भोपाल: गैस पीड़ितों पर लाठीचार्ज, हवाई फ़ायरिंग

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Image caption गैस पीड़ित 1989 में मुआवज़े को लेकर हुये समझौते को अपर्याप्त मानते है

भोपाल गैस त्रासदी की सत्ताइसवीं बरसी के मौक़े पर पीडि़तों और स्वंयसेवी संस्थाओं द्वारा आयोजित रेल रोको आंदोलन हिंसक हो गया जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को क़ाबू करने के लिए हवाई फ़ायरिंग की.

शहर के कई इलाक़ों में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है, यानि, लोगों के जमा होने पर पाबंदी है. पुलिस की तैनाती भी सख़्त कर दी गई है.

पुलिस ने मुआवज़े समेत अन्य मांगों के समर्थन में रेलगाड़ियों को रोकने की कोशिश कर रहे गैस पीड़ितों पर पहले लाठीचार्ज किया, और आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे.

कहा जा रहा है कि पुलिस कार्रवाई में कई लोग घायल हो गये हैं. हालांकि अभी तक किसी के गंभीर रूप से घायल होने की ख़बर नहीं आई है.

गुस्साई भीड़ ने वाहनों में तोड़फोड़ की और उनमें से कई को आग लगा दी.

प्रशासन

प्रशासन का कहना है कि पुलिस की बार-बार चेतावनी के बाद भी आंदोलनकारी रेल की पटरियों से हटने को तैयार नहीं थे जिससे यातायात प्रभावित हो रहा था.

शनिवार को आयोजित रेल रोको आंदोलन का असर यातायात पर भी पड़ा है और कई रेलगाडियों का सफ़र प्रभावित हुआ है.

दिल्ली रुट की लगभग 15 ट्रेनों को सुबह से अलग अलग जगह रोक कर रखा गया. इसके साथ ही भोपाल से जाने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है.

अधिकारियों ने कहा कि लोगों के वहां से बार-बार हटाया जा रहा था लेकिन वो वापस फिर रेल लाइनों पर बैठ जा रहे थे. पुलिस के आंदोलनकारियों को हटाने और उनके वहां वापस पहुंचने के बीच कुछ लोग हिंसक हो उठे और पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा.

साल 1984 में विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी की बरसी के मौक़ पर भोपाल में पिछले सत्ताइस सालों से विभिन्न प्रकार के विरोध प्रदर्शनों का आयोजन होता रहा है लेकिन हिंसा की इस तरह की घटना पहली दफ़ा हुई है.

आश्वासन

गैस पीड़ितों की संगठनों से मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनकी मागों को एक हफ्ते के अंदर प्रधानमंत्री के पास ले जाने का आश्वासन दिया है.

मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद संगठनों ने आंदोलन वापस ले लिया है.

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Image caption मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आश्वासन के बाद गैस पीड़ित संगठनों ने रेल रोको आंदोलन वापस ले लिया

भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों के मुआवज़े और राहत के लिए संघर्ष कर रहे पाँच संगठनों ने संयुक्त रुप से रेल रोको आंदोलन की घोषणा दो हफ़्ते पहले की थी और कहा था कि भोपाल से गुज़रने वाली सभी ट्रेनों को रोका जाएगा.

गैस पीड़ित 1989 में मुआवज़े को लेकर हुये समझौते को अपर्याप्त मानते हैं.

भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों की एक संस्था की संयोजक साधना कार्णिक ने कहा, ''लोगों का गुस्सा है आज सामने आया है."

उन्होंने कहा कि लोग केंद्र और राज्य सरकार के झूठे वादों से परेशान हो चुके हैं और ये लोगों का आंदोलन है.

वहीं भोपाल कलेक्टर निकुंज श्रीवास्तव ने इस घटना के लिये आंदोलनकारियों और नेताओं को ज़िम्मेदार ठहराया है.

गैस पीड़ित संगठनों का कहना है कि वे सरकार से इस मामलें में लंबे समय से बातचीत का प्रयास कर रहे थे, लेकिन सरकार ने कोई जवाब नही दिया. ऐसे में उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना.

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