फ़िराक में बैठे लड़कों को सबक सिखाया जा सके.

उन्होने इसे ईव टीज़ींग के खिलाफ़ एक 'ड्राईव' बताया, जिसका नाम रखा गया है 'ऑपरेशन मजनू'.

इस प्रकार के 'ड्राईव' पहले भी उत्तर प्रदेश में चलाए जा चुके है लेकिन इन सभी का कड़ा विरोध किया गया था.

इस बार भी कार्रवाई का तेज़ विरोध होते देख गाज़ियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने माना कि प्रेमियों से उठक-बैठक करवाना सही नही था और महिला थानाध्यक्ष अलका पांडे को बुधवार को निलंबित कर दिया गया.

बीबीसी संवाददाता अमरेश द्विवेदी से बातचीत के दौरान गाज़ियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रघुबीर लाल ने कहा, ''पार्कों और मॉल में बैठे लड़के-लड़कियों को शारीरिक दंड देना या अपमानित किया जाना उचित नही है, ग़ैरकानूनी है. लेकिन छेड़खानी करने और अश्लीलता फ़ैलाने वालों के खिलाफ़ कार्रवाई की जानी चाहिए.''

गाज़ियाबाद में की गई इस कार्रवाई से ये सवाल अहम हो गया है कि क्या पुलिस 'मॉरल पुलिसिंग' की हिमायती है?

प्यार के तौर-तरीकें

यह हम सदियों से सुनते आ रहे है कि प्यार करनेवालों के खिलाफ़ समाज उलझने पैदा करता है.

हालाँकि समय के साथ प्यार करने का तरीका भी बदला है. जगह की कमी और महंगे होटलों में रोज़-रोज़ मिल पाने में असमर्थ प्रेमी जोड़े रूख करते है सार्वजनिक स्थलों का.

बीबीसी ने 'मॉरल पुलिसिंग' पर कुछ अन्य शहरों का हाल जानने की कोशिश की.

चौक जाते है सैलानी

मुंबई में मौजूद बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने बताया कि प्यार करने वालों की कमी नहीं लेकिन प्यार करने के लिए एकांत माहौल और जगह की कमी ज़रूर है.

इसी लिए यहाँ प्यार करने वाले खुले आसमान के तले खुल कर इसका इज़हार करते हैं. अगर आप सूरज ढलने के बाद बांद्र इलाके का दौरा करें तो आपको सैकड़ों लड़के और लडकियां एक साथ चिपके नज़र आयेंगे.

लेकिन उन्हें वहाँ से कोई हटाता नहीं. कोई तंग नहीं करता. पुलिस भी उन्हें पूरी आज़ादी देती है कि वो वहाँ अपना समय व्यतीत करे.

बीबीसी संवाददाता ने बताया कि मुंबई के सरेआम प्यार के इज़हार करते इन युवाओं को देखकर सैलानी चौंक जाते है.

'आंकड़े पूरे करने की कार्रवाई'

लखनऊ से बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी के मुताबिक़ पुलिस की रोज़ाना की क्राइम बुलेटिन में अक्सर इस तरह की खबर होती है कि अमुक पुरुष अमुक स्त्री के साथ सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करते हुए पकड़े गए और उनका चालान हो गया.

संवाददाता के अनुसार कई बार ऊपर के अधिकारियों के आदेश से इस तरह का अभियान भी चलाया जाता है. ऐसा भी हुआ है कि पुलिसवाले अभियान में आंकड़े पूरे करने के लिए पति-पत्नी या भाई-बहन को थाने पकड़ लाए और फिर मिन्नत करने पर छोड़ा.

लखनऊ में रेज़ीडेंसी का मैदान, गोमती नदी के किनारे के पार्क और लोहिया पार्क कुछ खास जगह है जहाँ पर प्रेमी-प्रेमिकाएं सुकुन के कुछ पल तलाशने जाते है.

इन पार्कों में सैर के लिए जाने वाले बुजर्ग कई बार अपने को असहज पाते हैं.

जिन परिवारों में अरेंज्ड मैरेज का चलन है उनके माँ बाप भी नही चाहते कि उनके बच्चे इस तरह जाएँ. मगर ज़माना बदल रहा है और नई पीढ़ी की अपनी जीवन शैली है.

बिहार का हाल

बिहार से बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर बताते हैं कि वहां पार्कों या पर्यटन स्थलों पर हालांकि पुलिस का कोई सख़्त पहरा नहीं होता है, लेकिन अगर वहाँ ड्यूटी पर तैनात किसी पुलिसवाले की नज़र किसी प्रेमी युगल पर पड़ गई, तो बात बिगड़ भी जाती है.

एकांत में लड़के-लड़कियों को बिलकुल पास-पास बैठे या बतियाते देख वहाँ तैनात पुलिस वाले झट से यही सोच लेते हैं कि मामला गड़बड़ है.

ऐसे में उनका रवैया वही 'लट्ठमार' अंदाज़ वाला होता है. हाल ही पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान में कुछ ऐसे जोड़े पकडे गये जिनपर आरोप था कि वे वहाँ का माहौल ख़राब कर रहे थे.

जबकि बाद में पता चला कि वे जोड़े ना तो आपत्ति-जनक स्थिति में थे, और ना ही कोई अश्लील हरकत कर रहे थे.

पकडे गये युवक- युवतियों ने आरोप लगाया कि पुलिस वाले उनसे कुछ वसूली करना चाहते थे, लेकिन इसके विपरीत भी यहाँ कई पार्कों में कुछ प्रेमी युगल के ख़िलाफ़ लोगों ने पुलिस को जो शिकायतें कीं, वो सही पायी गयीं..

हुआ ये था कि शोहदे वहाँ लड़कियों को बहला फुसला कर ले गये थे और लोगों ने वहाँ कुछ भद्दे दृश्य भी देखे थे. तो दोनों तरह की बातें हैं.

पुलिस की यहाँ धारणा बन गई है कि पार्कों में चोरी- छिपे मिलने वाले युगल प्रेमियों और कुछ पार्लर या साइबर केफे में चल रहे देह- व्यापार से जुड़े युवाओं के बीच बहुत फ़र्क नहीं होता.

यहाँ सचिवालय के पास बने नए पार्क में हाल ही पुलिस ने कुछ ऐसे लड़के लड़कियों को भी पकड़ लिया, जो युवा- सुलभ मैत्री के तहत वहाँ शान्ति से बात- चीत करने पहुंचे थे.

ज़ाहिर है कि ऐसे मामलों में यहाँ समाज और क़ानून, दोनों के इतर भी अनावश्यक पुलिस कार्रवाई होती रहती है.