बंगाल में ज़हरीली शराब से 160 की मौत

  • 16 दिसंबर 2011
डायमंड हार्बर के बाहर मरीज़ इमेज कॉपीरइट AFP Getty
Image caption डायमंड हार्बर के बाहर मरीज़ों का खुले में उपचार हो रहा है.

पश्चिम बंगाल में ज़हरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 160 हो गई है और 204 लोगों का इलाज चल रहा है.

प.बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना की सीआईडी जाँच के आदेश दिए हैं.साथ ही उन्होंने लोगों में जागरूकता बढ़ाने के तरीक़ों पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है.

पुलिस ने इस मामले में अब तक कुल दस लोगों को गिरफ़्तार किया है. इनमें से चार लोगों को बुधवार को और छह लोगों को बृहस्पतिवार को ग़िरफ़्तार किया गया है.

पुलिस घटना के बाद से ही इलाके की भट्ठियों पर छापा मार रही है और उन्हें सील कर रही है.

सीआईडी जाँच

इससे पहले मंगलवार को दक्षिण 24 परगना ज़िले के संग्रामपुर, मागराहाट, उस्थी और मंदिर बाज़ार इलाक़ों के 12 गांवो के लोगों ने ये शराब पी थी.

एक ग्रामीण ने बताया, “बहुत से लोग शराब पीने के बाद एक-दो घंटों के भीतर ही मर गए. लेकिन पुलिस के डर के मारे शुरूआत में कोई अस्पताल नहीं गया.” ज़हरीली शराब पीने वालों में कुछ 10 से 12 साल की उम्र के बच्चे भी थे और वे इस वक़्त अस्पताल में हैं.

बुधवार सुबह से ही शराब पीकर बीमार हुए लोगों को इस इलाक़े के ग्रामीण और शहरी अस्पतालों भर्ती करवाया जाना शुरू किया गया था. इन लोगों के पेट में तेज़ दर्द था. पश्चिम बंगाल के एक मंत्री शयामल मंडल ने कहा है कि जिन मरीज़ों की हालात गंभीर है, उन्हें कोलकाता के सरकारी अस्पतालों में भेजा गया है.

'चोलाई' का खेल

बंगाली में ‘चोलाई’ नाम से जाने जाने वाली इस शराब की कई दुकानों और फ़ैक्टरियों पर गुस्साए ग्रामीणों ने तोड़-फोड़ की है. चोलाई नाम की ये देसी शराब बंगाल के ग्रामीण इलाक़ों में काफ़ी लोकप्रिय है.

दक्षिण 24 परगना ज़िले का गोचरण क़स्बा चोलाई बनाने का प्रमुख केंद्र है.

एक स्थानीय निवासी ने बीबीसी को बताया, “पुलिस और आबकारी विभाग जानता है कि इन ग़ैर-क़ानूनी शराबखानों को कौन चलाता है. लेकिन कभी-कभार ही छापे मारकर छोटे-मोटे कर्मचारियों की धरपकड़ की जाती है. जो इस धंधे के सरगना हैं, उनके तार राजनीतिज्ञों से जुड़े हैं, इसलिए उन्हें कोई हाथ नहीं लगाता.”

इस ग़ैर-क़ानूनी धंधे में सैकड़ों युवा लगे हैं और ये सब खुलेआम होता है. इन शराबख़ानों में तैयार देसी दारू को जरीकेन में भर गांव-गांव में बसों और ट्रेनों के ज़रिए भेजा जाता है.

घातक घोल का रसायन-शास्त्र

दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर के एक निवासी ने बीबीसी को बताया, “ट्रेनों और बसों में आप ऐसे लोगों को देख सकते हैं. ये बड़े-बड़े केन सारे ज़िले के अलावा कोलकाता तक भेजे जाते हैं. ”

पुलिस, रेलवे अधिकारी सभी को इस धंधे के बारे में पता है लेकिन कोई आपत्ति नहीं करता. गांव में पहुंच कर इस शराब को प्लास्टिक के पाउच में डालकर बेचा जाता है. ऐसे ही अवैध शराबख़ाने पड़ोस ज़िलों में भी मौजूद हैं.

अवैध शराब का एक ऐसी ही अड्डा उत्तर 24 परगना ज़िले के उस विधानसभा क्षेत्र में है, जहां से मौजूदा और इससे पिछली सरकार के वित्तमंत्री चुनकर आए थे. इन मंत्रियों के पास आबकारी विभाग का भी कार्यभार था.

अवैध शराब ज़हरीली क्यों ?

गोचरण क़स्बे में एक ग़ैर-सरकारी संस्था के कार्यकर्ता कहते हैं, “शराब को एक ख़ास महक देने के लिए उसमें अमोनियम नाइट्रेट मिलाया जाता है. अगर इसकी मात्रा अधिक हो जाए, तो ये शराब को ज़हरीला बना देता है. ”

इसके अलावा गंदगी भरे माहौल में शराब निकालते वक़्त शायद कुछ कीड़े-मकोड़े भी इसमें गिर जाते होंगे. शराब सस्ते में बन जाए इसलिए इसमें स्थानीय मिठाई की दुकानों से पुरानी मिठाई ली जाती है, जो पहले से ही सड़ी-गली होती है.

दक्षिण 24 परगना ज़िले के गोचरण में ऐसी ही मिलावट के साथ चोलाई तैयार होती है, जो अब तक सौ से अधिक लोगों की जान ले चुकी है.