प्रधानमंत्री तमिलनाडु में, जयललिता से मिलेंगें

  • 25 दिसंबर 2011
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Image caption तमिलनाड़ु की मुख्यमंत्री जयललिता प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौपेंगीं.

मुल्लापेरियार बांध और कुडनकुलम परमाणु परियोजना पर चल रही राजनीतिक गहमा-गहमी के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दो दिन की यात्रा पर तमिलनाडु पहुंच गए हैं.

तमिलनाडु में इस साल कांग्रेस के सहयोगी दल डीएमके की चुनावी हार के बाद हुए सत्ता परिवर्तन के बाद ये पहली बार है जब प्रधानमंत्री राज्य के दौरे पर हैं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राज्य की मुख्यमंत्री जयललिता से आज शाम मुलाक़ात करेंगें.

मुलाक़ात के दौरान मुख्यमंत्री जयललिता प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपेंगीं जिसमें मुल्लापेरियार बांध पर केरल और तमिलनाडु के बीच का विवाद और कुडनकुलम परमाणु परियोजना के निर्माण से जुड़े मुद्दे उठाए जाने की उम्मीद है.

साथ ही ऐसी भी ख़बरें हैं कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान जयललिता तमिलनाडु के लिए दो लाख करोड़ रुपए के वित्तीय पैकेज की मांग को भी दोहराएंगीं.

मीडिया में आ रही ख़बरों के मुताबिक़ शनिवार को डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने कहा था कि वे प्रधानमंत्री से सोमवार को मुलाकात करेंगें और मुल्लापेरियार बांध के मुद्दे को उठाएंगें.

इसके अलावा उनका कहना था कि केरल में कथित रूप से हो रहे तमिल समुदायों पर हमले के मुद्दे को भी वे प्रधानमंत्री के समक्ष रखेंगें.

मुद्दे

मुल्लापेरियार बांध को लेकर हाल ही में राजनीतिक गहमा-गहमी बढ़ गई है और केरल और तमिलनाडु के राजनीतिक नेताओं के बीच बहस तेज़ हो गई है.

जहाँ तमिलनाडु की मांग है कि बाँध की उँचाई को 132 फ़ीट से बढ़ाकर 142 फ़ीट किया जाए, केरल सरकार चाहती है कि इसकी उँचाई को घटाया जाए क्योंकि ये बाँध सालों पुराना है और खतरनाक है.

जहां केरल की मांग है कि मुल्लापेरियार पर नया बांध बने और मौजूदा 116 साल पुराना बांध गिराया जाए, तो वहीं तमिलनाडु के नेताओं का कहना है कि ऐसा करना ख़तरे से खाली नहीं है.

केरल का कहना है कि वो तमिलनाडु को नया बाँध बना कर बराबर पानी देगा, लेकिन तमिलनाडु का मानना है कि केरल ने नए बाँध को जिस तरह से बनाने का प्रस्ताव दिया है वो तमिलनाडु को पानी से महरूम कर देगा.

मुख्यमंत्री जयललिता इस बाबत प्रधानमंत्री को कई चिट्ठियां लिख चुकी हैं औऱ बांध की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ़ की एक टीम की मांग कर चुकी हैं.

नाराज़गी

Image caption मुल्लापेरियार बांध को लेकर केरल और तमिलनाड़ु के बीच विवाद तूल पकड़ता जा रहा है.

इसके अलावा करुणानिधि ने भी बांध के मुद्दे पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के रवैये पर असंतुष्टि व्यक्त की थी.

इस बीच सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त की गई सशक्त समिति ने शनिवार को मुल्लापेरियार बांध का निरीक्षण शुरू कर दिया है.

जहां तक कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की बात है, तो हाल ही में प्रधानमंत्री के रूस में दिए गए बयान पर तमिलनाडु में काफ़ी विवाद हुआ था.

प्रधानमंत्री ने अपनी रूस यात्रा के दौरान कहा था कि कुडनकुलम परमाणु संयंत्र कुछ ही हफ़्तों में चालू हो जाएगा.

उनके इस बयान की जयललिता ने आलोचना की थी और कहा था कि केंद्र सरकार को परमाणु संयंत्र से जुड़ा कोई भी कदम उठाने से पहले स्थानीय लोगों की आशंकाओं को दूर करना चाहिए.

तमिलनाडु की विधानसभा में हाल ही में एक प्रस्ताव भी पास किया गया था जिसमें केंद्र सरकार से अपील की गई थी कि जब तक स्थानीय लोगों के भय को दूर न कर लिया जाए, तब तक परमाणु संयंत्र पर हो रहे निर्माण कार्य पर रोक लग जाए.

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना का पहला चरण दिसंबर तक शुरू करने की योजना थी, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के बीच संयंत्र के निर्माण की गति धीमी हो गई थी.

यात्रा के दूसरे दिन यानि 26 दिसंबर को प्रधानमंत्री मद्रास युनिवर्सिटी में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होंगे.

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