देश में हज़ारों बच्चे लापताः रिपोर्ट

  • 9 दिसंबर 2011
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Image caption इस रिपोर्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि लापता बच्चों के परिजनों को मामला दर्ज कराने के लिए बहुत भागदौड़ करनी पड़ती है.

बच्चों के अधिकारों पर काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर घंटे करीब 11 बच्चे लापता हो जाते हैं और इनमें से कम से कम चार तो कभी नहीं मिलते.

बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) नाम के इस संगठन की रिपोर्ट के अनुसार इनमें से अधिकतर बच्चे बंधुआ मजदूरी या फिर व्यवसायिक यौन शोषण के धंधे में लगा दिया जाते हैं.

जनवरी 2008 से जनवरी 2010 के बीच तैयार की गई इस रिपोर्ट ने देश के 640 में से 392 ज़िलों में काम किया है और इस मुद्दे पर ये पहली विस्तृत रिपोर्ट हैं.

बीबीए ने अपनी रिपोर्ट 'मिसिंग चिल्ड्रेन इन इंडिया' में कहा है कि इस दौरान 20 राज्यों के 392 जिलों और चार केंद्र शासित प्रदेशों से 1,17,480 बच्चे लापता हुए.

ये आंकड़ें आरटीआई दायर कर और कुछ सरकारी एजेंसियों से हासिल किए गए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार हर साल देश भर में लापता होने वाले बच्चों की संख्या 96,000 तक हो सकती है.

हालांकि ये संख्या भी कम अनुमान होगा क्योंकि बहुत सारे मामले सामने ही नहीं आते.

शिकायत दर्ज करना 'मुश्किल'

बीबीए के संस्थापक कैलाश सत्यार्थी ने कहा, ''इन लापता बच्चों में से ज़्यादातर मामलों को तो पुलिस मानती ही नहीं, उनके मामले दर्ज करना और उनकी जाँच करना तो दूर की बात है.''

इस मुहिम से जुड़े लोगों का कहना है कि लापता बच्चों के परिजनों को मामला दर्ज करने के लिए और जाँच करवाने के लिए बहुत भागदौड़ करनी पड़ती है.''

उन्होंने इसके लिए करीब 24 बच्चों के उदाहरण दिए जो साल 2006 में दिल्ली से सटे नोयडा के निठारी में मारे गए थे.

गुस्साए परिजनों का कहना था कि पुलिस उनकी शिकायतों को लगातार नज़रअंदाज़ करती रही.

रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल उन राज्यों में से हैं जहां सबसे ज़्यादा बच्चे लापता होते हैं.

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