लोकसभा में लोकपाल विधेयक पारित लेकिन नहीं मिला ‘संवैधानिक दर्जा’

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संसद में लोकपाल पर दिनभर चली बहस के बाद आखिरकार संशोधनों सहित लोकपाल विधेयक लोकसभा में पारित हो गया है.

लोकपाल विधेयक ध्वनिमत से लोकसभा में पारित हुआ.

लोकपाल विधेयक पारित होने के बाद लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने के लिए सदन में संवैधानिक संशोधन बिल पर वोटिंग कराई गई. पहली वोटिंग में यह विधेयक पारित हो गया, लेकिन इसके बाद विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने संवैधानिक संशोधन बिल पर बहुमत का सवाल उठाते हुए ज़रूरी मतों की संख्या के कम होने की बात कही. आखिरकार संवैधानिक संशोधन बिल लोकसभा में पारित नहीं हो सका.

लोकपाल विधेयक के बाद लोकसभा में संशोधनों सहित 'व्हिसलब्लोयर विधेयक' पर मतदान कराया गया और यह विधेयक भी लोकसभा में पारित हो गया. इसके बाद लोकसभा की कार्रवाई स्थगित कर दी गई.

सदन में बहस के दौरान विपक्षी दलों सहित वामपंथी दलों की ओर से सरकारी लोकपाल बिल के मसौदे में कई संशोधन सुझाए गए. इन संशोधनों के तहत राज्यों के पास अब लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक 2011 लागू करने संबंधी स्वतंत्रता होगी. साथ ही सैन्यबलों और कोस्ट गार्ड को विधेयक के दायरे से बाहर रखा गया है.

हालांकि मतदान के बाद ज़्यादातर संशोधन खारिज हो गए. सुझाए गए संशोधनों के खारिज होने के विरोध में लोकपाल बिल पारित होने के बाद वामपंथी दलों, बीजू जनता दल और एआईएडीएमके ने सदन से वॉक-आउट कर दिया.

अनशन तोड़ने की अपील

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Image caption मज़बूत लोकपाल की मांग को लेकर अनशन पर बैठे अन्ना हज़ारे का स्वाथ्य गिरता जा रहा है.

इस बीच मज़बूत लोकपाल की मांग को लेकर अनशन पर बैठे अन्ना हज़ारे का स्वाथ्य गिरता जा रहा है. पिछले कुछ दिनों से उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक खाली पेट होने के कारण दवाएं असर नहीं कर रही हैं और अन्ना को जल्द से जल्द कुछ खिलाए जाने की ज़रूरत है.

टीम अन्ना सहित महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज च्वहाण लगातार अन्ना हज़ारे से अनशन तोड़ने की अपील कर रहे हैं.

इससे पहले लोकपाल विधेयक पर बहस के दौरान भ्रष्टाचार को लेकर सरकार की नियत पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि सरकार सुझावों के प्रति असंवेदनशील नहीं है.

उन्होंने कहा, ''सरकार सदन के बाहर से आने वाली माँगों के लिए भी असंवेदनशील नहीं है, हम उस पर विचार कर रहे हैं और जितना हो सकेगा हम उसे शामिल भी करेंगे. मगर हम इस प्रणाली को नष्ट नहीं होने देंगे. विधेयक इस संसद के पटल पर होना चाहिए न कि धरनों के ज़रिए मंच पर या सड़कों पर. कितना भी विरोध प्रदर्शन हो जब तक विधायिका संतुष्ट नहीं होगी वो विधेयक नहीं बनेगा. ये आपको तय करना होगा कि आपको क्या करना है.''

सरकार के लिए अब अगली चुनौती लोकपाल विधेयक को राज्यसभा में पारित कराना है. राज्यसभा में यूपीए के पास ज़रूरी बहुमत नहीं है और राज्यसभा में बिल पारित कराने के लिए सरकार को हर कीमत पर अन्य दलों का समर्थन चाहिए होगा.

राज्यसभा से इस विधेयक के पारित होने के बाद इसे कानून का रूप दिए जाने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद ही यह विधेयक कानून का रूप ले सकेगा.

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