पानी से जलते प्रदेश

  • 3 दिसंबर 2011
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Image caption पानी को भारत में अंतर्राज्यीय झगड़ों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है

केरल तमिलनाडु के बीच का मुल्लापेरियार से लेकर आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के बीच का पोलावरम बाँध विवाद. कहाँ क्या क्यों फंसा है.

मुल्ला पेरियार बाँध विवाद: पेरियार नदी पर बना यह बाँध केरल में बना है. साल 1895 में अंग्रेजो का बनाया यह बाँध तत्कालीन मद्रास प्रेसिडेंसी को 999 साल के पट्टे पर चलाने के लिए दे दिया गया. मद्रास प्रेसिडेंसी का एक बहुत बड़ा भाग आज के तमिलनाडु में है. केरल का कहना है कि यह बाँध पुराना हो गया है और टूट सकता है. तमिलनाडु कहता है कि बाँध एक दम सही है. केरल कहता है कि हम तमिलनाडु को नया बाँध बना कर बराबर पानी देंगे. तमिलनाडु का मानना है कि केरल ने नए बाँध को जिस तरह से बनाने का प्रस्ताव दिया है वो तमिलनाडु को पानी से महरूम कर देगा. तमिलनाडु के अनुसार बाँध की सुरक्षा कि बात तो बहानेबाज़ी है.

पंजाब- हरियाणा रावी और ब्यास नदी जल विवाद:यह दोनों राज्य रावी और ब्यास नदियों के अतरिक्त पानी के बंटवारे को लेकर लड़ रहे हैं. मुकदमे सालों से अदालतों में हैं और कई सालों रहेगें.

सतलुज यमुना लिंक कैनाल विवाद: इस 214 किलोमीटर लम्बी नहर के ज़रिये सतलुज और यमुना नदियों को जोड़ना प्रस्तावित है. यह नहर इतनी बड़ी और गहरी बनाई जानी है कि इसके ज़रिये सामान लाया ले जाया जा सके. अगर कभी यह पूरी हुई तो इसकी वजह से पूर्वी भारत से पश्चिमी भारत तक सामान पानी की रास्ते इधर उधर किया जा सकेगा. हरियाणा अपने हिस्से को बना चुका है. पंजाब सरकार ने पहले समझौता किया बाद में पंजाब को यह समझौता नुकसानदेह लगा और उसने बाकायदा विधान सभा में प्रस्ताव पारित कर के इस समझौते को रद्द कर दिया. यह मामला अभी अदालत में फंसा है.

उड़ीसा - आन्ध्रप्रदेश वंस्धारा नदी विवाद: यहाँ भी दोनों राज्य पानी के बंटवारे के लिए लड़ रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के केंद्र सरकार ने इसके लिए एक नदी जल प्राधिकरण बना दिया है.

महाराष्ट्र कर्नाटक गोवा के बीच का महादयी नदी विवाद: इस मामले में कर्नाटक पीने का पानी के लिए एक बाँध बना रहा है. गोवा जो की इस नदी के निचले हिस्से में स्थित है इस बात से बड़ा परेशान है और मुकदमे बाज़ी के चलते एक प्राधिकरण बना दिया गया है.

महाराष्ट्र-कर्नाटक और आन्ध्र प्रदेश के बीच कृष्णा नदी के पानी को लेकर झगड़ा: यहाँ भी पानी पर हिस्सेदारी को लेकर झगड़ा है. केंद्र सरकार ने इसके लिए एक कृष्णा नदी जल विवाद प्राधिकरण बना दिया है.

कर्नाटक तमिलनाडु कावेरी नदी विवाद: इस झगडे के मूल में दो समझौते हैं एक 1892 में किया गया एक 1924 में. ये दोनों समझौते मद्रास प्रेसिडेंसी और तत्कालीन मैसूर राज्य के बीच किये गए थे.

मैसूर बाद में कर्नाटक में मिल गया. कर्नाटक को लगता है कि यह समझौते मद्रास प्रेसिडेंसी के पक्ष में झुके हुए हैं क्योंकि अंग्रेजों के ज़माने के मद्रास प्रेसिडेंसी अँगरेज़ चलते थे. तमिलनाडू कहता है कि इन समझौतों के चलते उसने अपने यहाँ खूब सारी ज़मीन खेती की विकसित कर ली है जिसका काम इस पानी के बिना चल नहीं सकता.

केंद्र सरकार के बनाये हुए एक प्राधिकरण ने अपना फ़ैसला दिया. कर्नाटक, तमिलनाडु और पॉंडिचेरी के अलवा पर्यावरण के लिए कितना जल बचाना है प्राधिकरण ने तय किया. लेकिन किसी भी राज्य ने इस फैसले को नहीं माना और मामला अदालत में चला गया.

आंध्र प्रदेश उड़ीसा छत्तीसगढ़ के बीच पोलावरम बाँध परियोजना विवाद: आंध्र प्रदेश अपने यहाँ एक विशाल बाँध बनाना चाहता है. इस परियोजना से उसके अनुसार 900 मेगा वॉट से ज़्यादा बिजली पैदा होगी और तीन लाख हेक्टेयर ज़मीन को सींचा जा सकेगा.

छत्तीसगढ़ और उड़ीसा दोनों राज्यों को यह दिक्कत है कि उन्हें लगता है कि इस बाँध से उनके यहाँ भी गावँ डूब में आयेगें. आन्ध्र प्रदेश ने प्रस्ताव में कुछ रद्दो बदल किया है लेकिन दोनों राज्यों को यह मंज़ूर नहीं है. केंद्र सरकार द्वारा बीच बचाव की तमाम कोशिशों के बावजूद मामला सुप्रीम कोर्ट में जा चुका है और मुकदमे बाज़ी जारी है.

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