सभी पर अविश्वास लोकतंत्र के लिए ख़तरा: प्रधानमंत्री

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Image caption प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि लोकपाल विधेयक जल्द से जल्द पारित होना चाहिए

संसद में लोकपाल पर चल रही बहस में हिस्सा लेते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सांसदों से कहा कि वो दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लोकपाल बिल को पास करें.

लोकपाल की संस्था को संसद के प्रति जवाबदेह बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा है कि सभी पर अविश्वास करना लोकतंत्र की बुनियाद के लिए ख़तरा है.

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर ऐसी संस्था का निर्माण नहीं करना चाहिए जो लोकतंत्र की प्रणाली को नष्ट कर दे.

मनमोहन सिंह ने राज्यों में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए लोकायुक्त बनाने के महत्व पर ज़ोर दिया.

उन्होंने कहा कि केंद्रीय और राज्य स्तर पर भ्रष्टाचार के बीच में फ़र्क नहीं किया जाना चाहिए.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सांसदों से कहा कि वे राजनीति के दायरे से ऊपर उठ कर भ्रष्टाचार के बारे में सोचें और लोगों को दिखाएँ कि वे भ्रष्टाचार से निपटने को लेकर गंभीर हैं.

उन्होंने कहा, “सभी सांसदों ने ये वायदा किया था कि वो लोकपाल के साथ-साथ राज्यों में लोकायुक्त को बनाने को लेकर कटिबद्ध हैं. अगर ऐसा नहीं हुआ तो संसद के वायदे का उल्लंघन होगा.”

समस्या राज्य सरकारों के साथ

प्रधानमंत्री ने कहा कि असली समस्या राज्य सरकारों के साथ है जहाँ रोज़-रोज़ आम आदमी को भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है, इसलिए राज्यों में ग्रुप सी और डी कर्मचारियों को लोकायुक्त की परिधि में लाया गया है. यहीं पर भ्रष्टाचार से लड़ना होगा.

मनमोहन सिंह के मुताबिक लोकायुक्त बनने से भ्रष्टाचार पर लोगों के ग़ुस्से और निराशा से निपटने में मदद मिलेगी.

उन्होंने कहा, “जिस तरह से केंद्रीय स्कीमों का राज्यों में कार्यान्वयन किया जाता है, उससे लोगों में निराशा है. जब तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं होती तब तक भ्रष्टाचार का कैंसर फैलेगा. अब इसमें देरी उचित नहीं है. भ्रष्टाचार से निपटने में संघवाद आड़े नहीं आना चाहिए.”

सीबीआई पर मनमोहन सिंह ने कहा कि जाँच संस्था के कामकाज में दखलअंदाज़ी नहीं होनी चाहिए, लेकिन कोई भी संस्था या व्यक्ति जवाबदेही के दायरे से बाहर नहीं होनी चाहिए.

प्रधानमंत्री के अनुसार ऐसा बताया जा रहा है कि जिन लोगों को सीधे तौर पर चुना गया है उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता, लेकिन एक ऐसी संस्था जो सीधे तौर पर चुनी नहीं गई है, उसे ढेर सारे अधिकार दिए जाएँ और ऐसा करते वक्त उस पर भरोसा किया जाए.

उन्होंने कहा, “लोकपाल को बनाने के उत्साह में हमें ग़लती नहीं करनी चाहिए.”

लोकपाल विधेयक पर चर्चा में मनमोहन सिंह ने कहा कि सीबीआई को लोकपाल से स्वतंत्र होकर कार्य करना चाहिए लेकिन स्वतंत्रता का मतलब बिना जवाबदेही काम करना नहीं है. इसलिए सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति के लिए एक ऐसा पैनल चुना गया है जिसमें प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और उच्चतम न्यायालय के प्रमुख न्यायाधीश या उनका निर्वाचित सदस्य होगा.

सिंह ने कहा, “किसी को भी इस व्यवस्था पर शक़ नहीं होना चाहिए. जहाँ तक सीबीआई को लोकपाल के अधीन करने का मामला है, मेरी सरकार को लगता है कि ऐसा करने से ऐसा प्रबंधन तैयार होगा जो किसी के प्रति जवाबदेह नहीं होगा. ये संविधान के ख़िलाफ़ है.”

कर्मचारियों के कामकाज पर निगरानी रखने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके कामकाज में पारदर्शिता आनी चाहिए.

उन्होंने कहा, “मैं उन ईमानदार कर्मचारियों की सराहना करना चाहूँगा जिन्होंने अविश्वास के माहौल में अपने काम में सत्यनिष्ठा दिखाई है. हम ऐसा माहौल नहीं तैयार करें जिसमें सरकारी कर्मचारी अपनी निष्पक्ष राय देने से बचें.”

मनमोहन सिंह ने कहा कि बेईमानी और ईमानदारी से की गई ग़लतियों के बीच में फ़र्क किया जाना चाहिए क्योंकि कई बार कर्मचारियों, अफ़सरों को अनिश्चित माहौल में फ़ैसले लेने पड़ते हैं.

उन्होंने कहा, “सभी शासकीय प्रणालियाँ विश्वास पर आधारित होती हैं. सभी पर अविश्वास करना लोकतंत्र की बुनियाद के ख़िलाफ़ है.”

दूसरे दलों का विरोध

लोकपाल विधेयक पर विपक्षी दलों के सांसदों ने अपना विरोध जताया.

जनता दल यूनाइटेड प्रमुख शरद यादव ने टीम अन्ना के आंदोलन पर चुटकी लेते हुए कहा, “कौन लोग हैं आंदोलन में. कोई आदिवासी है? कोई अल्पसंख्यक है? कौन लोग किनसे डरे हुए हैं आप? ऐसा बिल लाए हो कि माथा पीटने का मन करता है.”

शरद यादव ने कहा कि विधेयक बनाते वक्त देश भर में फैले हुए लाखों कर्मचारियों से भी चर्चा होनी चाहिए थी.

यादव ने लोकपाल के ढाँचे को तैयार करने पर होने वाले ख़र्च पर सवाल उठाया और कहा कि सीबीआई को बुरा भला कहना पूरे तौर पर सही नहीं है.

उन्होंने सीबीआई को सही मायने में स्वायत्त और स्वतंत्र बनाने पर ज़ोर दिया.

शिवसेना के अनंत गीते ने कहा कि प्रधानमंत्री पद देश की गरिमा है और उनका दल नहीं चाहता कि उस गरिमा को ठेस पहुँचे.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी की सुप्रिया सूले ने सभी सांसदों से विधेयक का समर्थन करने को कहा. उन्होंने कहा कि सरकार के पास जादू की छड़ी नहीं है.

सूले ने कहा, “लोकपाल सभी समस्याओं का हल नहीं है, लेकिन ये शुरुआत है. सारा देश हमें देख रहा है. मैं नहीं चाहूँगी कि राज्यों के अधिकार ले लिए जाएं. जब तक चुनावी सुधार नहीं हों, तब तक बहुत फर्क नहीं पड़ेगा.”

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