'मौलाना मुबारक़बाद दे रहे हैं'

  • 24 दिसंबर 2011
जाफ़रयाब जिलानी
Image caption जाफ़रयाब जिलानी ने इसे सही दिशा में उठाया गया क़दम तो बताया लेकिन साथ ही ये कहा कि ये नाकाफ़ी है.

एजाज शाह लखनऊ के इस्लामिया कालेज में कर्मचारी हैं. उनका कहना है , “जो माँगा था वह नही मिला .लेकिन जितना अमिला उससे संतुष्ट हैं. जो भी कर रही है कांग्रेस , बेहतर किया, हम लोगों और मुसलमानों के लिए.”

एजाज शाह उन आम मुसलामानों में से एक हैं जो पिछड़े वर्गों में मुसलमानों के लिए साढ़े चार फीसदी अलग कोटा तय करने के केन्द्र सरकार के फैसले से खुश हैं.

वहीं पास खड़े शाह फै़सल एक कदम आगे बढ़कर इस फै़सले के लिए केंद्र की कांग्रेस सरकार को मुबारक़बाद देते हैं.

हालाकि शाह फै़सल कहते हैं कि अगर यह फै़सला उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव से और पहले आता तो बेहतर होता और तब इसके राजनीतिक अर्थ न लगाए जाते.

हालाँकि यह दोनों मानते हैं कि इस निर्णय से आगामी चुनाव में कांग्रेस को फ़ायदा होगा.

‘नाकाफ़ी’

उधर मुस्लिम आरक्षण आंदोलन के संयोजक ज़फरयाब जिलानी ने कहा है कि, "साढ़े चार फ़ीसदी आरक्षण एक आगे बढ़ता हुआ कदम है, लेकिन यह नाकाफ़ी है." श्री जिलानी की मांग है कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों को आबादी के अनुपात से नौ फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए. वर्षों पहले अयोध्या के विवादित राम जन्म भूमि बाबरी मस्जिद का ताला खोले जाने के बाद से उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समुदाय में कांग्रेस पार्टी के प्रति नाराजगी शुरू हो चुकी थी. फिर 1992 में मस्जिद गिरने के बाद मुसलमानों ने कांग्रेस से पूरी तरह मुंह मोड लिया था. मुस्लिम वोट समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की तरफ खिसक गया था. लेकिन पिछले लोक सभा चुनाव के दौरान मुलायम सिंह और कल्याण सिंह के हाथ मिलाने के बाद मुस्लिम मतदाता कांग्रेस की तरफ वापस लौटना शुरू हुए. गुरूवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल के अल्पसंख्यक समुदाय को आरक्षण देने के फ़ैसले से कुछ नेताओं में ख़ुशी की लहर सी दौड़ गई है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता सिराज मेंहदी का कहना है कि फ़िलहाल संविधान के दायरे में रहते हुए जितना संभव था किया गया. उन्होंने कहा, "हमारे घोषणा पत्र में जो था उसे पूरा किया है. पचास-साठ साल की आज़ादी के बाद कम से कम अल्पसंख्यक नाम से कुछ आरक्षण आया तो. लोग मुबारकवाद दे रहें हैं. मौलाना मुबारकवाद दे रहें हैं. आगे फिर मिलेगा."

राजनीति

अब विधान सभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्गों को अलग से साढ़े चार फीसदी का आरक्षण देकर एक ऐसा कदम उठाया है जिससे एक लंबे अरसे बाद मुस्लिम समुदाय लगता है दिल से कांग्रेस की तारीफ़ कर रहा है. इस बीच जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार के इस कदम का उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा लाभ मुस्लिम समुदाय को मिलेगा क्योंकि ईसाई , बौद्ध एवं सिख समुदायों में पिछडी जातियां लगभग नगण्य हैं.

उत्तर प्रदेश में आबादी का लगभग 18 फीसदी मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं. करीब सवा सौ विधान सभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक असर डालतें हैं. जबकि भारतीय जनता पार्टी ने मुस्लिम समुदाय के लिए पिछड़े वर्गों में अलग कोटा देने का विरोध किया है.

लेकिन समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी अभी तक इस फ़ैसले पर ख़ामोश हैं. सपा और बसपा नेता दबी ज़ुबान से कह रहें हैं कि साढ़े चार फीसदी पर्याप्त नही है, इसे आबादी के अनुपात से बढ़ाकर होना चाहिए. आरक्षण के इस कदम से मुस्लिम समुदाय का रुझान कांग्रेस के प्रति जरुर बढ़ा है . लेकिन चुनाव में उसका लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार कैसा है और वोटरों तक पहुँचने के लिए कांग्रेस संगठन की तैयारी कैसी है.

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