विधेयक पारित लेकिन ‘हर कोई नाखुश!’

  • 28 दिसंबर 2011
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Image caption प्रणव मुखर्जी ने कहा कि लोकपाल के संवैधानिक दर्जे के मुद्दे पर जनता भाजपा को ज़रूर सबक सिखाएगी.

लोकसभा में लोकपाल विधेयक पारित होने के बावजूद लोकपाल को संवैधानिक दर्जा न मिल पाना जहां एक ओर सरकार के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गया है वहीं सभी दल एक दूसरे के लिए ‘प्रतिबद्धता’ का सवाल उठा रहे हैं.

लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने वाले संवैधानिक संशोधन विधेयक के सदन में खारिज होने के बाद विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार से नैतिक आधार पर इस्तीफ़े की मांग की है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा, ''सरकार को नैतिक ज़िम्मेदारी के तहत इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अब पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं.''

लोकपाल विधेयक पारित होने के बावजूद सदन में दो-तिहाई बहुमत न होने के चलते संवैधानिक संशोधन विधेयक का पारित न होना सरकार के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गया है. लोकसभा में कांग्रेस के पास 275 हैं और संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए उसे 273 की संख्या ही चाहिए थी. यही वजह है कि सवाल उठ रहे हैं कि सरकार के अपने ही सांसदों और घटक दलों ने इस मुद्दे पर साथ क्यों नहीं दिया.

इस मसले पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सिन्हा ने कहा, ''लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने का प्रस्ताव खुद राहुल गांधी का था. उनका सपना टूट गया है. ये दिखाता है कि सरकार इस मसले पर खुद अपने दायरे में कितनी कमज़ोर है.''

'लोकपाल नहीं लोकपाल का मखौल'

संवैधानिक संशोधन विधेयक को लेकर बहुमत के सवाल पर सदन में पैदा हुए असमंजस के बाद यह विधेयक खारिज हो गया और इस घटनाक्रम से तिलमिलाए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि ये 'लोकतंत्र के लिए एक दुखभरा दिन है.'

उन्होंने कहा कि लोकपाल को संवैधानिक दर्जा न मिलने के लिए सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि भाजपा लोकपाल के लिए मुस्तैदी दिखाते हुए सदन में कहती कुछ और लेकिन करती कुछ और है.

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि इसके लिए जनता भाजपा को ज़रूर सबक सिखाएगी. केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, ''आज सदन में भाजपा ने असल में अपना असली रंग दिखा दिया क्योंकि भाजपा कभी भ्रष्टाटार के खिलाफ़ एक मज़बूत कानून चाहती ही नहीं.''

वहीं इस मसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सीपीआई नेता गुरुदास दास गुप्ता ने कहा कि सरकार को असल में आईना देखकर इस बात का एहसास करना चाहिए कि वो ज़रूरी बहुमत क्यों नहीं जुटा पाई. उन्होंने कहा कि सरकार का लोकपाल मज़बूत कानून नहीं बल्कि उसका मखौल है.

इस बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि सीपीएम और दूसरे वामपंथी दलों ने भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर असल में ‘लोकपाल विधेयक को हरा दिया.’

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