'न तो अस्पताल, न दमकल वाले थे तैयार'

  • 9 दिसंबर 2011
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Image caption एक मरीज़ के गुस्साए हुए रिश्तेदार ने कहा, ''इससे पहले भी कई इसी तरह की घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन फिर भी कोई एहतियात नहीं बरती गई.''

कोलकाता के निजी अस्पताल में लगी से आग में फंसे मरीज़ों के परिजन काफ़ी गुस्से में है. लोगों को ये भी शिकायत है कि मौक़े पर दमकल की गाड़ियां देरी से पहूंचीं.

मरीज़ों के रिश्तेदार गुस्साए हुए थे कि अस्पताल में आग से निपटने के लिए कोई तैयारी नहीं थी. उधर चश्मदीदों का कहना है कि दमकल की गाड़ियाँ मौके पर काफी देर से पहुँची.

कुछ ही घंटे पहले अपने चाचा को दिल का दौरा पड़ने पर इस अस्पताल में लाने वाले एक चश्मदीद प्रदीप सरकार ने कहा, ''लगभग दो बजे जब आग लगी तो हम घबरा गए. मैं अपने अंकल को दूसरे अस्पताल ले जाना चाहता था. लेकिन डॉक्टरों और अधिकारियों ने इससे इंकार कर दिया.''

उन्होंने कहा, ''पहले तो पाँच बजे तक यहां कोई दमकल की गाड़ी नहीं पहुँची और जब वो आए तो वह बिना तैयारी के थे. न तो उनके पास सीड़ी थी और न ही मास्क थे. स्थानीय लोगों ने ही यहां पर फंसे लोगों की मदद की.''

एक स्थानीय नागरिक बादल ने कहा कि जब दो बजे के करीब वह वहां पहुंचे तो आसपास धुआँ ही धुआँ था. बादल ने कहा, ''हमारी आँखों में से पानी बह रहा था. यहां पर कर्मचारी हमें अंदर जाने नहीं दे रहे थे. लेकिन फिर भी हिम्मत कर हम एक-एक कर शवों और घायलों को दूसरे अस्पताल पहुंचाते गए.''

'कोई एहतियात नहीं'

एक मरीज़ के गुस्साए हुए रिश्तेदार ने कहा कि यहां पर अस्पताल में किसी को कुछ नहीं पता.

एक और मरीज़ की महिला रिश्तेदार ने कहा, ''मुझे तो समझ नहीं आ रहा कि यहां क्या हो रहा है. मेरे रिश्तेदार विकलांग हैं और कोई बता ही नहीं रहा कि वे कहां हैं.''

बाहर लाए जाने पर एक मरीज़ ने कहा, ''मैं सो रहा था जब मुझे कर्मचारियों ने उठाया और सीड़ियों से घसीट कर नीचे ले आए. मैंने देखा कि कम से कम 10 से 15 लोग सीड़ियों से उपर खड़े मद्द की उम्मीद कर रहे थे.''

उधर राज्य के अग्निशमन मंत्री जावेद ख़ान ने कहा है कि अस्पताल ने आग लगने की ख़बर तुरंत सरकार को नहीं दी थी.

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