'आदिवासी महिला के साथ हिरासत में प्रताड़ना'

  • 3 दिसंबर 2011
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Image caption छत्तीसगढ़ सदन के बाहर महिला संगठनों के प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने उन्हें जबरन वहाँ से हटाया

माओवादियों के साथ संबंध होने के आरोप में छत्तीसगढ़ की जगदलपुर जेल में बंद आदिवासी महिला सोनी सोरी के वकील के मुताबिक सोरी की मेडिकल जांच से पुलिस द्वारा हिरासत में प्रताड़ना के सबूत मिलते हैं.

सोरी के वकील, कोलिन गोन्ज़ाल्विस ने बीबीसी को बताया, "जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा है कि सोरी के गुप्तांगो में पत्थर पाए गए हैं और उन्हें गहरी चोटें लगी हैं, ये सीधे तौर पर दर्शाता है कि उनके साथ हिरासत में प्रताड़ना की गई है".

अब सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से जवाब तलब किया है और फ़िलहाल सोरी को जगदलपुर जेल से निकालकर रायपुर सेन्ट्रल जेल में रखे जाने का आदेश दिया है.

सोनी सोरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर छत्तीसगढ़ पुलिस पर हिरासत में प्रताड़ना के आरोप लगाए थे जिसके बाद कोर्ट ने कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज में उनकी मेडिकल जांच के आदेश दिए थे.

कोलिन ने कहा कि सोरी ने एक पुलिसकर्मी का नाम भी अदालत को बताया है और उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. साथ ही छत्तीसगढ़ में जान का ख़तरा होने का दावा करते हुए राज्य के बाहर की किसी जेल में रखे जाने की दरख्वास्त की है.

माओवादी होने का आरोप

प्राइमरी स्कूल में अद्यापिका, सोनी सोरी को पांच अक्तूबर को क्राइम ब्रांच और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त अभियान में दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया था. उनपर माओवादियों के साथ संबंध होने के आरोप है. सोरी इन आरोपों से इनकार करती हैं.

लेकिन हिरासत में लिए जाने के एक हफ्ते के अंदर ही सोरी का एक वीडियो सामने आया जिसमें उन्हें दर्द से चीखते हुए देखा जा सकता था. इसके बाद सोरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जिसमें छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा हिरासत में प्रताड़ना के आरोप लगाए गए थे.

कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट और वीडियो सामने आने के बाद क़रीब 35 महिला संगठनों ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को चिट्ठी लिखकर आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है.

छत्तीसगढ़ सदन के बाहर प्रदर्शन कर उन्होंने सरकार से मांग की है कि वो सोढी को छत्तीसगढ़ के बाहर की जेल में रखे जाने का विरोध ना करें.

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