मुलाक़ात में छाया रहा परियोजना-बांध का मुद्दा

  • 26 दिसंबर 2011
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Image caption तमिलनाड़ु की मुख्यमंत्री जयललिता ने प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौपा.

मुल्लापेरियार बांध पर छिड़े ताज़ा विवाद के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के बीच हुई पहली मुलाकात में जयललिता ने 18 पन्नों का एक ज्ञापन सौंपते हुए प्रधानमंत्री से केरल को बांध न बनाने की सलाह देने की बात कही.

मुल्लापेरियार बांध और कुडनकुलम परमाणु परियोजना पर चल रही राजनीतिक गहमा-गहमी के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दो दिन की तमिलनाडु यात्रा पर हैं. इस मुद्दे पर तमिलनाडु और केरल के बीच लंबे समय से खींचातानी जारी है.

तमिलनाडु में इस साल कांग्रेस के सहयोगी दल डीएमके की चुनावी हार के बाद हुए सत्ता परिवर्तन के बाद ये पहली बार है जब प्रधानमंत्री राज्य के दौरे पर हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री और जयललिता के बीच कुडनकुलम परमाणु परियोजना को लेकर क्या बातचीत हुई लेकिन जयललिता ने इस बात पर हैरान जताई है कि प्रधानमंत्री ने हाल ही की अपनी रुस की यात्रा के दौरान कहा कि कुडनकुलम परमाणु परियोजना कुछ ही हफ़्तों में चालू हो जाएगी, जबकि परियोजना का काम देरी से चल रहा है.

परियोजना का हवाला देते हुए जयललिता ने कहा कि इस मामले में कोई भी क़दम उठाने से पहले वो स्थानीय लोगों की ओर से उठाए जा रहे सुरक्षा के सवालों को अच्छी तरह से परख लें.

स्थानीय लोगों का विरोध

तमिलनाडु की विधानसभा में हाल ही में एक प्रस्ताव भी पास किया गया था जिसमें केंद्र सरकार से अपील की गई थी कि जब तक स्थानीय लोगों के भय को दूर न कर लिया जाए, तब तक परमाणु संयंत्र पर हो रहे निर्माण कार्य पर रोक लग जाए.

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना का पहला चरण दिसंबर तक शुरू करने की योजना थी, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के बीच संयंत्र के निर्माण की गति धीमी हो गई थी.

Image caption केरल की मांग है कि मुल्लापेरियार पर नया बांध बने और मौजूदा 116 साल पुराना बांध गिराया जाए.

शनिवार को डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने कहा था कि वे प्रधानमंत्री से सोमवार को मुलाकात करेंगें और मुल्लापेरियार बांध के मुद्दे को उठाएंगें.

इसके अलावा उनका कहना था कि केरल में कथित रूप से हो रहे तमिल समुदायों पर हमले के मुद्दे को भी वे प्रधानमंत्री के समक्ष रखेंगें.

क्या हैं मुद्दे

मुल्लापेरियार बांध को लेकर जहाँ तमिलनाडु की मांग है कि बाँध की उँचाई को 132 फ़ीट से बढ़ाकर 142 फ़ीट किया जाए, केरल सरकार चाहती है कि इसकी उँचाई को घटाया जाए क्योंकि ये बाँध सालों पुराना है और खतरनाक है.

जहां केरल की मांग है कि मुल्लापेरियार पर नया बांध बने और मौजूदा 116 साल पुराना बांध गिराया जाए, तो वहीं तमिलनाडु के नेताओं का कहना है कि ऐसा करना ख़तरे से खाली नहीं है.

केरल का कहना है कि वो तमिलनाडु को नया बाँध बना कर बराबर पानी देगा, लेकिन तमिलनाडु का मानना है कि केरल ने नए बाँध को जिस तरह से बनाने का प्रस्ताव दिया है वो तमिलनाडु को पानी से महरूम कर देगा.

मुख्यमंत्री जयललिता इस बाबत प्रधानमंत्री को कई चिट्ठियां लिख चुकी हैं औऱ बांध की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ़ की एक टीम की मांग कर चुकी हैं.

इस बीच सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त की गई सशक्त समिति ने शनिवार को मुल्लापेरियार बांध का निरीक्षण शुरू कर दिया है.

अपनी यात्रा के दूसरे दिन यानि 26 दिसंबर को प्रधानमंत्री मद्रास युनिवर्सिटी में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होंगे.

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