बंगलौर हमला: छह चरमपंथियों को उम्रकै़द

Image caption 2005 में बंगलौर के प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान संस्थान पर चरमपंथी हमला हुआ था

कर्नाटक की एक अदालत ने 2005 में बंगलौर के प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान संस्थान पर हुए चरमपंथी हमले के छह अभियुक्तों को सोमवार को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.

इस हमले में आईआईटी दिल्ली के सेवानिवृत्त प्रॉफेसर एमसी पुरी की मौत हो गई थी और चार लोग घायल हो गए थे.

फास्ट ट्रैक अदालत ने इन अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 121 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने) और धारा 120 (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराने के बाद ये सज़ा सुनाई.

शनिवार को कोर्ट ने सभी छह लोगों को दोषी करार दिया था. पिछले पांच साल से ये सभी कर्नाटक की जेल में बंद हैं.

इन छह लोगों को साल 2005 में भारतीय विज्ञान संस्थान पर हमला करने के मामले में जाँच के दौरान चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा से उनके संबंधों के सामने आने के बाद गिरफ़्तार किया गया था.

चरमपंथी हमला

28 दिसंबर 2005 में बंगलौर के भारतीय विज्ञान संस्थान के जेएन टाटा ऑडिटोरियम में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन चल रहा था और क़रीब सात-साढ़े सात बजे लोग जब ऑडिटोरियम से निकल रहे थे, उसी समय गोलीबारी की आवाज़ सुनाई दी.

पुलिस का कहना था कि हमलावर कार में आए और उनमें से एक ने कार से निकलकर गोलियाँ चलानी शुरू कर दी.

मारे गए प्रोफ़ेसर एमसी पुरी आईआईटी दिल्ली से अवकाश प्राप्त कर चुके थे और सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे.

संबंधित समाचार