जीत के बाद भी कांग्रेस का संकट बरक़रार

किरण कुमार रेड्डी
Image caption किरण कुमार रेड्डी सरकार के समर्थन में 161 मत पड़े

आंध्र प्रदेश में किरण कुमार रेड्डी के नेतृत्त्व में कांग्रेस सरकार ने विधान सभा में भले ही विश्वास मत हासिल कर लिया हो मगर इसने उसके सामने अब कुछ नए संकट ला खड़े किए हैं.

विपक्षी तेलुगूदेसम के अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 122 और विरोध में 161 मत पड़े जिसके बाद वो प्रस्ताव गिर गया. मगर जिन विधायकों ने सरकार के ख़िलाफ़ मतदान किया उनमें ख़ुद कांग्रेस के 16 बाग़ी विधायक शामिल हैं.

ये वो विधायक हैं जो पहले से ही वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख और सांसद जगन मोहन रेड्डी के समर्थक हैं और उन्होंने जगन के कहने पर ही सरकार के विरुद्ध मतदान किया है.

यूँ तो ये संख्या जगन के दावों से काफ़ी कम है मगर 16 विधायकों का यूँ पार्टी के विरुद्ध खड़े हो जाना कांग्रेस नेतृत्त्व के लिए एक धक्का है.

हालात में आए इस मोड़ से दरअसल सबसे ज़्यादा ख़ुश जगन मोहन ही हैं. एक तो विधान सभा में कांग्रेस को बहुमत के लिए अब दूसरे दलों पर निर्भर होगा और दूसरी ओर अगर ये 16 विधायक अयोग्य घोषित हो जाते हैं तो कांग्रेसी विधायकों की संख्या घटकर 137 हो जाएगी.

मिनी चुनाव

अभी तक प्रजा राज्यम पार्टी के कांग्रेस में विलय की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. उसके बाद ही कांग्रेस फिर से डेढ़ सौ विधायकों का आँकड़ा छू पाएगी.

अब अगर इन 16 बाग़ी विधायकों की सदस्यता समाप्त होती है तो वहाँ पर उप चुनाव कराने होंगे. उसके अलावा सात सीटें पहले ही ख़ाली हैं क्योंकि उनमें से छह ने अलग तेलंगाना राज्य की माँग करते हुए त्याग पत्र दे दिया था जबकि एक की मृत्यु हो चुकी है.

इस तरह अब अगर कुल 23 सीटों पर विधान सभा चुनाव कराने हुए तो ये एक तरह से मिनी चुनाव ही हो जाएगा जिसमें कांग्रेस को अच्छा प्रदर्शन करना होगा.

इसके साथ ही मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को अपना नेतृत्त्व साबित करने के लिए इस चुनाव में जी-जान से लगना होगा.

कांग्रेस की मुश्किल ये ही कि उसकी हालत तेलंगाना में अलग राज्य की माँग की वजह से ख़राब है और आंध्र और रायलसीमा में जगन का प्रभाव है.

मुख्यमंत्री के सामने चुनौती

अगर कांग्रेस अपनी सीटें दोबारा नहीं जीता पाती है तो कांग्रेस के लिए 2014 की राह भी मुश्किल हो जाएगी.

यही वजह है कि जगन मोहन रेड्डी भी कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री को अब मतदाताओं के पास जाकर ये साबित करना चाहिए कि उन्हें जनता का समर्थन हासिल है.

उनका कहना है कि कांग्रेस उन विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई शुरू करे.

दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी सत्यनारायणा ने कहा है कि वह जल्द ही उन विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे.

ऐसा लग रहा है कि तेलुगूदेसम ने यह अविश्वास प्रस्ताव लाकर सीधे तौर पर तो अपना कोई फ़ायदा नहीं किया मगर कांग्रेस और जगन के संघर्ष की आग में घी ज़रूर डाल दिया है.

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