एक हज़ार करोड़ के ऋण जोख़िम गारंटी कोष की योजना

  • 13 दिसंबर 2011
Image caption प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि महानगरीय योजना पर ज़्यादा ध्यान केंद्रीत करने की ज़रूरत है.

भारत सरकार 1,000 करोड़ का एक ऋण जोख़िम गारंटी कोष बनाने पर विचार कर रही है. इस कोष के ज़रिए बैंकों को ग़रीबों को ऋण देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

ये घोषणा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन के एक सम्मेलन में की.

उन्होंने कहा कि छोटे और बड़े सभी शहरों के लिए एक जैसी नीति कारगर नहीं हो सकती.

प्रधानमंत्री ने कहा,''समाज के कमज़ोर तबकों और कम आय वर्ग के लोगों की आर्थिक मदद हेतु बैंकों को प्रोत्साहित करने के लिए हम मौजूदा वित्त वर्ष में 1,000 करोड़ रुपए का एक ऋण जोख़िम गारंटी कोष बनाने पर विचार कर रहे हैं.''

उन्होंने कहा कि,''जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीकरण मिशन की शुरुआत 2005 के दिसंबर महीने में की गई थी और इसका मिलाजुला अनुभव रहा है. लेकिन इसके तहत जो काम हुए हैं और जो कुछ सीखने का मौक़ा मिला है उससे हमें बहुत प्रोत्साहन मिला है. इस मिशन की सबसे बड़ी क़ामयाबी ये है कि आधुनिक भारत की ज़रूरतों के मुताबिक़ शहरी आवास की योजना को लेकर आज जागरुकता काफ़ी बढ़ गई है.''

शहरी आबादी

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत के सकल घरेलू उत्पाद का दो तिहाई हिस्सा शहरी भारत पैदा करता है.

इसलिए हमें उद्योगों और सेवा क्षेत्र में आजीविका के अवसर बढ़ाने और कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए ताकि ग़रीबी के भार को कम किया जा सके और ज़्यादा खुला और लोकतांत्रिक समाज बनाया जा सके.

मनमोहन सिंह ने कहा कि तेज़ आर्थिक विकास से शहरीकरण बढ़ेगा और इसके परिणामस्वरूप भारत की शहरी आबादी जो आज 37.7 करोड़ है वो 2031 तक बढ़कर 60 करोड़ हो जाएगी, इसलिए ये ज़रूरी हो गया है कि महानगरीय योजना पर और ज़्यादा ध्यान केंद्रित किया जाए, सड़कों और राजमार्गों के नेटवर्क को सुधारा जाए और सार्वजनिक परिवहन को ज़रूरत के मुताबिक दुरुस्त बनाया जाए.

प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि नगर नियोजकों को पारंपरिक तरीक़ों को छोड़कर नए तरीक़े से शहरों की योजना बनानी चाहिए ताकि उसमें ग़रीबों की ज़रूरत को भी शामिल किया जा सके.

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