लोकसभा में लोकपाल पर बहस शुरु

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मुंबई में अन्ना हज़ारे के तीन दिनों के अनशन के बीच दिल्ली में संसद का विस्तारित सत्र शुरू हो गया है. लोकपाल विधेयक पर बहस के लिए शीतकालीन सत्र का तीन दिनों के लिए विस्तार किया गया है.

लोकसभा में बहस की शुरूआत प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री नारायणसामी ने की है.

लोकपाल पर बहस के लिए सदन को फ़िलहाल आठ घंटों का समय दिया गया है.

उधर अन्ना ने मंगलवार सुबह जुहू-सांताक्रूज़ स्थित महात्मा गांधी की मूर्ति के अभिनंदन किया, इस समय वो मुंबई के एमएमआरडीए मैदान की ओर बढ़ रहे हैं. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अनशन स्थल पर सुरक्षा के इंतज़ामों के लिए 2000 कॉंस्टेबल, 200 सब-इंस्पैक्टर, राज्य रिज़र्व पुलिस बल की छह प्लाटून, त्वरित कार्रवाई में मुस्दैत दल की तीन टीमें और दो बम निरोधी दस्ते तैनात किए गए हैं.

मुंबई के साथ दिल्ली के रामलीला मैदान में भी प्रदर्शन की तैयारी की गई है.

अन्ना हज़ारे ने घोषणा की है कि अगर संसद में बहस के बाद भी सशक्त लोकपाल का मसौदा सामने नहीं आता है, तो मुंबई में तीन दिन के अनशन के बाद 30 तारीख़ को वह दिल्ली में सोनिया गांधी के घर के बाहर धरना करेंगें और उनके समर्थक जेल भरो आंदोलन करेंगे.

जेल भरो के समर्थन में 1.3 लाख

उसी दिन अन्ना के समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से पुलिस को अपनी ग़िरफ़्तारियां देंगे. इंटरनेट पर अन्ना के जेलभरो आंदोलन के समर्थन में अब तक 1.3 लाख से ज़्यादा लोग पंजीकरण करा चुके हैं.

सरकारी मसौदे में कुछ प्रावधानों को लेकर टीम अन्ना और सरकार के बीच मतभेद जारी हैं.

अन्ना और सरकार के बीच मतभेद का सबसे बड़ा मुद्दा है सीबीआई. जहां एक ओर अन्ना और उनके समर्थक सीबीआई को पूरी तरह लोकपाल के दायरे में चाहते हैं वहीं सरकार को ये मंज़ूर नहीं.

इसके अलावा टीम अन्ना चाहती है कि सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति में सरकार का दख़ल ना हो. जबकि सरकार कह रही है कि पीएम, नेता विपक्ष और मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति करें.

टीम अन्ना की मांग है कि भ्रष्टाचार के मामले की पूरी जांच का अधिकार लोकपाल के पास होना चाहिए, जबकि सरकारी बिल सिर्फ़ शुरुआती जांच की बात कहता है.

'बिल में संशोधन के लिए नोटिस'

लोकपाल पर दोनों पक्षों के बीच खींची तलवारों के बीच सोमवार को कंपनी मामलों के मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि अन्ना जो मांग कर रहे हैं वो आज तक किसी लोकतांत्रिक सरकार में नहीं हुआ और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी इस तरह की मांग पूरी नहीं की जा सकती.

सोमवार को भाजपा सहित वामपंथी दलों ने बिल में संशोधन के लिए सदन को नोटिस दिए. जहां एक ओर भाजपा लोकपाल में अल्पसंख्यक आरक्षण के मुद्दे पर ज़ोर-शोर से विरोध के स्वर उठा रही है वहीं वामपंथी सीबीआई को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने को लेकर लोकपाल के मौजूदा मसौदे से खुश नहीं है. सीपीआई कॉरपोरेट अपराध जैसे मुद्दों को भी इस बिल का हिस्सा बनाना चाहती है.

Image caption लोकपाल पर बहस के लिए कांग्रेस ने अपने सांसदों को व्हीप जारी कर सदन में मौजूद रहने को कहा है.

माना जा रहा है कि भाजपा लोकपाल के मसौदे में कम से कम 37 संशोधनों की बात रखेगी वहीं वामपंथी दल सीपीएम 11 संशोधन चाहता है.

'राज्यसभा में खड़ी हो सकती हैं मुश्किलें'

इस बीच अनशन पर बैठने से पहले ही 74 वर्षीय अन्ना हज़ारे का स्वास्थय पूरी तरह ठीक नहीं है. सोमवार को बुख़ार और चिकित्सीय परीक्षण के बाद वो सड़क मार्ग से छह घंटे की यात्रा कर अपने पैतृक गांव रालेगण-सिद्धी से मुंबई पहुंचे.

मुंबई रवाना होने से पहले अन्ना ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “कांग्रेस को अगर लगता है कि ये आंदोलन उनकी ही पार्टी विशेष के ख़िलाफ़ हो रहा है, तो वो ये बताए कि आज़ादी के 64 साल बाद भी भ्रष्टाचार पर ब्रेक लगाने वाला ऐसा कौन सा क़ानून बनाया आपने? ये आंदोलन किसी पक्ष, पार्टी या व्यक्ति के विरोध में नहीं बल्कि भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति के विरोध में है.”

संविधान विशेषज्ञों का मानना है कि लोकसभा में बहुमत के बीच लोकपाल बिल का पारित होना सरकार के लिए बड़ी समस्य़ा नहीं. लेकिन राज्यसभा में सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं क्योंकि इसके लिए विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी का समर्थन ज़रूरी होगा.

लोकपाल पर अहम बहस से पहले कांग्रेस ने अपने सांसदों को व्हीप जारी कर सदन में मौजूद रहने को कहा है.

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