चुनाव से पहले मायावती ने खेला 'मुस्लिम कार्ड'

मायावती
Image caption मायावती ने आरक्षण के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्ष के तीखे हमलों से तिलमिलाई उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने अपने समर्थकों को नया नारा दिया है, “चढ़ विपक्ष की छाती पर मुहर लगेगी हाथी पर”.

मायावती रविवार को लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी की एक रैली को संबोधित कर रही थीं. इस रैली में मुस्लिम,वैश्य और क्षत्रीय समुदाय के बीएसपी समर्थकों को विशेष ट्रेनों और बसों के ज़रिए लखनऊ बुलाया गया था.

कड़ाके की सर्दी में आए हज़ारों लोगों को संबोधित करते हुए मायावती ने अपनी सरकार की उपलब्धियां और कामयाबियां गिनाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने आम जनता और व्यापारियों को परेशान करने वाले गुंडों और अपराधियों को क़ाबू में किया है.

लेकिन मायावती ने सबसे ज़्यादा ज़ोर मुस्लिम समुदाय को रिझाने पर दिया.

उनका आरोप था कि कांग्रेस पार्टी ने अपने लंबे शासनकाल के बावजूद मुस्लिम समुदाय को तरक़्क़ी में मदद के बजाय धोखा दिया है. उन्होंने कांग्रेस शासन में हुए दंगों और बाबरी मस्जिद विध्वंस की याद दिलाई.

"अनुपात से आरक्षण"

मायावती ने कहा कि वह धार्मिक अल्पसंख्यकों को आबादी के अनुपात से आरक्षण देने की पक्षधर हैं.

लेकिन मायावती ने पिछड़े वर्गों के कोटे के अंदर मुस्लिम समुदाय को आरक्षण दिए जाने के कांग्रेस सरकार के प्रस्ताव का एक तरह से विरोध किया.

मायावती का कहना है कि ऐसा करने से पहले संविधान में संशोधन करके पिछड़े वर्गों के आरक्षण का कोटा बढ़ाया जाए.

उन्होने कहा, “केंद्र की सरकार यदि देश में ओबीसी के लोगों को मिल रहे 27 प्रतिशत आरक्षण में यदि धार्मिक अल्पसंख्यक समाज की अति पिछड़ी जातियों को इसमें शामिल करती है तो फिर उसी अनुपात में उनकी आबादी के हिसाब से ओबीसी का आरक्षण का कोटा भी ज़रुर बढ़ाना चाहिए. इसके लिए संविधान में संशोधन करने की ज़रुरत है, जिसका हमारी पार्टी समर्थन करेगी.”

मायावती ने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि वो भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों को बढ़ावा देती है.

हालाँकि मायावती ख़ुद भी तीन बार बीजेपी के समर्थन से सरकार बना चुकी हैं और गुजरात में नरेन्द्र मोदी के पक्ष में चुनाव प्रचार करने भी जा चुकी है.

फ़र्जी कंपनियों का आरोप

भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में मायावती के भाई आनंद कुमार और बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्र के परिवार के लोगों के ज़रिए कथित तौर पर फ़र्ज़ी कंपनियां बनाकर दस हज़ार करोड़ रुपयों की काली कमाई का आरोप लगाया था.

बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने इस सिलसिले में कई कागज़ात मीडिया और सरकारी अधिकारियों को दिए हैं. मायावती इन आरोपों से बिफ़री नज़र आई.

मायावती ने कहा, “जहाँ तक मेरे माँ-बाप, भाई-बहन एवं पार्टी के पदाधिकारी क्या कारोबार करते हैं, उनकी कितनी कंपनियां सही या ग़लत हैं इस बात का सवाल है तो इसकी जांच पड़ताल का कार्य भारतीय जनता पार्टी का नहीं है, बल्कि यह सब कार्य भारत सरकार के आयकर विभाग का है. इसलिए इस कार्य में भारतीय जनता पार्टी को कोई भी कष्ट उठाने के बजाए इसे आयकर विभाग पर ही छोड़ देना चाहिए.”

Image caption मुस्लिम समाज के लोग मायावती को प्रतीक भेंट करते हुए.

कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में चुनाव अभियान के दौरान कई बार आरोप लगा चुके है कि उत्तर प्रदेश के गांवों और ग़रीबों के विकास के लिए दिल्ली से आने वाला हज़ारों करोड़ रुपया सही लोगों तक नही पहुँचता है.

एक महीने के अंदर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मायावती की यह तीसरी चुनावी रैली थी. पहली रैली ब्राह्मण समुदाय को रिझाने के लिए, दूसरी दलित और पिछड़े समुदाय को और यह तीसरी रैली मुस्लिम, वैश्य और क्षत्रिय समुदाय को रिझाने के लिए आयोजित की गई.

पहले बीएसपी की रैलियों में लोग अपने आप सत्तू, चना, चबेना और रोटी-पराठा लेकर ख़ुद ही पैदल और साइकिलों से आते थे. लेकिन अब बीएसपी की रैली में भीड़ जुटाने के लिए हज़ारों बसें, मोटर गाड़ियां और विशेष ट्रेने लगाई जाती हैं. पुलिस और अन्य सरकारी अमला रैली को कामयाब बनाने में लगे थे.

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