लोकपाल पर सरकार की चुनौती बढ़ी

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Image caption सरकार को कई संवेदनशील मुद्दों पर ऐसे निर्णय लेने होंगे जिससे सभी सहमत हो सकें

बुधवार को लोकपाल विधेयक पर सहमति न बन पाने और अन्ना हज़ारे की नई धमकी के बाद सरकार के सामने शीतकालीन सत्र में ही विधेयक को पारित करने की चुनौती बढ़ गई है.

सर्वदलीय बैठक में कुछ संवेदनशील मुद्दों पर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अलग-अलग राय रखी थी और कुछ ने तो ये भी कहा है कि सरकार को इस विधेयक को लेकर जल्दबाज़ी नहीं दिखानी चाहिए.

लेकिन अन्ना हज़ारे ने गुरुवार को एक बार फिर दोहराया है कि यदि संसद के इस सत्र में विधेयक पारित नहीं होता है तो वे 27 दिसंबर से आमरण अनशन शुरु कर देंगे. उन्होंने साथ ही में ये नई धमकी दी है कि वे पहली जनवरी से जेल भरो आंदोलन भी शुरु करेंगे.

इसके बाद सरकार के सामने चुनौती है कि 22 दिसंबर को ख़त्म हो रहे सत्र में वह लोकपाल विधेयक को संसद के दोनों सदनों में किस तरह से पारित करवाएगी.

संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा है कि विधेयक अगले हफ़्ते संसद में पेश किया जाएगा. उन्होंने संकेत दिए हैं कि इसके लिए संसद का सत्र एक दिन के लिए बढ़ाया भी जा सकता है.

दबाव

लोकपाल विधेयक पर संसद की स्थाई समिति ने अपनी राय दे दी है और अब सरकार को उसमें आवश्यक संशोधन करके संसद में पेश करना है.

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Image caption संसद का शीतकालीन सत्र 22 दिसंबर को ख़त्म हो रहा है

समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी के नेतृत्व में तीन मंत्री इस विधेयक के प्रारुप को अंतिम रूप देंगे, इनमें गृहमंत्री पी चिदंबरम, क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद और कार्मिक राज्यमंत्री वी नारायणसामी हैं.

संभावना है कि ये विधेयक रविवार की शाम मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृति के लिए रखा जाएगा.

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वह प्रधानमंत्री को किस तरह से लोकपाल के दायरे में रखे, जो कि प्रमुख विपक्षी दल भाजपा की मुख्य मांगों में से है.

इसी तरह का असमंजस सी और डी ग्रुप के सरकारी कर्मचारियों को इस दायरे में रखे जाने और साथ में सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाए जाने को लेकर है.

पीटीआई ने एक केंद्रीय मंत्री के हवाले से कहा है कि सरकार की कोशिश है कि विधेयक समय पर पेश करके उसे पारित करवाने की कोशिश करे जिससे कि उस पर ये आरोप न लगे कि उसने गंभीर प्रयास नहीं किए.

इस बीच कांग्रेस ने अपने सदस्यों से सोमवार और मंगलवार को सदन में उपस्थित रहने को कहा है.

जेल भरो आंदोलन की धमकी

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Image caption अन्ना हज़ारे पहले भी दो बार आंदोलन कर चुके हैं

उधर अन्ना हज़ारे अपनी मांगों पर क़ायम हैं.

उन्होंने गुरुवार को दोहराया है कि यदि संसद के इसी सत्र में एक ताक़तवर लोकपाल विधेयक पारित नहीं किया जाता है तो वे 27 दिसंबर से मुंबई में धरने पर बैठ जाएँगे.

साथ उन्होंने दबाव बढ़ाते हुए एक नई धमकी दे दी है कि वे पहली जनवरी से जेल भरो आंदोलन भी शुरु कर देंगे.

उन्होंने कहा है कि यदि सरकार को समय कम लगता है तो वह संसद के शीतकालीन सत्र का समय बढ़ा सकती है.

टीम अन्ना की कोर कमेटी की बैठक के बाद अन्ना हज़ारे ने कहा कि जो भी सांसद इस विधेयक का विरोध करेंगे, उनके घरों के सामने धरना दिया जाएगा.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के घर के सामने के धरने में वे ख़ुद शामिल होंगे.

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