लोकपाल पर सभी दलों की अहम बैठक

इमेज कॉपीरइट AP

लोकपाल बिल के अंतिम रूप को लेकर चले रहे संशय और विवाद के बीच बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है.

इस बैठक में कांग्रेस और यूपीए के घटक दलों के अलावा भारतीय जनता पार्टी और वाम दल भी हिस्सा लेंगे.

प्रधानमंत्री के अलावा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों और सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाने को लेकर राजनीतिक बहस गर्म है.

भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वो प्रधानमंत्री और नौकरशाही में निचले स्तर के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाना चाहती है. सीपीएम भी प्रधानमंत्री को लोकपाल की परिधि में लाने के हक़ में है.

उधर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने भी कह दिया है कि वे प्रधानमंत्री, निचले स्तर के कर्मचारियों और सीबीआई को लोकपाल के अधीन रखने के पक्ष में हैं.

यूपीए घटकों की बैठक

इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यूपीए की सहयोगी पार्टियों के साथ लोकपाल पर बैठक की.

नई दिल्ली में दो घंटे चली इस बैठक के बाद गृह मंत्री पी चिदंबरम ने पत्रकारों को बताया कि सभी नेताओं ने अपना मत रखा और बातचीत सार्थक रही है.

चिदंबरम ने कहा कि लोकपाल के मुद्दे पर यूपीए सरकार में मुख्य तौर पर आम सहमति है.

यूपीए के घटक दलों की ये बैठक इसलिए अहम है क्योंकि सर्वदलीय बैठक से पहले कांग्रेस अपने सहयोगियों का समर्थन हासिल करना चाहती थी.

लोकपाल बिल को लेकर यूपीए सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है. अन्ना हज़ारे पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि अगर मज़बूत लोकपाल विधेयक पेश नहीं किया गया तो वे 27 दिसंबर से अनशन पर बैठ जाएँगे.

चुनौती

विपक्षी पार्टियों के तेवर भी काफ़ी तीखे हैं. भाजपा और वामदलों के नेताओं ने तो अन्ना हज़ारे के सांकेतिक अनशन के दौरान उनके मंच पर जाकर मज़बूत लोकपाल की हिमायत भी की थी. इसके बाद से सरकार पर दबाव और बढ़ गया है.

वहीं लोकपाल विधेयक संसद में पेश करने से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को भ्रष्टाचार से निपटने के लिए तीन अहम विधेयकों को मंज़ूरी दे दी है.

इनमें न्यायपालिका जवाबदेही विधेयक, व्हिसिल ब्लोअर विधेयक और सिटीज़न्स चार्टर विधेयक शामिल है.

इन विधेयकों को ऐसे कई मुद्दे हैं जिन्हें अन्ना हज़ारे लोकपाल विधेयक का हिस्सा बनाना चाहते थे. अन्ना हज़ारे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इन मुद्दों पर अलग से बिल बनाना सही नहीं है.

लोकपाल बिल 20 दिसंबर को पेश किए जाने की उम्मीद है और संसद का सत्र 22 दिसंबर को ख़त्म हो रहा है.

संबंधित समाचार