ठंड से किसी की मौत नहीं होनी चाहिए:कोर्ट

  • 13 दिसंबर 2011
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Image caption पिछले साल उत्तर भारत में ठंड के चलते कई लोगों की जान गई थी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे बेघर लोगों के लिए रैनबसेरों की समुचित व्यवस्था करें जिससे ठंड से 'एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हो.'

ठंड के मौसम में राजधानी दिल्ली के अलावा भारतीय कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य सर्वाधिक प्रभावित होते हैं.

पिछले साल भी ठंड की वजह से उत्तर भारतीय राज्यों में कई लोगों की जान गई थी. इसके अलावा ठंड के चलते एहतियातन बड़ी संख्या में स्कूल भी बंद रखे गए थे.

न्यायालय ने इस बात पर चिंता ज़ाहिर की कि अधिकतर राज्यों ने फ़िलहाल बेघर लोगों को आसरा मुहैया कराने की दिशा में कुछ ख़ास काम नहीं किया है और अधिकारियों से कहा कि रैन बसेरों की स्थिति पर तीन जनवरी तक रिपोर्ट दें.

न्यायाधीशों ने कहा, "कड़ाके की ठंड की वजह से इस बार एक भी व्यक्ति की मौत नहीं होनी चाहिए."

दिल्ली में 2008 में हुए एक अध्ययन के अनुसार लगभग डेढ़ लाख लोगों को ठंड में बाहर रात गुज़ारनी पड़ती है.

अधिकारियों के अनुसार दिल्ली में 64 रैन बसेरे हैं मगर स्वयंसेवी संगठनों के अनुसार उनमें से सिर्फ़ 42 ही काम कर रहे हैं और बाक़ी बंद हो चुके हैं.

इस पर न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी ने पूछा, "क्या दिल्ली में बेघर लोगों की संख्या कम हो चुकी है, ये मानना काफ़ी मुश्किल है."

बेघर लोगों के लिए काम करने वाले इंडो-ग्लोबल सोशल सर्विसेज़ सोसाइटी से जुड़े इंदु प्रकाश के अनुसार पिछले साल दिल्ली सरकार ने 84 रैन बसेरे तंबुओं के रूप में लगाए थे मगर उनमें से अभी सिर्फ़ 16 ही काम कर रहे हैं क्योंकि जिस ग़ैर सरकारी संगठन को वो रैन बसेरे चलाने का काम दिया गया था सरकार ने उसे धन देना ही बंद कर दिया.

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