काला धन: 25 लाख करोड़ या ज़्यादा?

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Image caption काला धन मतलब ऐसा धन जो अवैध तरीके से कमाया जाए और सरकार को जिसकी ख़बर नहीं हो

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी कहते हैं कि विदेशी बैंकों में भारतीयों ने 25 लाख करोड़ की रक़म जमा कर रखी है. बाबा रामदेव दो लाख करोड़ का आँकड़ा देते हैं.

स्विस बैंकिंग एसोसिएशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया का सारा काला धन मिला दें, तो भारत में उससे भी ज़्यादा काला धन है और भारतीयों ने डेढ़ ख़रब डॉलर की रक़म स्विस बैंकों में जमा कर रखी है.

काले धन पर बातें तो सालों से होती रही हैं लेकिन क्या सरकार के काला धन वापस लाना आसान है? और कुछ लोग तो दबे मुँह से ये भी कहने लगे हैं कि काला धन भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और अगर ये बाहर गया तो अर्थव्यवस्था ही बैठ जाएगी.

काला धन मतलब ऐसा धन जो अवैध तरीके से कमाया जाए और सरकार को जिसकी ख़बर नहीं हो.

लेकिन क्या सरकार ने काले धन को वापस लाने के लिए काफ़ी काम किया है?

काले धन मुद्दे पर सरकार पर दबाव है, तभी भारत ने स्विट्ज़रलैंड और लग्ज़मबर्ग जैसे देशों से कर-संबंधी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं.

वित्त मंत्री के मुताबिक भारत 75 देशों के साथ कर समझौतों पर दोबारा बातचीत कर रहा है और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, केमन आइलैंड, आइल ऑफ़ मान जैसे द्वीपों में जहाँ टैक्स आसानी से बचाया जा सकता है, उनके साथ जानकारी के लेन-देन के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं.

लेकिन भारतीय प्रबंधन संस्थान बैंगलोर के प्रोफ़ेसर आर वैद्यनाथन कहते हैं कि सरकार में इमानदारी की कमी है.

वो कहते हैं, “केमन आइलैंड जैसे टैक्स हेवन दुनिया के रेड लाइट इलाके जैसे हैं और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यस्था के लिए खतरा हैं. मैं इस बात से हैरान हूँ कि सरकार कहती है कि जर्मनी से मिले एकाउंटधारकों को नाम को वो सार्वजनिक नहीं कर सकती क्योंकि समझौते में यही लिखा है. सरकार को ऐसा समझौता करना ही नहीं चाहिए था जिसके तहत वो नाम नहीं सार्वजनिक न कर पाए.”

काले धन पर याचिका

काले धन को लेकर याचिकाएँ भी दायर की गई हैं.

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने राम जेठमलानी और केपीएस गिल के साथ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर माँग की कि इस बारे में एक विशेष जाँच टीम बनाई जाए और सरकार काले धन को वापस लाने के लिए कदम उठाए.

लेकिन जब उच्चतम न्यायालय ने ऐसा आदेश दिया तो सरकार ने न्यायालय से अपना आदेश वापस लेने को कहा.

जब उनसे पूछा गया कि वो क्यों चाहते थे कि सीबीआई या फिर दूसरी सरकारी एजेंसियाँ काले धन की जाँच नहीं करें?

वो कहते हैं, “सीबीआई सरकार के तहत काम करती है. उससे ये आशा नहीं की जा सकती कि वो 100 फ़ीसदी ईमानदारी से जाँच करेगी.”

लेकिन क्या काला धन वापस लाना संभव है? अर्थशास्त्री कहते हैं कि इसके लिए बहुत छोटे-छोटे कदम उठाने की ज़रूरत है. जो लोग बार-बार टैक्स हैवन द्वीपों की यात्रा करते हैं, उन पर निगरानी रखी जाए और कर एजेंसियों को चुस्त-दुरुस्त किया जाए.

प्रोफ़ेसर वैद्यनाथन कहते हैं कि जहाँ फ्रांस और जर्मनी जैसे देश जहाँ की अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी हालत में नहीं हैं, वो इस धन को हाथ से नहीं जाने देना चाहते.

उनका कहना है कि दुनिया भर के देशों को इस बारे में भी चिंता है कि काला धन का कुछ हिस्सा आतंकवाद में भी खर्च किया जा रहा है. इसलिए भारत को भी सख़्त कदम उठाने होंगे.

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