क्या है खाद्य सुरक्षा विधेयक?

  • 19 दिसंबर 2011
भारतीय

भारत में कैबिनेट ने खाद्य सुरक्षा विधेयक को मंज़ूरी दे दी है.

इस विधेयक को लेकर पिछले दिनों संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के सदस्यों और कुछ कांग्रेसी सदस्यों ने भी आपत्ति उठाई थी.

लेकिन अब कैबिनेट ने इस विधेयक को मंज़ूरी दे दी है.

आइए जानते हैं ये विधेयक है क्या....

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खाद्य सुरक्षा बिल की ख़ास बात यह है कि खाद्य सुरक्षा कानून बनने से देश की दो तिहाई आबादी को सस्ता अनाज मिलेगा.

विधेयक में लाभ प्राप्त करने वालों को प्राथमिकता वाले परिवार और सामान्य परिवारों में बांटा गया है.

प्राथमिकता वाले परिवारों में ग़रीबी रेखा से नीचे गुज़र-बसर करने वाले और सामान्य कोटि में ग़रीबी रेखा से ऊपर के परिवारों को रखे जाने की बात कही गई है.

ग्रामीण क्षेत्र में इस विधेयक के दायरे में 75 प्रतिशत आबादी आएगी, जबकि शहरी क्षेत्र में इस विधेयक के दायरे में 50 प्रतिशत आबादी आएगी.

विधेयक में प्रत्येक प्राथमिकता वाले परिवारों को तीन रूपये प्रति किलोग्राम की दर से चावल और दो रूपये प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं उपलब्ध कराने की बात कही गई है.

खाद्य सुरक्षा विधेयक के मसौदे के प्रावधानों के तहत देश की 63.5 प्रतिशत जनता को खाद्य सुरक्षा प्रदान की जाएगी.

खाद्य सुरक्षा विधेयक का बजट पिछले वित्तीय वर्ष के 63,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 95,000 करोड़ रुपए कर दिया जाएगा.

इस विधेयक के क़ानून में बदल जाने के बाद अनाज की मांग 5.5 करोड़ मिट्रिक टन से बढ़ कर 6.1 मिट्रिक टन हो जाएगी.

इस योजना के लाभार्थियों को दो भागों में बांटा गया है– प्राथमिकता वाले परिवार (जैसे बीपीएल या ग़रीबी रेखा से नीचे आने वाले लोग) और सामान्य परिवार (जैसे एपीएल या ग़रीबी रेखा से ऊपर आने वाले लोग).

इस विधेयक के तहत सरकार प्राथमिकता श्रेणी वाले प्रत्येक व्यक्ति को सात किलो चावल और गेहूं देगी. चावल तीन रुपए और गेहूं दो रुपए प्रति किलो के हिसाब से दिया जाएगा.

जबकि सामान्य श्रेणी के लोगों को कम से कम तीन किलो अनाज न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधे दाम पर दिया जाएगा.

ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत आबादी को इस विधेयक का लाभ दिया जाएगा, जिसमें से कम से कम 46 प्रतिशत प्राथमिकता श्रेणी के लोगों को दिया जाएगा.

शहरी इलाक़ों में कुल आबादी के 50 फ़ीसदी लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान की जाएगी और इनमें से कम से कम 28 प्रतिशत प्राथमिकता श्रेणी के लोगों को दिया जाएगा.

नए प्रावधान

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कुछ दिनों पहले खाद्य मंत्री केवी थॉमस ने इस विधेयक के बारे में कहा था, “राष्ट्रीय सलाहकार परिषद और प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद से चर्चा के बाद 2009 में बनाए गए विधेयक के मसौदे में कुछ और प्रावधान जोड़े गए हैं.”

संशोधिक मसौदे में गर्भवती महिलाओं, बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाओं, आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों और बूढ़े लोगों को पका हुआ खाना मुहैया करवाया जाएगा.

खाद्य मंत्री के मुताबिक़ स्तनपान कराने वाली महिलाओं को महीने के 1,000 रुपए भी दिए जाएंगें.

इस विधेयक में ऐसा भी प्रावधान हैं, जिसके तहत अगर सरकार प्राकृतिक आपदा के कारण लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाती है, तो योजना के लाभार्थियों को उसके बदले पैसा दिया जाएगा.

महत्वपूर्ण है कि जनवितरण प्रणाली के तहत सरकार हर महीने 6 करोड़ 52 लाख बीपीएल परिवारों को 35 किलो गेहूं और चावल प्रदान करती है. इस योजना के तहत गेहूं 4.15 रुपए में दिया जाता है, जबकि चावल का दाम 5.65 रूपए किलो है.

एपीएल की श्रेणी वाले 11.5 करोड़ परिवारों को 6.10 रुपए में 15 किलो गेहूं और 8.30 रुपए में 35 किलो चावल दिए जाते हैं.

नया क़ानून लागू होने के बाद इससे कम दाम में गेहूं और चावल पाना निर्धन लोगों का क़ानूनी अधिकार बन जाएगा.

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