बाँध पर केरल मंत्रियों की भूख हड़ताल

Image caption बांध के जलस्तर पर तमिलनाडु और केरल में विवाद है

मुल्लापेरियार बांध को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन (एनएचआरसी) की होने वाली बैठक को मार्च तक टाल दिया गया, उधर केरल के दो मंत्री सोमवार को सत्याग्रह कर रहे हैं.

एनएचआरसी के एक अधिकारी के मुताबिक इस फ़ैसले की वजह है उच्चतम न्यायालय का एक उच्च-अधिकार प्राप्त समिति की नियुक्ति करना.

इस समिति को अपनी रिपोर्ट 29 फ़रवरी को पेश करनी है.

उधर केरल के जल-संसाधन मंत्री टी जोज़ेफ़ दिल्ली में और वित्त मंत्री केएम मणि केरल के ज़िले इडुक्की में एक-दिवसीय सत्याग्रह पर हैं.

ग़ौरतलब है कि केरल का कहना है कि मुल्लापेरियार बाँध खतरनाक है और इसकी जगह नया बांध बनना चाहिए, उधर तमिलनाडु किसी भी खतरे को खारिज करता है.

जहाँ तमिलनाडु की मांग है कि बाँध की उँचाई को 132 फ़ीट से बढ़ाकर 142 फ़ीट किया जाए, केरल सरकार चाहती है कि इसकी उँचाई को घटाया जाए क्योंकि ये बाँध सालों पुराना है और खतरनाक है.

एमडीएमके नेता वाइको ने सोमवार की सुबह प्रधानमंत्री से मुलाक़ात कर तमिलनाड़ु के पक्ष को एक बार फिर उनके सामने रखा.

पत्रकारों से बातचीत में वाइको ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया है कि मुल्लापेरियार बांध को केवल केरल के लोगों से ख़तरा है.

उन्होंने कहा कि केरल की सरकार लोगों में भय का माहौल पैदा कर रही है और वहां की पुलिस बांध को बचा पाने में असमर्थ है.

मुल्लापेरियार बांध को लेकर केरल में कुछ प्रदर्शन में हिंसा भी हुई है.

केरल के सांसदों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार संघठन से इस मामले में मदद देने की अपील की गई है.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बांध के फटने का डर है और इससे इडूकी के लोगों को खतरा होगा.

'बहानेबाज़ी'

पेरियार नदी पर बना यह बाँध केरल में बना है.

साल 1895 में अंग्रेजो का बनाया यह बाँध तत्कालीन मद्रास प्रेसिडेंसी को 999 साल के पट्टे पर चलाने के लिए दे दिया गया.

मद्रास प्रेसिडेंसी का एक बहुत बड़ा भाग आज के तमिलनाडु में है. केरल का कहना है कि यह बाँध पुराना हो गया है और टूट सकता है.

तमिलनाडु कहता है कि बाँध एक दम सही है. केरल कहता है कि हम तमिलनाडु को नया बाँध बना कर बराबर पानी देंगे.

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Image caption केरल की राज्य सरकार बांध के जलस्तर को कम करना चाहती है

तमिलनाडु का मानना है कि केरल ने नए बाँध को जिस तरह से बनाने का प्रस्ताव दिया है वो तमिलनाडु को पानी से महरूम कर देगा. तमिलनाडु के अनुसार बाँध की सुरक्षा कि बात तो बहानेबाज़ी है.

तमिलनाडू चाहता है कि मौजूदा बांध के जलस्तर को बढाया जाए जबकि केरल उसे कम करना चाहता है.

प्रधानमंत्री को चिट्ठी

इस बीच तमिलनाड़ु की मुख्यमंत्री जयललिता ने प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिख कर बांध की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ़ की एक दल की मांग की है.

जयललिता ने कहा कि उन्हें अपने पत्र का अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है और अपने पत्र में उन्होंने राज्य के रुख का वर्णन किया है.

उन्होंने कहा कि दोनो ही राज्यों की सीमा पर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है.

जयललिता ने पत्र में लिखा कि बांध की सुरक्षा के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उससे पुराने कई बांध अभी तक सुरक्षित हैं.

तमिलनाडु के पूर्व मुख्य मंत्री और राज्य में जयललिता के विरोधी एम. करुणानिधि ने भी मुल्लापेरियार बांध की वकालत की है.

मुल्लापेरियार बांध पर बनी कमिटी के अध्यक्ष न्यायमुर्ति ए एस आनंद को पत्र लिखकर उन्होने भी बांध की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी केरल पुलिस से लेकर केंद्रीय सुरक्षा बल को देने की बात कही है.

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2006 के फैसले का ब्योरा देते हुए बताया कि बांध में जल स्तर की उंचाई मौजूदा 136 फीट से बढाकर 142 फीट कर देनी चाहिए.

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