लोकतंत्र का चीरहरण हुआ है: सुषमा स्वराज

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राज्यसभा में गुरुवार को लोकपाल बिल पर सरकार के रुख़ की विपक्ष ने कड़ी आलोचना की है. गुरुवार मध्यरात्रि तक भी लोकपाल पर वोटिंग नहीं हो सकी और फिर राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई.

इस पूरे घटनाक्रम के बाद विभिन्न विपक्षी नेताओं ने सरकार पर तीखे प्रहार किए हैं वहीं सरकार ने अपना बचाव किया है.

भाजपा नेता अरुण जेटली- लोगों के सामने सरकार का पर्दा फ़ाश हो गया है. सरकार को एक दिन भी सत्ता में नहीं रहना चाहिए.

संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल- लोकपाल पर सरकार वचनबद्ध है. बिल बजट सत्र में आएगा

सीताराम येचुरी- सदन में जो कुछ भी हुआ वो सरकार की नैतिक हार थी. हमारी पार्टी का रुख़ यही है कि लोकपाल जल्द से जल्द गठित किया जाना चाहिए संसद में सरकार को बिल वापस लाना चाहिए.

सुषमा स्वराज- ये भारतीय लोकतंत्र के लिए काली रात है.राज्य सभा में लोकतंत्र का चीरहरण हुआ है. प्रधानमंत्री और प्रणब मुखर्जी जैसे वरिष्ठ नेता मौन साधे बैठे रहे.

कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद- विपक्ष, ख़ासकर भाजपा की मंशा थी कि लोकपाल की मूल भावना को नष्ट किया जाए. उन्होंने जानबूझकर बड़ी संख्या में संशोधन पेश किए. सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से भागी नहीं है. अगर ऐसा होता तो हम रात को 12 बजे तक नहीं बैठे रहते.

तृणमूल कांग्रेस नेता डेरिक ओब्रयान- ये लोकतंत्र की हत्या है.

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