भ्रष्टाचार विरोधी तीन विधेयकों को मंत्रिमंडल की मंज़ूरी

  • 14 दिसंबर 2011
मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह सरकार को संसद के इसी सत्र में कई अहम विधेयक पेश करके उसे पारित करवाना है

लोकपाल विधेयक संसद में पेश करने से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए तीन अहम विधेयकों को मंज़ूरी दे दी है.

मंगलवार को मंत्रिमंडल ने न्यायपालिका जवाबदेही विधेयक, व्हिसिल ब्लोअर विधेयक और सिटीज़न्स चार्टर विधेयक को मंज़ूरी दी है.

इनमें से कुछ वो मुद्दे हैं जिन्हें अन्ना हज़ारे लोकपाल विधेयक का हिस्सा बनाना चाहते थे. सरकार ने पहले ही संकेत दिए थे कि वह इन मुद्दों को अलग विधेयकों के ज़रिए अमल में ला सकती है.

राजनीतिक प्रेक्षकों की नज़र खाद्य सुरक्षा विधेयक की ओर भी लगी हुई थी लेकिन मंगलवार को इस विधेयक पर चर्चा पूरी नहीं हो सकी.

अब कहा जा रहा है कि अब इस विधेयक पर मंत्रिमंडल की अगली बैठक में चर्चा होगी.

अहम विधेयक

टीम अन्ना की मांग थी कि न्यायपालिका को जवाबदेह बनाने और सिटीज़न्स चार्टर को लागू करने की ज़िम्मेदारी लोकपाल के पास होनी चाहिए.

लेकिन सरकार और कुछ विपक्षी दलों का मत था कि इन्हें अलग विधेयक के रूप में भी पेश किया जा सकता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मंत्रिमंडल ने जिस न्यायपालिका जवाबदेही विधेयक को मंज़ूरी दी है उसमें एक ऐसी व्यवस्था तैयार करने का प्रावधान है जिसके अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के किसी जज के ख़िलाफ़ किसी व्यक्ति की शिकायत की जाँच की जा सके.

इसमें जजों के ख़िलाफ़ सुनवाई के लिए एक पैनल तैयार करने का भी प्रावधान है और ये जजों के लिए ये दिशा निर्देश देता है कि वे अपनी ही अदालत में कार्यरत वकीलों से नज़दीकी संबंध न रखें.

सिटीज़न्स चार्टर विधेयक में ये प्रावधान है कि हर सरकारी कामकाज का समय निर्धारित कर दिया जाए और निश्चित समयावधि में कार्य न होने पर संबंधित अधिकारियों को दंडित किया जा सके.

जबकि व्हिसिलब्लोअर विधेयक सरकारी कामकाज में गड़बड़ियों को उजागर करने वाले नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने के बारे में है.

खाद्य सुरक्षा विधेयक टला

हालांकि मंगलवार को उस विधेयक पर चर्चा पूरी नहीं हो सकी, जिसमें देश की आबादी के 64 प्रतिशत लोगों को रियायती दरों पर खाद्यान्न पाने का हक़ देने का प्रावधान किया जाना है.

इस विधेयक में ज़रुरतमंद परिवारों को दो हिस्सों में बाँटा गया है. एक में वो परिवार आएंगे जो अभी ग़रीबी रेखा के नीचे हैं और दूसरी श्रेणी में वो परिवार आएँगे जो ग़रीबी रेखा के दायरे में नहीं आते.

ग़रीबी रेखा से नीचे आने वाले परिवारों को अभी भी रियायती दरों पर अनाज मुहैया करवाया जाता है.

सरकार की ओर से मिले संकेतों के अनुसार ग्रामीण इलाक़ों में 75 प्रतिशत आबादी को और शहरी इलाक़ों में 50 प्रतिशत आबादी को इस क़ानून से फ़ायदा पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है.

पीटीआई ने मंत्रिमंडल की बैठक में मौजूद एक मंत्री के हवाले से कहा है,"खाद्यान्न सुरक्षा विधेयक के मसौदे पर चर्चा अधूरी रही और अब इस पर चर्चा अगले हफ़्ते की बैठक में होगी."

मंत्रिमंडल की अगली बैठक 18 दिसंबर को होने की संभावना है.

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