अन्ना का अनशन ख़त्म, जेल-भरो वापस

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Image caption माना जा रहा है कि टीम अन्ना के भीतर मुंबई की भूख हड़ताल के समय और जगह को लेकर बहस चल रही है.

अन्ना हज़ारे ने मुंबई में भूख हड़ताल ख़त्म करते हुए 30 दिसंबर से शुरू होने वाला जेल-भरो आंदोलन वापस ले लिया है.

अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल के मुताबिक़ इसका कारण अन्ना हज़ारे की बिगड़ती तबियत और लोकसभा का “कमज़ोर” लोकपाल विधेयक पास करना है.

सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये फ़ैसला दिल्ली और मुंबई में कम भीड़ जुटने के कारण लिया गया, लेकिन अन्ना हज़ारे के सहयोगी अरिवंद केजरीवाल ने आंदोलन की सफलता पर उठ रहे सवालों को ख़ारिज किया है.

लोकसभा में लोकपाल विधेयक पर वोटिंग के दौरान समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के वॉकआउट पर केजरीवाल ने सवाल उठाया कि 'क्या सरकार ने दोनों पार्टियों को फिर सीबीआई मामलों पर धमकी दी थी'.

केजरीवाल के अनुसार जेल भरो आंदोलन रद्द नहीं किया गया है और ये उचित समय पर होगा.

उन्होंने मंगलवार को पास हुए क़ानून को लोगों के साथ धोखा बताया और कहा, “अब यहाँ पर अनशन पर बैठने का कोई मतलब नहीं रह जाता है और 30 तारीख़ से जेल-भरो आंदोलन का भी अब औचित्य नहीं है. हमारी टीम बैठेगी और आगे की रणनीति बनाएगी लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि हम पीछे हट रहे हैं.”

अन्ना हज़ारे के जेल भरो आंदोलन को स्थगित करने की अचानक की गई घोषणा पर कई लोगों को आश्चर्य हुआ क्योंकि कुछ देर पहले ही उन्होंने आंदोलन की तारीख़ दोहराई थी.

दिल्ली और मुंबई में कम भीड़ इकट्ठा होने की बात पर केजरीवाल ने कहा, “आंदोलन को खड़ा होने में समय लगता है. अगर अन्ना की भूख-हड़ताल अनिश्चितकालीन होती, तो भारी संख्या में लोग आते. अन्ना जान देने बैठे हैं. जनता को तय करना है कि वो कब आएगी. बांद्रा स्टेशन से लोगों को आने से रोका जा रहा है.”

जिन राज्यों में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने हैं, वहाँ पर टीम अन्ना के दौरों पर भी केजरीवाल ने कहा कि कार्यक्रम पर कोर कमेटी में बातचीत चल रही है.

माना जा रहा है कि टीम अन्ना के भीतर मुंबई की भूख हड़ताल के समय और जगह को लेकर बहस चल रही है और ये ताज़े फ़ैसले इसी सोच का प्रतीक हैं.

सरकार पर हमला

उधर मंगलवार को लोकसभा में पास हुए लोकपाल बिल पर टीम अन्ना ने सरकार पर हमला जारी रखा.

केजरीवाल ने कहा कि वो विधेयक को पूरी तरह से ख़ारिज करते हैं और जो बिल पारित हुआ है, वो देश के जनतंत्र के लिए ख़तरा है.

उन्होंने लोकपाल विधेयक को संसद का नहीं, बल्कि यूपीए का विधेयक बताया.

कमज़ोर दिख रहे अन्ना हज़ारे ने कहा, “इस देश में जनतंत्र नहीं रहा. हुकुमशाही आ गई है. जो संसद में हो रहा है, क्या आप उसे लोकशाही कहेंगे? ये क्या गणतंत्र है? इसलिए हमें एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी. हर राज्य में जाकर प्रचार करेंगे कि ऐसे लोगों को वोट मत दो.”

केजरीवाल ने कहा कि सांसद अपनी पार्टियों के बंधुआ मज़दूर बन गए हैं और उन्हें स्वतंत्र करवाने की लड़ाई लड़नी होगी.

बिल पर विरोध सामने रखते हुए केजरीवाल ने कहा कि कांग्रेस में मात्र दो लोगों की चलती है- सोनिया और राहुल गाँधी की.

उन्होंने कहा, “ये जनतंत्र नहीं है. आज हम जनतंत्र के ऊपर प्रश्न उठाना चाहते हैं कि क्या भारत जनतांत्रिक देश है. मंगलवार को लोकपाल बिल के मात्र नौ से दस संशोधन पारित हुए. ये संशोधन विपक्षी दलों के नहीं थे. वे शासकीय दल के थे. उन संशोधनों से इस विधेयक को और कमज़ोर कर दिया गया.”

केजरीवाल ने सेना के भ्रष्टाचार को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने का विरोध किया.

उन्होंने कहा, “लोकपाल में पहले था कि भ्रष्टाचार के मामले की जाँच छह महीने में पूरी होनी थी. अब उसे हटा लिया गया है. अब कितने ही दिनों, सालों में जाँच पूरी हो सकती है. सरकार भ्रष्टाचारी को मुफ़्त में वकील देगी."

केजरीवाल के अनुसार, “भ्रष्टाचारी को नोटिस देकर पूछना पड़ेगा कि आपके ख़िलाफ़ एफ़आईआर क्यों नहीं दर्ज की जाए. चार्जशीट दाख़िल करने से पहले उसे सारे सुबूत दिखाए जाएंगे और पूछा जाएगा कि आपके ख़िलाफ़ मुक़दमा क्यों नहीं दाख़िल किया जाए. पूरी दुनिया में हमने ऐसी न्याय व्यवस्था नहीं देखी.”

बाबा रामदेव को आंदोलन में भाग लेने का निमंत्रण दिए जाने पर अरविंद केजरीवाल ने कहा अन्ना के अनुसार बाबा रामदेव ने काले धन पर अच्छा आंदोलन किया था.

अन्ना हज़ारे ने कहा कि जो लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई लड़ रहे हैं, वो सब साथ लड़ते रहेंगे.