भ्रष्टाचार के खिलाफ़ आख़िरी सांस तक लड़ेंगे: अन्ना हज़ारे

  • 27 दिसंबर 2011
अन्ना हज़ारे इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption अन्ना हज़ारे जिन तीन दिन अनशन पर रहेंगे उन्हीं तीन दिनों में संसद में लोकपाल विधेयक पर चर्चा होगी

लोकपाल के सरकारी विधेयक के विरोध में तीन दिन के अनशन पर बैठे अन्ना हज़ारे ने कहा है कि वह भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आख़िरी साँस तक लड़ते रहेंगे.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लोकपाल के मुद्दे पर जनता के साथ धोखा किया है.

अन्ना हज़ारे ने कहा, ''जिन्हें क़ानून बनाने का अधिकार है उन्हें पता होना चाहिए कि उन्हें जनता की सेवा के लिए चुना गया है.''

उन्होंने कहा कि वह उन पाँच राज्यों में भी जाएँगे जहाँ चुनाव होने वाले हैं और लोगों से सरकार को सबक सिखाने को कहेंगे.

अन्ना हज़ारे ने 'राइट टु रिजेक्ट' को भी लागू किए जाने की माँग की और कहा कि इससे राजनीति में आपराधिक छवि के लोगों को आने से रोका जा सकेगा.

एक मज़बूत लोकपाल की नियुक्ति की माँग को लेकर अन्ना हज़ारे अनशन पर बैठे हैं.

अन्ना हज़ारे का ये अनशन इस बार दिल्ली की बजाय मुंबई में हो रहा है और ये सिर्फ़ तीन दिन चलेगा. अन्ना हज़ारे ने इसके बाद यानी 30 दिसंबर से जेल भरो आंदोलन की घोषणा की है.

इसी मांग को लेकर वे इस वर्ष तीसरी बार अनशन कर रहे हैं. पहली बार उन्होंने अप्रैल में अनशन किया था और उसके बाद अगस्त में.

'भ्रष्टाचार को संरक्षण'

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption मुंबई में मंगलवार सुबह सौ-दो सौ लोगों की भीड़ से शुरू हुए अनशन में दिन चढ़ने के साथ हज़ारों लोग शामिल हुए

टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया और कहा कि लोकपाल पर उनके मसौदे पर विचार ही नहीं किया गया.

केजरीवाल के अनुसार अन्ना हज़ारे की तबीयत ठीक नहीं है लेकिन इसके बावजूद वो अनशन करना चाहते हैं.

अन्ना हज़ारे जिन तीन दिन अनशन पर रहेंगे उन्हीं तीन दिनों में संसद में लोकपाल विधेयक पर चर्चा होगी. सरकार चाहती है कि इन्हीं तीन दिनों में लोकपाल विधेयक पारित कर लिया जाए.

इससे पहले बंबई उच्च न्यायालय ने संसद में चर्चा के दौरान लोकपाल की मांग को लेकर अनशन के औचित्य पर सवाल उठाया था और कहा था कि इसे संसद की कार्यवाही में दख़लंदाज़ी के रूप भी देखा जा सकता है.

समर्थन

टीम अन्ना का कहना है कि जो विधेयक सरकार ने संसद में रखा है उससे लोकपाल एक कमज़ोर संस्था के रूप में स्थापित होगी.

इस विधेयक में परिवर्तनों की मांग को लेकर अन्ना हज़ारे एक बार फिर अनशन पर बैठे हैं.

अनशन पर बैठने से पहले जुहू पहुँचकर अन्ना ने महात्मा गांधी की मूर्ति पर फूल चढ़ाया.

यहाँ से वह खुले ट्रक में एमएमआरडीए मैदान पहुँचे. उनके साथ बड़ी संख्या में उनके समर्थक नारे लगाते हुए चल रहे थे.

अन्ना के विरोधियों का कहना है कि अन्ना को कॉरपोरेट सेक्टर का समर्थन हासिल है इसीलिए उन्होंने अपने लोकपाल बिल में कॉरपोरेट सेक्टर को शामिल नहीं किया है.

विरोधियों के अनुसार अन्ना संविधान और देश की संसदीय प्रणाली की मुख़ालफ़त कर रहें हैं.

अनशन और विरोध

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption अन्ना हज़ारे ने दिल्ली में भी अनशन की शुरुआत महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद शुरु की थी

अन्ना का विरोध करने वालों में शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता भी शामिल हैं. उनका कहना है कि अन्ना संविधान की गरिमा को कम करने की कोशिश कर रहें हैं.

शिव सेना और आरपीआई के समर्थकों ने भी अन्ना के आंदोलन का विरोध करते हुए उन्हें काले झंडे दिखाए हैं.

लेकिन फिर भी देश के कई इलाक़ों से लोग अन्ना के अनशन में शामिल होने के लिए मुंबई पहुंच रहे हैं.

मुंबई स्थित बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद का कहना है कि इस बार शहर में वो जोश नहीं देखा जा रहा है जैसा कि अगस्त में अन्ना के अनशन के दौरान देखने को मिला था. उनका कहना है कि अन्ना हज़ारे के पहुँचने से पहले मैदान पर क़रीब पाँच सौ लोग थे.

ये आंदोलन सामानांतर रूप से दिल्ली में भी हो रहा है, जहाँ वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता शांति भूषण अनशन कर रहे हैं. बीबीसी संवाददाता शालू यादव का कहना है कि जब अनशन शुरु हुआ उस समय रामलीला मैदान में सौ के क़रीब लोग ही थे.

संबंधित समाचार