अन्ना का आंदोलन सही नहीं: हाईकोर्ट

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Image caption अन्ना हज़ारे ने 27 दिसंबर से आंदोलन और 30 दिसंबर से जेल भरो आंदोलन की घोषणा की है

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपने एक फ़ैसले में कहा है कि वह इस समय अन्ना हज़ारे के आंदोलन सही नहीं मानता.

अदालत ने कहा है कि जब संसद में लोकपाल विधेयक पर बहस हो रही हो उस समय इस पर 'समानांतर बहस' की अनुमति नहीं दी जा सकती.

हाईकोर्ट ने ये फ़ैसला एक स्वयंसेवी संस्था की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया जिसमें अदालत से मांग की गई थी कि वह सरकार को निर्देश दे कि वह एमएमआरडीए के मैदान में अन्ना को बिना शुल्क लिए या न्यूनतम दरों पर भुगतान के बाद अनशन करने की इजाज़त दे.

सरकार की ओर से टीम अन्ना को आज़ाद मैदान में अनशन करने की अनुमति दी गई है लेकिन टीम अन्ना का मानना है कि वहाँ जगह अपर्याप्त है और इसकी वजह से बांद्रा-कुर्ला इलाक़े में स्थित मार्डा के मैदान पर कम शुल्क पर अनशन की अनुमति मिलनी चाहिए.

अदालत का कहना है कि वह सरकार को ऐसा कोई निर्देश नहीं देना चाहती क्योंकि इसका मतलब संसद की कार्यवाही में बाधा डालना होगा.

अदालत के इस फ़ैसले के बाद अन्ना हज़ारे ने कहा है कि 27 दिसंबर से अनशन एमएमआरडीए के मैदान पर ही होगा और आवश्यक धन राशि दान की सहायता से जुटा ली जाएगी.

उन्होंने तीन दिनों के अनशन और उसके बाद जेल भरो आंदोलन की घोषणा की है.

उल्लेखनीय है कि संसद में गुरुवार को लोकपाल विधेयक पेश किया जा चुका है और इस पर 27 दिसंबर से तीन दिन बहस होनी है.

संसद के कार्यवाही में बाधा

बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति पीबी मजूमदार और मृदुला भाटकर के एक खंडपीठ ने अपने फ़ैसले में कहा, "ये अदालत के दायरे से बाहर है. यदि हम इस याचिका पर फ़ैसला देते हैं हम संसद की कार्यवाही में बाधा भी पहुँचा रहे होंगे."

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार न्यायमूर्तियों ने पूछा, "ऐसे समय में जब संसद इस विधेयक पर चर्चा कर रही हो, हम समानांतर बहस की अनुमति नहीं दे सकते. कोई नहीं जानता कि ये किस रूप में सामने आएगा और इसमें क्या प्रावधान होंगे. क्या ऐसे समय में सार्वजनिक बहस की अनुमति दी जा सकती है?"

लोकपाल विधेयक को संसद में पेश किए जाने के बाद भी आंदोलन करने के फ़ैसले पर सवाल उठाते हुए न्यायमूर्ति मजुमदार ने कहा, "इसमें देश हित कहाँ शामिल है? हम एक लोकतांत्रिक ढाँचे का हिस्सा हैं. हमने एक सरकार चुनी है. क्या आपका आंदोलन संसद की कार्रवाई में बाधा नहीं पहुँचाएगा? विधेयक पर संसद में चर्चा होगी जहाँ हमारे चुने हुए प्रतिनिधि हमारी बात सामने रखेंगे."

उन्होंने पूछा कि किस क़ानून के तहत मार्डा के मैदान के लिए छूट मांगी जा रही है. अदालत ने कहा, "जो आपके लिए आंदोलन है वह किसी और संस्था के लिए परेशानी का सबब हो सकता है."

ये याचिका जागृत नागरिक मंच ने दायर की थी जो टीम अन्ना के संगठन इंडिया अगेंस्ट करप्शन से संबद्ध है.

नियमानुसार संस्था को मार्डा के मैदान के लिए आठ लाख रुपए की ज़मानत की राशि के रूप में जमा करनी होती है और 11 लाख रुपए का किराया देना होता है.

लेकिन मार्डा के वकील ने कहा कि सामाजिक संस्था के रूप में याचिकाकर्ता को छह लाख रुपए जमा करने होंगे.

'दान से जुटा लेंगे राशि'

बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से रियायती दरों पर मैदान उपलब्ध करवाने के मामले में दखल देने से इनकार करने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने कहा है कि 27 दिसंबर से शुरु होने वाला अनशन मुंबई के एमएमआरडी मैदान पर ही होगा.

उन्होंने कहा कि मैदान के लिए फ़ीस के रूप में जमा की जाने वाली आवश्यक धनराशि समर्थकों से दान राशि के रूप में जुटाई जाएगी.

उन्होंने कहा, "एमएमआरडीए थोड़ी छूट देगी और मैदान के लिए सात लाख रूपए जमा करवाने होंगे. दान की राशि सिर्फ़ चेक और ड्राफ़्ट के ज़रिए स्वीकार की जाएगी. हम दानदाताओं पर भी निगाह रखेंगे."

उन्होंने कहा कि उनकी टीम के लोगों को अदालत जाना ही नहीं था.

अन्ना हज़ारे ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी भी अनशन में शामिल होंगे और अनशन मुंबई के साथ-साथ दिल्ली में भी होगा.

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