लोकपाल का विरोध राजनीतिक षड्यंत्र: सिब्बल

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Image caption कपिल सिब्बल ने कहा कि असली भ्रष्टाचार राज्य सरकारों की सेवाओं में है

लोकपाल पर सदन में चल रही बहस में सरकार का पक्ष रखते हुए संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि अगर ये बिल पारित नहीं होता है तो देश की जनता विपक्षी भारतीय जनता पार्टी को माफ़ नहीं करेगी.

विपक्ष के ये कहने पर कि लोकपाल बिल संघीय ढाँचे पर प्रहार है, सिब्बल ने कहा कि कोई विधेयक संविधान के अनुकूल है या नहीं, ये फ़ैसला अदालतें करती है, सदन नहीं.

इससे पहले सुषमा स्वराज ने बिल को असंवैधानिक करार दिया था और कहा था कि अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण का प्रावधान संविधान के बुनियादी ढाँचे पर चोट है.

एक तरफ़ जहाँ संसद में लोकपाल बिल पर बहस चल रही है वहीं अन्ना हज़ारे मुंबई में अनशन पर बैठ गए हैं.

सिब्बल ने भाजपा के लोकपाल बिल पर विरोध को राजनीतिक षड्यंत्र बताया और कहा कि भाजपा चाहती है कि ये विधेयक पारित नहीं हो.

सिब्बल ने कहा, “असली भ्रष्टाचार राज्य सरकारों की सेवाओं में है. पटवारी काम नहीं करता. किसी को राशन नहीं मिलता, अस्पताल में जगह नहीं मिलती, हर बात पर घूस ली जाती हैं. आम आदमी को त्रस्त करने वाले मुद्दे राज्य सरकारों में हैं… गुजरात में नौ साल से लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हुई है..”

सिब्बल ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा केंद्र में तो लोकपाल लाना चाहती है लेकिन भाजपा शासित राज्यों में लोकायुक्त नहीं लाना चाहती है.

संविधान की रक्षा

लोकपाल पर सरकारी पक्ष रखते हुए संचार मंत्री ने कहा कि अगर कोई ऐसा ढाँचा बनता है जिसे ढेर सारी शक्तियाँ दे दी जाती हैं तो इससे लोकतंत्र को खतरा होगा और सरकार नहीं चाहती कि कोई असंवैधानिक ढाँचा बने.

उन्होंने कहा, “बड़े सोच-विचार से संविधान को सामने रखकर हमने आपको ये ढाँचा दिया है.”

लोकपाल में अल्पसंख्यकों के आरक्षण पर भाजपा के विरोध पर सिब्बल ने भाजपा से पूछा, अगर लोकपाल में अनुसूचित जातियों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों की उपस्थिति नहीं होगी, तो क्या आप जनता के साथ न्याय कर पाएँगे? क्या गुजरात में नरेंद्र मोदी जी उनका ख्याल रखेंगे?”

लोकपाल समिति में आरक्षण के मुद्दे पर कपिल सिब्बल ने कहा कि भाजपा नहीं चाहती कि 16 करोड़ अल्पसंख्यकों में से किसी एक को भी लोकपाल समिति में जगह मिले.

सिब्बल ने बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें सदन में घोषणा करनी चाहिए कि जहां भी भाजपा की सरकार है वहां अगले दो महीने में वो एक सशक्त लोकायुक्त बिल पास करेगी.

लोकपाल में और दूसरी आधिकारिक नियुक्तियों पर सिब्बल ने पूछा, “क्या सीएजी सरकार के आधीन है? नियुक्ति तो हमने की थी. चुनाव आयोग क्या हमारे आधीन है? आपने जो बहस छेड़ी, वो ग़लत है. अगर ग़ैर-सरकारी नियुक्ति होगी, तो ग़ैर-सरकारी काम होंगे.”

प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने के मुद्दे पर सिब्बल ने सुषमा स्वराज की ओर देखकर मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि पद को बुलेटप्रूफ़ इसलिए पहनाया गया है कि सरकार को पता है कि “आप बिना सोच समझकर फ़ायर करेंगे तो हमें कुछ तो करना होगा”.

'लोकतंत्र लोकपाल से बड़ा'

उधर समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने लोकपाल बिल को कमज़ोर बताया और कहा कि उसमें सुधार होना चाहिए.

उन्होंने लोकपाल बिल को सरकारी बिल बताया और आरोप लगाया कि सरकार ने अपनी सहूलियत के हिसाब से बिल में प्रावधान किए हैं.

उन्होंने कहा, "लोकतंत्र लोकपाल से बड़ा है."

यादव ने कहा कि सरकार में बैठे लोग कई बार बदले की भावना से काम करते हैं और दर्जनों मामले ऐसे हैं कि सरकार में रहते हुए कानून का दुरुपयोग किया गया है.

मुलायम सिंह यादव ने कहा,"आप आलोचना से नाराज़ हो जाते हैं. आपकी नाराज़गी से हमारा नुकसान होगा."

मुलायम सिंह यादव ने कुछ संशोधन सुझाए और कहा कि अगर संशोधन नहीं माने गए तो सीबीआई की तरह लोकपाल पर भी पक्षपात के आरोप लगेंगे.

सपा अध्यक्ष ने कहा, "सरकार के हज़ार हाथ हैं और कई तरह से लोगों को परेशान कर सकते हैं. राज्य सरकारों से भी बहुत अन्याय होता है. तो कैसे भ्रष्टाचार रुकेगा?"

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