लोकपाल के लिए संसद का सत्र तीन दिन और

  • 20 दिसंबर 2011
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Image caption सरकार पर दबाव है कि वह लोकपाल विधेयक को इसी सत्र में पारित करवाए

ऐसा लगता है कि सामाजकि कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे का दबाव एक बार फिर अपना असर दिखाने लगा है. केंद्र की यूपीए सरकार ने लोकपाल विधेयक को पारित करने के लिए संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र को तीन दिनों के लिए बढ़ाने का फ़ैसला किया है.

पहले शीतकालीन सत्र 22 दिसंबर तक चलने वाला था लेकिन अब इस सत्र में 27, 28 और 29 दिसंबर को भी संसद की बैठक होगी.

संसदीय कार्य मंत्री हरीश रावत ने संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए इसकी जानकारी दी.

उनके मुताबिक़ इस दौरान सरकार तीन बिल को संसद में पेश करेगी और उसे पास कराने की कोशिश करेगी.

इनमें बहुचर्चित लोकपाल बिल के अलावा ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी बिल और व्हिसल ब्लोअर बिल शामिल हैं.

कहा जा रहा है कि सरकार 22 दिसंबर को संसद में लोकपाल बिल पेश करेगी और 27 से 29 दिसंबर तक इस पर चर्चा होगी.

हरीश रावत के अनुसार 'व्हिसल ब्लोअर' और लोकपाल बिल पर संयुक्त चर्चा कराई जाएगी, जबकि 'ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी बिल' पर चर्चा अलग से होगी.

लोकपाल का नया मसौदा

इस बीच सोमवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी जिसमें लोकपाल बिल पर विचार विमर्श हुआ था और उसके प्रारूप को अंतिम रूप देने की कोशिश की गई थी.

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Image caption अन्ना हज़ारे ने घोषणा की है कि वे लोकपाल विधेयक के लिए 27 दिसंबर से फिर अनशन शुरु करेंगे

भारतीय मीडिया में इस तरह की ख़बरें आ रहीं हैं कि लोकपाल विधेयक के मसौदे में काफ़ी फेरबदल कर सरकार ने उसे अंतिम रूप दे दिया है.

ऐसा कहा जा रहा है कि अब लोकपाल के पास जांच शाखा नहीं होगी, जैसा कि दूसरे मसौदे में प्रस्ताव रखा गया था.

इसकी जगह एक इन्क्वायरी विंग यानी जाँच शाखा होगी, साथ ही लोकपाल को किसी भी मामले में ख़ुद पहल करके सुनवाई का अधिकार नहीं होगा.

सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और मुख्य न्यायाधीश मिलकर करेंगे.

पहले मसौदे में मुख्य न्यायाधीश की जगह लोकपाल का प्रस्ताव था.

नए मसौदे के अनुसार सीबीआई के इन्वेस्टिगेशन और प्रॉसिक्यूशन विंग अलग नहीं होंगे.

पहले इस तरह की ख़बरें थीं कि सीबीआई के प्रॉसिक्यूशन विंग को अलग कर उसके लिए एक नए निदेशक की बहाली की जाएगी जो सीधे लोकपाल के मातहत काम करेगा.

इस बीच मंगलवार को सिटिज़न चार्टर बिल संसद में पेश कर दिया गया. संसदीय कार्य मंत्री नारायणसामी ने इसे पेश किया.

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