मायावती ने दो और मंत्री बर्ख़ास्त किए

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Image caption मायावती ने इस शासनकाल में 20 मंत्रियों को बर्ख़ास्त किया है

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने एक बार फिर अपनी सरकार के दो मंत्रियों को बिना कोई कारण बताए बर्ख़ास्त कर दिया है जबकि लोकायुक्त ने एक और मंत्री को पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का दोषी पाते हुए मंत्री पद से हटाने की सिफ़ारिश की है.

सरकार की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्यपाल ने मुख्यमंत्री की सिफ़ारिश पर अतिरिक्त ऊर्जा राज्य मंत्री अकबर हुसैन और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री यशपाल सिंह को पदमुक्त कर दिया है.

उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त जस्टिस एनके मेहरोत्रा ने मायावती सरकार के एक और मंत्री को भ्रष्टाचार का दोषी पाते हुए मंत्रिमंडल से हटाने की सिफ़ारिश की है.

जस्टिस मेहरोत्रा के अनुसार लघु उद्योग मंत्री चन्द्र देव राम यादव पर मुख्य आरोप यह था कि वह मंत्री पद पर रहते हुए एक स्कूल के हेड मास्टर के तौर पर वेतन ले रहे थे. इसके अलावा वह एक विद्यालय के मैनेजर के तौर पर सरकार से अनुदान भी ले रहे थे.

उन्होंने लोकायुक्त के समक्ष बयान में स्वीकार किया था कि वह मंत्री के साथ-साथ स्कूल हेड मास्टर के तौर पर भी वेतन ले रहे थे.

लंबी फ़ेहरिस्त

चन्द्र देव राम मायावती सरकार के छठे मंत्री हैं जिन्हें लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार का दोषी पाया है. लोकायुक्त ने इससे पहले राजेश त्रिपाठी, अवध पाल सिंह यादव, रंग नाथ मिश्र, बादशाह सिंह और रतन लाल अहिरवार को मंत्रिमंडल से हटाने की सिफ़ारिश की थी.

मायावती ने पिछले हफ़्ते चार मंत्रियों राकेश धर त्रिपाठी, राज पाल त्यागी, अवधेश कुमार वर्मा तथा हरि ओम उपाध्याय को बिना कोई कारण बताए बर्ख़ास्त कर दिया था.

सरकार के सबसे ताक़तवर मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी, रामवीर उपाध्याय, वन मंत्री फ़तेह बहादुर सिंह और खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राम प्रसाद चौधरी के ख़िलाफ़ अभी लोकायुक्त जाँच चल रही है.

इसके अलावा मुख्यमंत्री मायावती ने स्वयं भी कई अन्य मंत्रियों को आपराधिक मामलों अथवा भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते हटाया.

इनमें स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्र और परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में घोटालों और सीएमओ हत्याकांड के चलते हटाया गया. इस तरह पिछले पाँच सालों में बीस मंत्री मंत्रिमंडल से बाहर हुए.

मंत्रिमंडल के लगभग पचास फ़ीसदी मंत्री पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे हैं.

मायावती का कहना है कि उन्होंने अपने मंत्री, सांसदों अथवा विधायकों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई में कोई कोताही नहीं की और कइयों को तो जेल भी भेजा.

विपक्ष ने मुख्यमंत्री मायावती पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त क़ानून में लोकायुक्त को मुख्यमंत्री की जाँच करने का अधिकार नहीं है. इसलिए भारतीय जनता पार्टी नेता किरीट सोमैया ने कहा है कि वह मायावती के ख़िलाफ़ आरोपों की जांच के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे.

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